• Chhattisgarh
  • कॉमरेड सीताराम येचुरी : समाजवाद और जनता की मुक्ति के प्रति अमिट प्रतिबद्धता के पांच दशक : आलेख- विजू कृष्णन : अनुवाद- संजय पराते

कॉमरेड सीताराम येचुरी : समाजवाद और जनता की मुक्ति के प्रति अमिट प्रतिबद्धता के पांच दशक : आलेख- विजू कृष्णन : अनुवाद- संजय पराते

2 years ago
391

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के महासचिव कॉमरेड सीताराम येचुरी भारत में वामपंथ के सबसे चर्चित चेहरों में से एक रहे हैं। पिछले दशक में वे कॉरपोरेट-सांप्रदायिक और तानाशाही शासन के सबसे मुखर विरोधियों में से एक रहे हैं। 1974 में स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के छात्र आंदोलन के जरिए अपनी राजनीतिक सक्रियता शुरू करने के बाद, उनके जीवन के अगले पाँच दशक समाजवाद और जनता की मुक्ति के प्रति अमिट प्रतिबद्धता के रहे।

1970 के दशक के उथल-पुथल भरे वर्षों में ही उनके राजनीतिक विचार प्रखर हुए। वियतनाम में अमेरिकी साम्राज्यवाद की अपमानजनक हार, दुनियां में साम्राज्यवाद-विरोधी आम उभार, चिली में प्रतिरोध के साथ अंतर्राष्ट्रीय एकजुटता, फिलिस्तीनी मुक्ति आंदोलन, रंगभेद-विरोधी आंदोलन और क्यूबा के लोगों के वीरतापूर्ण प्रतिरोध ने निस्संदेह उनके समय के युवाओं को प्रेरित किया था। इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार द्वारा लगाए गए तानाशाहीपूर्ण आपातकाल के दौरान वे भूमिगत हो गए और प्रतिरोध को संगठित किया, अंततः 1975 में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। आपातकाल के बाद, वे एक ही शैक्षणिक वर्ष 1977-78 के दौरान तीन बार जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष चुने गए। यह सम्मान केवल उनके ही पास है, जो उनकी लोकप्रियता के साथ-साथ कैंपस में उस एसएफआई की मजबूत उपस्थिति का प्रमाण है, जिसके निर्माण में उन्होंने मदद की। वे 1984-86 के दौरान वे एसएफआई के अखिल भारतीय अध्यक्ष रहे। 32 वर्ष की अपेक्षाकृत कम उम्र में ही उन्हें 1984 में सी.पी.आई.(एम.) की केंद्रीय समिति में शामिल कर लिया गया था और अगले वर्ष नवगठित केंद्रीय सचिवालय में शामिल कर लिया गया। 1992 में माकपा के 14वें अखिल भारतीय सम्मेलन में उन्हें पोलिट ब्यूरो के लिए चुना गया था।

पोलिट ब्यूरो में उनका प्रवेश ऐसे समय में हुआ था, जब दुनिया भर में समाजवाद के भविष्य को लेकर तीखी बहस चल रही थी और सोवियत संघ के पतन के बाद ‘इतिहास के अंत’ और उदारवादी नीतियों की जीत की चर्चा हो रही थी। यह वह समय भी था, जब भारत में फासीवादी आरएसएस के नेतृत्व में राजनीतिक दक्षिणपंथी ताकतें उभर रही थीं। उन्होंने सामूहिक नेतृत्व के साथ मिलकर सीपीआई-(एम) को वैचारिक स्पष्टता के साथ आगे बढ़ाया, जिससे कार्यकर्ताओं में निराशा टूटी और उम्मीद की किरण जगी। इस दौरान साम्राज्यवाद, नवउदारवादी आर्थिक नीतियों, सांप्रदायिक ताकतों और हिंदुत्व की विचारधारा पर उनके लेख बहुत प्रासंगिक हैं। भारत में गठबंधन की राजनीति के दौर में उन्होंने नीतियों और साझा न्यूनतम कार्यक्रम को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, खासकर तब जब पहली यूपीए सरकार बनी थी। यूपीए सरकार के पहले कार्यकाल के दौरान वामपंथ की ताकत का इस्तेमाल प्रगतिशील कानूनों जैसे कि मनरेगा, वन अधिकार अधिनियम, सूचना का अधिकार अधिनियम आदि के क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए किया जा सका।

