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समीक्षा : ‘माँ की बातें’ कृतिकारा डॉ. पूनम पाठक ‘बदायूं’ : समीक्षक : महेंद्र ‘माणिक’

2 years ago
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यादों का झरोखा ‘मां की बातें’

माँ पर कविता वही लिख सकता है जिसका मन फूलों सा कोमल हो, हृदय जल सा तरल हो, भावनाएं आकाश में बादलों की तरह उमड़ती- घुमड़ती हों, संवेदनाएं समुद्र की गहराई सी अथाह हों व अंतस में ज्वार- भाटा सी हिलोरें लेती हों। कवयित्री बनने के लिए ये सभी गुण आदरणीयाश्री डॉ.पूनम पाठक जी में विद्यमान हैं।

प्रथम मैं डा पूनम जी को उनकी पुस्तक ‘माँ की बातें’ के प्रकाशन की हार्दिक बधाई देना चाहता हूं । उन्होंने यह पुस्तक अपनी माँ स्व. श्रीमती कृष्णा देवी जी को समर्पित की है यह जानकर किसी का भी मन भाव विभोर हो जाएगा।

पुस्तक ‘माँ की बातें’ में विभिन्न विषयों पर 114 रचनाएं हैं, परंतु सबसे ज्यादा रचनाएं माँ विषय पर लिखी गई हैं। यह पुस्तक 104 पृष्ठों की है। कवर डिजाइन बहुत ही मनमोहक है व शीर्षक के अनूरूप डिजाइन किया गया है। जिसके लिए ज्योति सिंह जी बधाई की पात्र हैं।
भूमिका हास्य-व्यंग्यकार महेन्द्र ‘माणिक’ ने लिखी है, शुभकामना संदेश लेखिका रितु शर्मा जी, साहित्यकार पी यादव ‘ओज’ जी व लेखिका प्रवेश शर्मा ‘पाठक’ जी ने लिखा है। यह किताब जाने- माने पब्लिकेशन हाउस, इंकलाब पब्लिकेशन, ठाणे मुंबई ने पब्लिश की है।

पुस्तक का प्रारंभ माँ सरस्वती का आशीर्वाद ले, याचना, प्रार्थना, वंदना द्वारा की गई। वहीं अंत अपने संक्षिप्त जीवन परिचय द्वारा किया गया। कवयित्री याचना करती हैं कि
‘ मैं अज्ञानी शब्द पुष्पित करूँ ,
कलम को शारदे तव कृपा मिले।’ व
‘ ज्ञान का वरदान माँगती हूँ, सिर पर तेरा हाथ माँगतीं हूँ।’

‘ पुस्तक का नाम एक कविता के शीर्षक पर रखा गया है व बहुत अच्छी परंपरा का निर्वहन कवयित्री ने किया है। जिसमें डॉ.पूनम जी माँ को याद कर लिखतीं हैं कि
‘ माँ का स्पर्श मखमली, प्यारी सी आवाज माँ की,
मुस्कराता चेहरा माँ का, प्यारी सी बातें माँ की।’
‘माँ की बातें ‘पुस्तक में अनेक कविताएं माँ पर लिखी गई हैं जैसे ‘बहाने क्या चाहिए’, ‘ सत्य पथ चुना’, ‘माँ से रिश्ता’, ‘ वह माँ है’, ‘सृष्टि की रचना’, फरियाद करती हूं’, कहतीं हैं
‘ एक माँ है बस ममता सींच देती है,
वह माँ है गुनाह माफ करती है,
दो शब्दों से दिल साफ करती है।’ इसी तरह
‘ माँ तस्वीर होती कहाँ है,
गुलाब से परे एक गुलाब होती है।
‘ माँ तू कहाँ है गई’ अंतर्मन को झिंझोड़ देने वाली रचना है जिसमें कहतीं हैं कि
‘ भोर हो जाने पर फ़ीके चाँद की तरह,
सूरज के आने पर ओस की तरह,
माँ कहाँ खो गई।’
‘झिंगोला’ कविता के माध्यम से नयनों में अश्रु ला माँ को याद किया है। ‘ स्मृति चिन्ह ‘ नामक कविता में उल्लेहित हो लिखतीं हैं कि
‘ अचानक एक दिन बेलन मिला,🌿
जो हर रोज ही उसके हाथ में आया करता,
जब स्पर्श किया तो बिल्कुल ऐंसा लगा,
वह मेरी माँ थी, उसकी आवाज थी।’
‘माँ के चरणों में ‘ माँ के विछोह में वेदना व्यक्त करती रचना है, ‘कैसा यह नियम ‘ रचना में प्रश्न कर अपार दुख व्यक्त किया गया।