12 वर्षों तक सांसद के रूप में, वे सांप्रदायिक-कॉर्पोरेट भाजपा शासन के खिलाफ सबसे प्रभावी आवाजों में से एक के रूप में देखे गए और कई मौकों पर उन्होंने सरकार को कटघरे में खड़ा किया। मजदूर वर्ग, किसानों और उत्पीड़ित लोगों के मुद्दों पर वे संसद के साथ-साथ सड़कों पर भी एक प्रेरक उपस्थिति थे। विशेष रूप से उल्लेखनीय है : भूमि अधिग्रहण अध्यादेश के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान उनकी भूमिका और किसानों के ऐतिहासिक संघर्ष के दौरान उनके समर्थन में विपक्षी दलों को लामबंद करना, जिससे अंततः नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार को माफी मांगने और तीन कॉर्पोरेट समर्थक कृषि अधिनियमों को वापस लेने के लिए मजबूर किया जा सका। विभाजनकारी नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ प्रतिरोध का निर्माण करने, संविधान, धर्मनिरपेक्षता, जम्मू और कश्मीर के लोगों के अधिकारों, राज्यों के संघीय अधिकारों, नागरिक स्वतंत्रता, उत्पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा में उनकी भूमिका ने भी उन्हें व्यापक सम्मान दिलाया। सार्वजनिक संपत्तियों के निजीकरण, खाद्य सुरक्षा, विमुद्रीकरण के खतरे, जीएसटी और ऐसे ही मामलों के साथ-साथ कॉर्पोरेट भाईचारे के खिलाफ भी उनकी आवाज एक मजबूत आवाज थी। वे जनता के एक उत्कृष्ट शिक्षक भी थे, जिन्होंने पूंजीवादी विकास के साम्राज्यवाद, फासीवाद और नवउदारवादी त्रिशूल का मुकाबला करने के लिए उन्हें वैचारिक रूप से तैयार किया। वर्ग संघर्ष को अस्पृश्यता, सामाजिक उत्पीड़न और भेदभाव के खिलाफ संघर्ष के साथ जोड़ने की आवश्यकता पर उनके विचार की स्पष्टता भी उल्लेखनीय है। अंतर्राष्ट्रीय कम्युनिस्ट आंदोलन के साथ-साथ विश्व के नेताओं के साथ उनके व्यापक संपर्क को भी बखूबी मान्यता मिली है और नेपाल में राजशाही विरोधी संघर्ष के बाद और वहां विभिन्न कम्युनिस्ट पार्टियों के साथ समन्वय सहित लोकतांत्रिक परिवर्तन में उनकी भूमिका को अक्सर उद्धृत किया जाता है।

नवउदारवादी आर्थिक नीतियों के क्रियान्वयन के साथ कृषि क्षेत्र में उभरते अंतर्विरोधों के बारे में उनकी अंतर्दृष्टि ने आंदोलन के एक सही कॉर्पोरेट विरोधी रुख को विकसित करने में मदद की, बिना इस तथ्य को नजरअंदाज किए कि इस एकता के केंद्र में भूमिहीन, खेत मजदूर और गरीब किसान होने चाहिए, जिनके इर्द-गिर्द एक साझा दुश्मन को हराने के उद्देश्य को पूरा करने के लिए सबसे व्यापक एकता का निर्माण किया जाना चाहिए। उन्होंने अक्सर पार्टी कार्यक्रम के इस पहलू पर जोर दिया कि कृषि क्रांति जनता की जनवादी क्रांति की धुरी है और इसके लिए मजबूत मजदूर-किसान एकता का महत्व को उन्होंने प्रतिपादित किया। कॉमरेड सीताराम ने लगातार भारत में हिंदुत्व फासीवादी ताकतों के उदय को वैश्विक पूंजी के उदय और आधिपत्य के साथ जोड़ा और जोर दिया कि केवल मजदूर-किसान गठबंधन ही इन विभाजनकारी फासीवादी ताकतों का विरोध कर सकता है और उसे पराजित कर सकता है।

व्यक्तिगत रूप से, मेरा उनसे तीन दशक पुराना जुड़ाव रहा है। 1995 में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के एक छात्र के रूप में मैं पहली बार उनसे छात्र संघ द्वारा आयोजित एक सार्वजनिक बैठक में मिला था। इस विश्वविद्यालय का मैं दस साल तक छात्र रहा। इस दौरान, ऐसे अनगिनत अवसर आए थे, जब उन्होंने अपने भाषणों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया, जिनमें राजनीतिक घटनाक्रमों पर रिपोर्टिंग, उनके व्यापक अनुभवों से जुड़े किस्से, सांस्कृतिक और साहित्यिक संदर्भ होते थे। उनके भाषणों में हास्य और तीखेपन का अद्भुत मिश्रण होता था। जेएनयू छात्र संघ के लिए एक के बाद एक चुनावों में, अंतिम आम सभा के वक्ता के रूप में उनकी मांग सबसे अधिक होती थी। यह आमसभा आमतौर पर चुनाव अभियान का चरमोत्कर्ष होता था, जो संगठित वामपंथ के पक्ष में निर्णायक माहौल बनाता था और हमेशा इसमें सबसे ज्यादा भीड़ होती थी। कई मायनों में हम उनके बोलने के क्रम का अनुमान लगा सकते थे। वे श्रोताओं से यह सवाल पूछते थे कि वे अंग्रेजी में बोलें या हिंदी में या अपनी मातृभाषा तेलुगू में, क्योंकि वे बहुभाषी थे। वे छात्र आंदोलन में अपने अनुभव बताते थे, तीन बार छात्र संघ के अध्यक्ष चुने जाने पर जोर देते हुए बताते थे कि जेएनयू में लोकतंत्र कैसे काम करता है। वे कांग्रेस द्वारा लगाए गए आपातकाल के दमन के बारे में बताते थे और कैसे उन्होंने इंदिरा गांधी को जेएनयू छात्र संघ की वह मांग पढ़कर सुनाई, जिसमें उनसे विश्वविद्यालय के कुलपति पद से हटने के लिए कहा गया था, जिस पर उन्होंने 1977 के चुनावों में अपनी हार के बाद भी कब्जा बनाए रखा था। पी.जी. वोडहाउस से कुछ उद्धृत करते हुए, गंगा छात्रावास में रहने की यादों को ताजा करते हुए, जो उस समय लड़कों का छात्रावास था, वे पूंजीवाद के ‘टीना’ के तर्क का “समाजवाद ही विकल्प है” जवाब देते हुए, मुस्कुराते हुए इसके संक्षिप्त नाम एसआईटीए (सीता) का जिक्र करते थे। यह केवल नए श्रोताओं को बाद में आने वाले अधिक महत्वपूर्ण मुद्दों की ओर आकर्षित करने के लिए एक तैयारी होती थी। वे जाति उत्पीड़न और सांप्रदायिक राजनीति की तीखी आलोचना के साथ-साथ विश्व घटनाक्रम, साम्राज्यवादी आक्रमण और राष्ट्रीय राजनीतिक परिदृश्य का विश्लेषण भी करते थे। समसामयिक मुद्दों पर व्यापक तरीके से चर्चा करने वाला उनके भाषण का यह अंतिम भाग सबसे अधिक अंतर्दृष्टिपूर्ण होता था और अध्यक्ष पद की बहस के लिए स्वर और भाव निर्धारित करता था और साथ ही मतदाताओं पर अपनी छाप छोड़ता था। जटिल मुद्दों से निपटते हुए भी सरल और आकर्षक तरीके से अपनी बात कहने की उनकी क्षमता, चाहे भाषण में हो या लेखन में, विशेष रूप से उल्लेखनीय है।

वे असाधारण शैक्षणिक योग्यता वाले व्यक्ति थे और आपातकाल के तुरंत बाद तेजी से बदलते राजनीतिक घटनाक्रम के कारण उन्हें अपनी पीएचडी छोड़नी पड़ी थी। मुझे बहुत प्यार से उनका यह आग्रह याद आता है कि मैं उनकी तरह और उनके कई अन्य साथियों की तरह अपनी पीएचडी पूरी करने से पहले बीच में न छोडूं। मैं वास्तव में इसे पूरा करने में कामयाब रहा। जब से मैंने अपनी अध्यापन की नौकरी छोड़ी और पार्टी और अखिल भारतीय किसान सभा में पूर्णकालिक रूप से काम करना शुरू किया, तब से कई ऐसे अवसर आए, जब हमने मुद्दों पर, आंदोलन की दिशा के बारे में और व्यापक सहमति बनाने के लिए बातचीत की। ऐसे भी अवसर आए, जब उन्होंने सलाह ली या ऐसे मुद्दों को ध्यान में लाया, जो हमारी प्रतिक्रिया के योग्य थे। पिछले तीन दशकों में, कई बार अलग-अलग बहसों के विपरीत पक्षों पर होने के बावजूद, उन्होंने हमेशा गर्मजोशी से भरा व्यवहार बनाए रखा और मेरे विचारों को आकार देने में भी भूमिका निभाई।

उनसे मेरी आखिरी बातचीत नागा लोगों की ओर से शांति प्रक्रिया की प्रगति के बारे में की गई थी और उन्होंने आश्वासन दिया था कि वे विपक्षी दलों को प्रधानमंत्री को पत्र लिखने के लिए प्रेरित करने में भूमिका निभाएंगे और उनके इन बड़े-बड़े दावों पर सवाल उठाएंगे कि उन्होंने मामले को सुलझा लिया है। यह काम अधूरा रह गया। अलविदा प्रिय कॉमरेड! लाल सलाम कॉमरेड सीताराम!!