‘क्यों याद आए’ रचना में कवयित्री भाव व्यक्त करती हैं कि..
‘ हर भाव में माँ ईश्वर ही दिखी, वो ईश्वर ही माँ क्यों याद आए’

कवयित्री प्रकृति प्रेम में आसक्त हैं व प्रकृति पर अनेक रचनाएं लिखीं हैं जैसे ‘सबके लिए’, ‘ मजबूर बादल’, ‘ क्या हमसे ज्यादा ‘, वृक्षों से प्यार करो’, ये हवा’, दो गज जमीं ‘, ‘गुलदाउदी ‘, इत्यादि।
‘धरती तू कितना सहती है ‘ रचना में कवयित्री कहतीं हैं कि
‘ धरती को हरा भरा रहने दो,
खुश रहो इसे खुश रहने दो,
क्यों जंगलों के संग बेरहमी,
धरती तूं कितना सहती है।’
इसी तरह मानव भविष्य की चिंता करते हुए प्रशन करतीं हैं कि
‘अगर पानी नहीं रहा धरा,
जिंदगानी फिर जिंदगानी कहाँ ।’

कवयित्री को समाज के सरोकारों से गहन रिश्ता है, वर्तमान पर जहां प्रश्न हैं वहीं भविष्य की भी चिंता है। कवयित्री सकारात्मक दृष्टिकोण की धनी हैं, कलम का कर्तव्य निभाते हुए कहती हैं कि
‘ कलम मत लिख देना भूखे पेट का दर्द,
हो सके तो अब दूध रोटी दाल लिख।’ कितनी सहजता से बड़ी गहरी बात कर एक तीर से कई निशाने लगाए हैं। ‘ ‘जीने की आशा लिए ‘, ‘लड़ना पड़ता है’, इसी प्रकार की रचनाएं हैं।

सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार करती कलम कहती है कि
‘ दुनिया में आने से पहले तेरी हत्या क्यों,
क्यों छिन जाता है , कोमल सा बचपन।’

इसी तरह सजग नागरिक का कर्तव्य निभाते हुए देश में आई आर्थिक विषमता पर घनिष्ठ सहेलियां बताकर अमीरी- गरीबी रचना के माध्यम से उत्कृष्ट सृजन किया है ,
‘ कुटिया में मिला सम्मान छिपा लेते हैं लोग, महलों में मिला सम्मान , सिर सजा लेते हैं लोग।’
जियो और जीने दो ‘ इस संदर्भ में उम्दा रचना है।

कहीं कहीं मैंने पाया है कि कवयित्री के ऊपर संत कबीर का गहन प्रभाव है।

बस यूँ ही शीर्षक से आठ भाग लिखे हैं जो संदेशात्मक हैं, ज्ञानवर्धक हैं, सोचने पर मजबूर करते हैं जैसे
‘ इंसानियत नहीं बटती, कई हिस्सों में,
धर्म को न लाओ कभी किस्सों में।’
एक जगह कितना गहरा इशारा किया है कवयित्री ने
‘ पानी से मैंने पूछा बददुआ तो नहीं दोगे,
पानी बोला, सिर्फ सूख जाऊंगा।’