• विजू कृष्णन

[ •आलेख के लेखक विजू कृष्णन ‘माकपा’ के केंद्रीय सचिवमंडल सदस्य और अखिल भारतीय किसान सभा के महासचिव हैं. • अनुवादक संजय पराते छत्तीसगढ़ किसान सभा के उपाध्यक्ष हैं. ]

🟥🟥🟥🟥

विज्ञापन (Advertisement)

ब्रेकिंग न्यूज़

भिलाई इस्पात संयंत्र : श्री श्री विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर 17 सितम्बर को होगा भव्य लाइट-साउंड-लेजर शो
breaking Chhattisgarh

भिलाई इस्पात संयंत्र : श्री श्री विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर 17 सितम्बर को होगा भव्य लाइट-साउंड-लेजर शो

छत्तीसगढ़ में फिर सक्रिय होगा मौसम, अगले 48 घंटे बारिश के आसार
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में फिर सक्रिय होगा मौसम, अगले 48 घंटे बारिश के आसार

छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटर से क्यों बढ़ रहा बिजली बिल? 2-3 गुना बिल की शिकायतों के बीच एक्सपर्ट ने बताए कारण
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटर से क्यों बढ़ रहा बिजली बिल? 2-3 गुना बिल की शिकायतों के बीच एक्सपर्ट ने बताए कारण

चिकित्सा शिक्षा को निजी हाथों में सौंपना गलत निर्णय– महंत, राज्यपाल को लिखा पत्र
breaking Chhattisgarh

चिकित्सा शिक्षा को निजी हाथों में सौंपना गलत निर्णय– महंत, राज्यपाल को लिखा पत्र

₹2,000 तक UPI ट्रांसफर पर कोई भी चार्ज नहीं लगेगा, सरकार ने दूर किया कनफ्यूजन
breaking National

₹2,000 तक UPI ट्रांसफर पर कोई भी चार्ज नहीं लगेगा, सरकार ने दूर किया कनफ्यूजन

नुआखाई समृद्ध कृषि परंपरा, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और अन्नदाता के परिश्रम का उत्सव : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय
breaking Chhattisgarh

नुआखाई समृद्ध कृषि परंपरा, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और अन्नदाता के परिश्रम का उत्सव : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

गणेशोत्सव पर छत्तीसगढ़ में 700 करोड़ का कारोबार, 50 लाख घरों में विराजेंगे बप्पा, मूर्तियों के दाम 50% तक बढ़े
breaking Chhattisgarh

गणेशोत्सव पर छत्तीसगढ़ में 700 करोड़ का कारोबार, 50 लाख घरों में विराजेंगे बप्पा, मूर्तियों के दाम 50% तक बढ़े

छत्तीसगढ़ में दिव्यांगजनों को बड़ी सौगात नेत्रहीन भी बन सकेंगे प्रथम-द्वितीय श्रेणी के अधिकारीसरकारी पद चिन्हांकित
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में दिव्यांगजनों को बड़ी सौगात नेत्रहीन भी बन सकेंगे प्रथम-द्वितीय श्रेणी के अधिकारीसरकारी पद चिन्हांकित

छत्तीसगढ़ में थमेगी बारिश की रफ्तार, रायपुर में 32 डिग्री तक पहुंचेगा तापमान; जानें आज का मौसम
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में थमेगी बारिश की रफ्तार, रायपुर में 32 डिग्री तक पहुंचेगा तापमान; जानें आज का मौसम

जशपुर से बस्तर तक कंटेंट क्रिएटर्स का कमाल, छत्तीसगढ़ी संस्कृति को 40 देशों तक पहुंचाया, भाषा बनी डिजिटल ताकत
breaking Chhattisgarh

जशपुर से बस्तर तक कंटेंट क्रिएटर्स का कमाल, छत्तीसगढ़ी संस्कृति को 40 देशों तक पहुंचाया, भाषा बनी डिजिटल ताकत

महतारी वंदन योजना से लखपति दीदी तक… ढाई साल में विष्णु देव साय सरकार के बड़े फैसलों से ऐसे बदली छत्तीसगढ़ की तस्वीर
breaking Chhattisgarh

महतारी वंदन योजना से लखपति दीदी तक… ढाई साल में विष्णु देव साय सरकार के बड़े फैसलों से ऐसे बदली छत्तीसगढ़ की तस्वीर

ताकतवर की सेवा करना और कमजोर को धोखा क्या यही न्याय है? – एमए बेबी, महासचिव, सीपीआईएम
breaking Chhattisgarh

ताकतवर की सेवा करना और कमजोर को धोखा क्या यही न्याय है? – एमए बेबी, महासचिव, सीपीआईएम

ब्रह्माकुमारीज़ : ‘एक रिश्ता- जो जीवन बदल दे’ थीम पर श्री कृष्ण की दिव्य झांकी [3-22 सितम्बर, 2026] कर रही है सभी को आकर्षित
breaking Chhattisgarh

ब्रह्माकुमारीज़ : ‘एक रिश्ता- जो जीवन बदल दे’ थीम पर श्री कृष्ण की दिव्य झांकी [3-22 सितम्बर, 2026] कर रही है सभी को आकर्षित

तमिलनाडु के सलेम स्टील प्लांट के महिला सर्किल समूह महिला समाज का तीज मिलन समारोह सम्पन्न
breaking Chhattisgarh

तमिलनाडु के सलेम स्टील प्लांट के महिला सर्किल समूह महिला समाज का तीज मिलन समारोह सम्पन्न

PM मोदी की बात पुतिन-शी तक पहुंचाने वाले सिद्धार्थ बाबू कौन? AIR 15 के बाद भी IAS नहीं, चुना IFS
breaking international

PM मोदी की बात पुतिन-शी तक पहुंचाने वाले सिद्धार्थ बाबू कौन? AIR 15 के बाद भी IAS नहीं, चुना IFS

प्रधानमंत्री आवास योजना में बड़ा अपडेट: छत्तीसगढ़ के शहरी क्षेत्रों में इतने सालों से रह रहे हैं तो हो जाएंगे पात्र
breaking Chhattisgarh

प्रधानमंत्री आवास योजना में बड़ा अपडेट: छत्तीसगढ़ के शहरी क्षेत्रों में इतने सालों से रह रहे हैं तो हो जाएंगे पात्र

छत्तीसगढ़ के रेल यात्रियों को बड़ा झटका, तीजा और गणेश चतुर्थी पर 7 मेमू और पैसेंजर ट्रेनें रद, यात्री बसों पर बढ़ा दबाव
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ के रेल यात्रियों को बड़ा झटका, तीजा और गणेश चतुर्थी पर 7 मेमू और पैसेंजर ट्रेनें रद, यात्री बसों पर बढ़ा दबाव

छत्तीसगढ़ में 14 सितंबर तक जारी रहेगा बारिश का दौर, ठंडी हवा और बूंदाबांदी ने बढ़ाई ठंडक, सुहाना हुआ मौसम
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में 14 सितंबर तक जारी रहेगा बारिश का दौर, ठंडी हवा और बूंदाबांदी ने बढ़ाई ठंडक, सुहाना हुआ मौसम

सरकारी स्कूलों में बड़ा बदलाव! प्राचार्यों को अब रोज करना होगा ये काम, जानिए छात्रों पर क्या पड़ेगा प्रभाव?
breaking Chhattisgarh

सरकारी स्कूलों में बड़ा बदलाव! प्राचार्यों को अब रोज करना होगा ये काम, जानिए छात्रों पर क्या पड़ेगा प्रभाव?

सीएम विष्णु देव साय ने परिवार संग देखी फिल्म ‘हनुमान अंश’, बाबा नीम करौली के जीवन पर बनी फिल्म को छत्तीसगढ़ में टैक्स फ्री किया, राज्यपाल और विधानसभा अध्यक्ष भी मौजूद रहे
breaking Chhattisgarh

सीएम विष्णु देव साय ने परिवार संग देखी फिल्म ‘हनुमान अंश’, बाबा नीम करौली के जीवन पर बनी फिल्म को छत्तीसगढ़ में टैक्स फ्री किया, राज्यपाल और विधानसभा अध्यक्ष भी मौजूद रहे

कविता

हिंदी दिवस पर विशेष : डॉ. विजय कुमार गुप्ता ‘मुन्ना’
poetry

हिंदी दिवस पर विशेष : डॉ. विजय कुमार गुप्ता ‘मुन्ना’

देश के सुविख्यात गीतकार डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’ द्वारा रचित विश्वकर्मा कुल गीत लाँच हुआ
poetry

देश के सुविख्यात गीतकार डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’ द्वारा रचित विश्वकर्मा कुल गीत लाँच हुआ

विशेष : हमारे श्री कृष्ण- डॉ. नीलकंठ देवांगन
poetry

विशेष : हमारे श्री कृष्ण- डॉ. नीलकंठ देवांगन

आरंभ साहित्यिक मंच : डॉ. दीक्षा चौबे
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच : डॉ. दीक्षा चौबे

आरंभ साहित्यिक मंच : दीप्ति श्रीवास्तव
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच : दीप्ति श्रीवास्तव

आरंभ साहित्यिक मंच : डॉ. विजय कुमार गुप्ता ‘मुन्ना’
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच : डॉ. विजय कुमार गुप्ता ‘मुन्ना’

डॉ. संजय दानी की ग़ज़ल संग्रह ‘चश्मेबद्दुर’ मेरी नज़र में- प्रदीप भट्टाचार्य
poetry

डॉ. संजय दानी की ग़ज़ल संग्रह ‘चश्मेबद्दुर’ मेरी नज़र में- प्रदीप भट्टाचार्य

कविता आसपास : तारकनाथ चौधुरी
poetry

कविता आसपास : तारकनाथ चौधुरी

कवि और कविता : पल्लव चटर्जी
poetry

कवि और कविता : पल्लव चटर्जी

आरंभ साहित्यिक मंच : उभरते हुए प्रगतिशील परंपरा एवं सोच के कवि डॉ. गिरधर चंद्रा ‘साज़’
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच : उभरते हुए प्रगतिशील परंपरा एवं सोच के कवि डॉ. गिरधर चंद्रा ‘साज़’