‘दूर तक चले आए’ कविता में जिंदगी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि
‘ जिंदगी कभी कभी पानी कभी कहानी कहाए,
जिंदगी कभी सपना, कभी सच कहाए।’

कवयित्री की जिंदगी में रिश्ते अहम हैं, पूज्य हैं, सम्माननीय हैं यह उनकी रचनाओं से ज्ञात होता है जैसे
‘ रेशम का धागा’, ‘आसमां में एक चांद’।

बीच-बीच में व्यंग्य कटाक्ष भी बेहतरीन तरीके से पेश किया है जैसे
‘ इंसान एक अभिनेता है, जिंदगी एक नाटक है।’
‘जाते जाते चाय’ नामक कविता में करारा व्यंग्य किया है
‘नमक मिर्च मसाला है जिंदगी,
कभी फीकी सी है जिंदगी।’

कवयित्री के लेखन का मूलस्वरूप आध्यात्म में रचा-बसा है। उनकी रचनाएं ‘ मिले चौबीस घंटे हैं ‘, ‘ दो गज जमीं’, श्मशान’, ‘ परीक्षा लेते हैं ‘, ‘ सत्य मिटता नहीं ‘ इसके अप्रीतम उदाहरण हैं। ‘सांसें थमते थमते’ रचना में कहतीं हैं कि
‘ जिंदगी एक ऐसी किताब है,
जो कभी पूरी नहीं होती।’

नारी स्वाभिमान के सम्मान में उत्तम रचनाएं लिखीं हैं जैसे ‘अपने पंख’, ‘भाव जन समझें’, ‘खामोशी’ इत्यादि।
नारीत्व को निहारती कविता है ‘ हंसती नारी, घुटती नारी ‘ जिसमें वो कहती हैं कि
‘ कहीं लिख रही भाग्य औरों का,
तो कहीं कठपुतली बनी नारी,
वक्त है नारी, नारी को पहचान,
तेरी शक्ति, नारी शक्ति, तेरी शान।’

कवयित्री ‌देशप्रेम में सराबोर हैं, देशभक्ति उनकी रगों में दौड़ती है, ‌इसका प्रमाण उनकी रचनाओं से होता है जैसे ‘ चिर निद्रा व मौत ‘, केसरिया रंग आया है,
‘एक दिया उनके नाम का’, ‘जिंदगी के रंग, देश के लिए’ इत्यादि ।

‘वह तस्वीर न आएगी ‘ रचना में विज्ञान को परे रख बीते समय को याद कर शानदार प्रस्तुति देकर ‘नीर व शीषा ‘ की अद्भुत उपमा की है
‘नीर गिरे तो बहे, दिल न दुखाए,
शीशा गिरे हों टुकड़े, स्पर्श दिल चीर जाए।’

कवयित्री पर ग्रामीण जीवन की छाप है, लगाव है, ‘ मस्त गा रही है’ रचना के माध्यम से मनमोहक चित्रण किया है
‘ खेत में हवा चल रही थी,
खेतों में सुंदर हरियाली थी,
देखा मैंने एक महिला को,
गोबर के उपले बना रही थी।
‘ सब मिल बैठेंगे ‘ भी इसी तरह की रचना है।

स्वार्थी विचारधारा के लोगों को ‘आग ‘ रचना के माध्यम से कड़ा संदेश दिया है।
सांप्रदायिक सौहार्द की पक्षधर बन कवयित्री कहती हैं कि
‘ न तेरा, न मेरा बल्कि हिन्दुस्तान सबका है।’ इसी प्रकार ‘सब भुलाकर ‘ रचना में मानवता की वकालत करती हैं।

पुस्तक विषय पर स्वयं कवयित्री डॉ.पूनम जी कितनी सुंदर बात कहती हैं कि
‘ बड़ी कीमती धरोहर हैं पुस्तकें,
देश की अमूल्य निधि हैं पुस्तकें,
देखतीं रहेंगी सबको ज्ञान,
मेरी मित्र रहेंगी पुस्तकें।’