इस माह की कवयित्री –  सेवानिवृत्त प्राचार्या शासकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय जुनवानी भिलाई जिला- दुर्ग छत्तीसगढ़ की श्रीमती वर्षा ठाकुर
poetry

इस माह की कवयित्री – सेवानिवृत्त प्राचार्या शासकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय जुनवानी भिलाई जिला- दुर्ग छत्तीसगढ़ की श्रीमती वर्षा ठाकुर

आरंभ साहित्यिक मंच : बांग्ला-हिंदी के सुविख्यात प्रगतिशील परंपरा के छोटी-छोटी कविताओं के रचनाशील कवि पल्लव चटर्जी
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच : बांग्ला-हिंदी के सुविख्यात प्रगतिशील परंपरा के छोटी-छोटी कविताओं के रचनाशील कवि पल्लव चटर्जी

पावस रचना : दीप्ति श्रीवास्तव
poetry

पावस रचना : दीप्ति श्रीवास्तव

आरंभ साहित्यिक मंच – अर्पिता चौधुरी
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच – अर्पिता चौधुरी

इस माह के ग़ज़लकार : सुशील यादव
poetry

इस माह के ग़ज़लकार : सुशील यादव

आरंभ साहित्यिक मंच : शुचि ‘भवि’
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच : शुचि ‘भवि’

आज पढ़ें ‘आरंभ’ साहित्यिक मंच में बांग्ला और हिंदी के सुस्थापित कवि पल्लव चटर्जी
poetry

आज पढ़ें ‘आरंभ’ साहित्यिक मंच में बांग्ला और हिंदी के सुस्थापित कवि पल्लव चटर्जी

इस माह की कवयित्री : शुचि ‘भवि’
poetry

इस माह की कवयित्री : शुचि ‘भवि’

आरंभ साहित्यिक मंच : संध्या जैन
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच : संध्या जैन

कवि और कविता : इस माह के कवि में नीलमचंद सांखला
poetry

कवि और कविता : इस माह के कवि में नीलमचंद सांखला

कहानी

बचपन आसपास [बाल कहानी] – बलदाऊ राम साहू
story

बचपन आसपास [बाल कहानी] – बलदाऊ राम साहू

लेख : कैलाश जैन बरमेचा
story

लेख : कैलाश जैन बरमेचा

कहानी : दीप्ति श्रीवास्तव
story

कहानी : दीप्ति श्रीवास्तव

लघु कथा : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय
story

लघु कथा : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय

लघुकथा : सरस सलिला – दीप्ति श्रीवास्तव
story

लघुकथा : सरस सलिला – दीप्ति श्रीवास्तव

आलेख : ‘बहकता बचपन’ – साजिद अली ‘सतरंगी’
story

आलेख : ‘बहकता बचपन’ – साजिद अली ‘सतरंगी’

स्वर्ग का न्याय : महेश की आत्मकथा – लेखक शायर नावेद रज़ा दुर्गवी
story

स्वर्ग का न्याय : महेश की आत्मकथा – लेखक शायर नावेद रज़ा दुर्गवी

कहानी : ‘पीहू’ – डॉ. दीक्षा चौबे
story

कहानी : ‘पीहू’ – डॉ. दीक्षा चौबे

संदेशप्रद लघु कथा : ‘पुकार’ – कैलाश बरमेचा जैन
story

संदेशप्रद लघु कथा : ‘पुकार’ – कैलाश बरमेचा जैन

लेखिका विद्या गुप्ता की कृति ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ की समीक्षा लेखक कवि विजय वर्तमान के शब्दों में – ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ यह विद्या गुप्ता की सच्ची, निर्भीक और सर्व स्वीकार्य घोषणा है
story

लेखिका विद्या गुप्ता की कृति ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ की समीक्षा लेखक कवि विजय वर्तमान के शब्दों में – ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ यह विद्या गुप्ता की सच्ची, निर्भीक और सर्व स्वीकार्य घोषणा है

मास्टर स्ट्रोक [व्यंग्य] : राजशेखर चौबे
story

मास्टर स्ट्रोक [व्यंग्य] : राजशेखर चौबे

लघु कथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती
story

लघु कथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती

सत्य घटना पर आधारित कहानी : ‘सब्जी वाली मंजू’ :  ब्रजेश मल्लिक
story

सत्य घटना पर आधारित कहानी : ‘सब्जी वाली मंजू’ : ब्रजेश मल्लिक

लघुकथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती
story

लघुकथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती

कहिनी : मया के बंधना – डॉ. दीक्षा चौबे
story

कहिनी : मया के बंधना – डॉ. दीक्षा चौबे

🤣 होली विशेष :प्रो.अश्विनी केशरवानी
story

🤣 होली विशेष :प्रो.अश्विनी केशरवानी

चर्चित उपन्यासत्रयी उर्मिला शुक्ल ने रचा इतिहास…
story

चर्चित उपन्यासत्रयी उर्मिला शुक्ल ने रचा इतिहास…

story

रचना आसपास : उर्मिला शुक्ल

story

रचना आसपास : दीप्ति श्रीवास्तव

story

कहानी : संतोष झांझी

लेख

‘साहित्य सृजन परिषद्’ के तत्वावधान में पावस ऋतु पर सरस काव्य गोष्ठी 26 जुलाई को इंदिरा गाँधी उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय सुपेला-भिलाई में अपराह्न 2.30 बजे से
Article

‘साहित्य सृजन परिषद्’ के तत्वावधान में पावस ऋतु पर सरस काव्य गोष्ठी 26 जुलाई को इंदिरा गाँधी उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय सुपेला-भिलाई में अपराह्न 2.30 बजे से

रवींद्र-नज़रूल उत्सव-2026 : ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में रवींद्र-नज़रूल उत्सव 25 जुलाई को ‘ऑफिसर्स एसोसिएशन प्रगति भवन’ में प्रात:11.00 बजे से रात 8.00 बजे तक
Article

रवींद्र-नज़रूल उत्सव-2026 : ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में रवींद्र-नज़रूल उत्सव 25 जुलाई को ‘ऑफिसर्स एसोसिएशन प्रगति भवन’ में प्रात:11.00 बजे से रात 8.00 बजे तक

काव्य संध्या : प्रगतिशील कवि डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय के निवास में दिव्या सक्सेना, विजया भारती, गजेंद्र द्विवेदी ‘गिरीश’, पारुल पांडेय, संजय मैथिल, युसूफ सागर, हाजी रियाज़ खान गौहर, मनमोहन मतवाला, ओम पांडेय, डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’, छ्गनलाल सोनी, संतराम वर्मा और डॉ. आरबी कुशवाहा शामिल हुए
Article

काव्य संध्या : प्रगतिशील कवि डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय के निवास में दिव्या सक्सेना, विजया भारती, गजेंद्र द्विवेदी ‘गिरीश’, पारुल पांडेय, संजय मैथिल, युसूफ सागर, हाजी रियाज़ खान गौहर, मनमोहन मतवाला, ओम पांडेय, डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’, छ्गनलाल सोनी, संतराम वर्मा और डॉ. आरबी कुशवाहा शामिल हुए

विशेष : भाईदूज, भाई-बहन के परस्पर प्रेम और दायित्व का त्योहार : भाईदूज और रक्षा बंधन की सनातनी मान्यताएं – श्रीमती संजीव ठाकुर
Article

विशेष : भाईदूज, भाई-बहन के परस्पर प्रेम और दायित्व का त्योहार : भाईदूज और रक्षा बंधन की सनातनी मान्यताएं – श्रीमती संजीव ठाकुर

Article

तीन लघुकथा : रश्मि अमितेष पुरोहित

व्यंग्य : देश की बदनामी चालू आहे ❗ – राजेंद्र शर्मा
Article

व्यंग्य : देश की बदनामी चालू आहे ❗ – राजेंद्र शर्मा

Article

लघुकथा : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय [केंद्रीय विद्यालय वेंकटगिरि, आंध्रप्रदेश]

जोशीमठ की त्रासदी : राजेंद्र शर्मा
Article

जोशीमठ की त्रासदी : राजेंद्र शर्मा

18 दिसंबर को जयंती के अवसर पर गुरू घासीदास और सतनाम परम्परा
Article

18 दिसंबर को जयंती के अवसर पर गुरू घासीदास और सतनाम परम्परा

जयंती : सतनाम पंथ के संस्थापक संत शिरोमणि बाबा गुरु घासीदास जी
Article

जयंती : सतनाम पंथ के संस्थापक संत शिरोमणि बाबा गुरु घासीदास जी

व्यंग्य : नो हार, ओन्ली जीत ❗ – राजेंद्र शर्मा
Article

व्यंग्य : नो हार, ओन्ली जीत ❗ – राजेंद्र शर्मा

🟥 अब तेरा क्या होगा रे बुलडोजर ❗ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा.
Article

🟥 अब तेरा क्या होगा रे बुलडोजर ❗ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा.

🟥 प्ररंपरा या कुटेव  ❓ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा
Article

🟥 प्ररंपरा या कुटेव ❓ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा

▪️ न्यायपालिका के अपशकुनी के साथी : वैसे ही चलना दूभर था अंधियारे में…इनने और घुमाव ला दिया गलियारे में – आलेख बादल सरोज.
Article

▪️ न्यायपालिका के अपशकुनी के साथी : वैसे ही चलना दूभर था अंधियारे में…इनने और घुमाव ला दिया गलियारे में – आलेख बादल सरोज.