पुस्तक में ‘ कभी मौन भी, जैसी अनेक कविताएं हैं जो कवयित्री को स्थापित साहित्यकार होने का दर्जा प्रदान करती हैं।
कविताओं से स्पष्ट संकेत मिलता है कि कवयित्री को बात को घुमाकर, लाग लपेटकर, मसाला लगाकर कहने की आदत नहीं है, वो विषय को सीधे सच्चे सपाट तरीके से प्रस्तुत करती हैं। रचनाओं से ज्ञात होता है कि आप अनुशासन प्रिय हैं, स्वाभिमानी हैं, गलत को ग़लत कहने की बेबाक हिम्मत रखती हैं।

अंत में यही कहूंगा ‘ माँ की बातें ‘ पुस्तक माँ को ईश्वर का दर्जा देकर सृजित की अनुपम कृति है, जो अवश्य सफलता के चरण चूंमेगी, सभी पाठकों को माँ की बरबस याद दिलाने को मजबूर कर देगी, यही इस पुस्तक की सफलता का राज है।
मैं कवयित्री डॉ.पूनम पाठक जी के साहित्यक उज्जवल भविष्य की कामना करता हूँ व आशा करता हूँ कि शीघ्र ही उनकी अगली पुस्तक पाठकों के सामने होगी।
पूनम पाठक जी को मैंने डॉ. कहकर सम्बोधित किया है क्योंकि उनके लेखन में दर्शन भी दिखाई पड़ता है।

एक शानदार , जानदार काव्य संग्रह ‘माँ की बातें ‘ के लिए डॉ.पूनम पाठक जी को कोटि-कोटि बधाईयां, हार्दिक शुभकामनाओं, मंगलकामनाओं सहित….

[ समीक्षक महेंद्र ‘माणिक’ पुणे से हैं. हास्य व्यंग्य के कवि व लेखक हैं और ‘संस्था एक प्रयास’ के राष्ट्रीय संरक्षक हैं ]

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विशेष : भाईदूज, भाई-बहन के परस्पर प्रेम और दायित्व का त्योहार : भाईदूज और रक्षा बंधन की सनातनी मान्यताएं – श्रीमती संजीव ठाकुर
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18 दिसंबर को जयंती के अवसर पर गुरू घासीदास और सतनाम परम्परा

जयंती : सतनाम पंथ के संस्थापक संत शिरोमणि बाबा गुरु घासीदास जी
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जयंती : सतनाम पंथ के संस्थापक संत शिरोमणि बाबा गुरु घासीदास जी

व्यंग्य : नो हार, ओन्ली जीत ❗ – राजेंद्र शर्मा
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व्यंग्य : नो हार, ओन्ली जीत ❗ – राजेंद्र शर्मा

🟥 अब तेरा क्या होगा रे बुलडोजर ❗ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा.
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🟥 अब तेरा क्या होगा रे बुलडोजर ❗ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा.

🟥 प्ररंपरा या कुटेव  ❓ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा
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🟥 प्ररंपरा या कुटेव ❓ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा

▪️ न्यायपालिका के अपशकुनी के साथी : वैसे ही चलना दूभर था अंधियारे में…इनने और घुमाव ला दिया गलियारे में – आलेख बादल सरोज.
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▪️ न्यायपालिका के अपशकुनी के साथी : वैसे ही चलना दूभर था अंधियारे में…इनने और घुमाव ला दिया गलियारे में – आलेख बादल सरोज.

▪️ मशहूर शायर गीतकार साहिर लुधियानवी : ‘ जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है, जंग क्या मसअलों का हल देगी ‘ : वो सुबह कभी तो आएगी – गणेश कछवाहा.
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▪️ मशहूर शायर गीतकार साहिर लुधियानवी : ‘ जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है, जंग क्या मसअलों का हल देगी ‘ : वो सुबह कभी तो आएगी – गणेश कछवाहा.