▪️ मशहूर शायर गीतकार साहिर लुधियानवी : ‘ जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है, जंग क्या मसअलों का हल देगी ‘ : वो सुबह कभी तो आएगी – गणेश कछवाहा.
Article

▪️ मशहूर शायर गीतकार साहिर लुधियानवी : ‘ जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है, जंग क्या मसअलों का हल देगी ‘ : वो सुबह कभी तो आएगी – गणेश कछवाहा.

▪️ व्यंग्य : दीवाली के कूंचे से यूँ लक्ष्मी जी निकलीं ❗ – राजेंद्र शर्मा
Article

▪️ व्यंग्य : दीवाली के कूंचे से यूँ लक्ष्मी जी निकलीं ❗ – राजेंद्र शर्मा

25 सितंबर पितृ मोक्ष अमावस्या के उपलक्ष्य में… पितृ श्राद्ध – श्राद्ध का प्रतीक
Article

25 सितंबर पितृ मोक्ष अमावस्या के उपलक्ष्य में… पितृ श्राद्ध – श्राद्ध का प्रतीक

Article

🟢 आजादी के अमृत महोत्सव पर विशेष : डॉ. अशोक आकाश.

Article

🟣 अमृत महोत्सव पर विशेष : डॉ. बलदाऊ राम साहू [दुर्ग]

Article

🟣 समसामयिक चिंतन : डॉ. अरविंद प्रेमचंद जैन [भोपाल].

राजनीति न्यूज़

breaking Politics

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उदयपुर हत्याकांड को लेकर दिया बड़ा बयान

Politics

■छत्तीसगढ़ :

Politics

भारतीय जनता पार्टी,भिलाई-दुर्ग के वरिष्ठ कार्यकर्ता संजय जे.दानी,लल्लन मिश्रा, सुरेखा खटी,अमरजीत सिंह ‘चहल’,विजय शुक्ला, कुमुद द्विवेदी महेंद्र यादव,सूरज शर्मा,प्रभा साहू,संजय खर्चे,किशोर बहाड़े, प्रदीप बोबडे,पुरषोत्तम चौकसे,राहुल भोसले,रितेश सिंह,रश्मि अगतकर, सोनाली,भारती उइके,प्रीति अग्रवाल,सीमा कन्नौजे,तृप्ति कन्नौजे,महेश सिंह, राकेश शुक्ला, अशोक स्वाईन ओर नागेश्वर राव ‘बाबू’ ने सयुंक्त बयान में भिलाई के विधायक देवेन्द्र यादव से जवाब-तलब किया.

breaking Politics

भिलाई कांड, न्यायाधीश अवकाश पर, जाने कब होगी सुनवाई

धमतरी आसपास
Politics

धमतरी आसपास

Politics

स्मृति शेष- बाबू जी, मोतीलाल वोरा

Politics

छत्तीसगढ़ कांग्रेस में हलचल

breaking Politics

राज्यसभा सांसद सुश्री सरोज पाण्डेय ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से कहा- मर्यादित भाषा में रखें अपनी बात

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल  ने डाॅ. नरेन्द्र देव वर्मा पर केन्द्रित ‘ग्रामोदय’ पत्रिका और ‘बहुमत’ पत्रिका के 101वें अंक का किया विमोचन
Politics

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने डाॅ. नरेन्द्र देव वर्मा पर केन्द्रित ‘ग्रामोदय’ पत्रिका और ‘बहुमत’ पत्रिका के 101वें अंक का किया विमोचन

मरवाही उपचुनाव
Politics

मरवाही उपचुनाव

Politics

प्रमोद सिंह राजपूत कुम्हारी ब्लॉक के अध्यक्ष बने

Politics

ओवैसी की पार्टी ने बदला सीमांचल का समीकरण! 11 सीटों पर NDA आगे

breaking Politics

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, ग्वालियर में प्रेस वार्ता

breaking Politics

अमित और ऋचा जोगी का नामांकन खारिज होने पर बोले मंतूराम पवार- ‘जैसी करनी वैसी भरनी’

breaking Politics

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री, भूपेश बघेल बिहार चुनाव के स्टार प्रचारक बिहार में कांग्रेस 70 सीटों में चुनाव लड़ रही है

सियासत- हाथरस सामूहिक दुष्कर्म
breaking National Politics

सियासत- हाथरस सामूहिक दुष्कर्म

breaking Politics

हाथरस गैंगरेप के घटना पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने क्या कहा, पढ़िए पूरी खबर

breaking Politics

पत्रकारों के साथ मारपीट की घटना के बाद, पीसीसी चीफ ने जांच समिति का किया गठन