▪️ व्यंग्य : दीवाली के कूंचे से यूँ लक्ष्मी जी निकलीं ❗ – राजेंद्र शर्मा
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▪️ व्यंग्य : दीवाली के कूंचे से यूँ लक्ष्मी जी निकलीं ❗ – राजेंद्र शर्मा

25 सितंबर पितृ मोक्ष अमावस्या के उपलक्ष्य में… पितृ श्राद्ध – श्राद्ध का प्रतीक
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25 सितंबर पितृ मोक्ष अमावस्या के उपलक्ष्य में… पितृ श्राद्ध – श्राद्ध का प्रतीक

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🟢 आजादी के अमृत महोत्सव पर विशेष : डॉ. अशोक आकाश.

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🟣 अमृत महोत्सव पर विशेष : डॉ. बलदाऊ राम साहू [दुर्ग]

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🟣 समसामयिक चिंतन : डॉ. अरविंद प्रेमचंद जैन [भोपाल].

राजनीति न्यूज़

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मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उदयपुर हत्याकांड को लेकर दिया बड़ा बयान

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■छत्तीसगढ़ :

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भारतीय जनता पार्टी,भिलाई-दुर्ग के वरिष्ठ कार्यकर्ता संजय जे.दानी,लल्लन मिश्रा, सुरेखा खटी,अमरजीत सिंह ‘चहल’,विजय शुक्ला, कुमुद द्विवेदी महेंद्र यादव,सूरज शर्मा,प्रभा साहू,संजय खर्चे,किशोर बहाड़े, प्रदीप बोबडे,पुरषोत्तम चौकसे,राहुल भोसले,रितेश सिंह,रश्मि अगतकर, सोनाली,भारती उइके,प्रीति अग्रवाल,सीमा कन्नौजे,तृप्ति कन्नौजे,महेश सिंह, राकेश शुक्ला, अशोक स्वाईन ओर नागेश्वर राव ‘बाबू’ ने सयुंक्त बयान में भिलाई के विधायक देवेन्द्र यादव से जवाब-तलब किया.

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भिलाई कांड, न्यायाधीश अवकाश पर, जाने कब होगी सुनवाई

धमतरी आसपास
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धमतरी आसपास

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स्मृति शेष- बाबू जी, मोतीलाल वोरा

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छत्तीसगढ़ कांग्रेस में हलचल

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राज्यसभा सांसद सुश्री सरोज पाण्डेय ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से कहा- मर्यादित भाषा में रखें अपनी बात

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल  ने डाॅ. नरेन्द्र देव वर्मा पर केन्द्रित ‘ग्रामोदय’ पत्रिका और ‘बहुमत’ पत्रिका के 101वें अंक का किया विमोचन
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मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने डाॅ. नरेन्द्र देव वर्मा पर केन्द्रित ‘ग्रामोदय’ पत्रिका और ‘बहुमत’ पत्रिका के 101वें अंक का किया विमोचन

मरवाही उपचुनाव
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प्रमोद सिंह राजपूत कुम्हारी ब्लॉक के अध्यक्ष बने

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ओवैसी की पार्टी ने बदला सीमांचल का समीकरण! 11 सीटों पर NDA आगे

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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, ग्वालियर में प्रेस वार्ता

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अमित और ऋचा जोगी का नामांकन खारिज होने पर बोले मंतूराम पवार- ‘जैसी करनी वैसी भरनी’

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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री, भूपेश बघेल बिहार चुनाव के स्टार प्रचारक बिहार में कांग्रेस 70 सीटों में चुनाव लड़ रही है

सियासत- हाथरस सामूहिक दुष्कर्म
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सियासत- हाथरस सामूहिक दुष्कर्म

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हाथरस गैंगरेप के घटना पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने क्या कहा, पढ़िए पूरी खबर

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पत्रकारों के साथ मारपीट की घटना के बाद, पीसीसी चीफ ने जांच समिति का किया गठन