• Chhattisgarh
  • विशेष : वीबी-ग्रामजी के नियम भेदभावपूर्ण, इसे वापस लें और मनरेगा जारी रखें : बृंदा करात ने शिवराज सिंह चौहान को लिखा पत्र

विशेष : वीबी-ग्रामजी के नियम भेदभावपूर्ण, इसे वापस लें और मनरेगा जारी रखें : बृंदा करात ने शिवराज सिंह चौहान को लिखा पत्र

1 month ago
163

▪️ • बृंदा करात माकपा और जनवादी महिला समिति की वरिष्ठ नेत्री हैं

• 29 जून, 2026
आदरणीय शिवराज सिंह चौहान जी,

मैं आपको नए कानून, ‘विकसित भारत – रोज़गार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) गारंटी अधिनियम’ के लागू होने की पूर्व-संध्या पर यह पत्र लिख रही हूँ।

कल (28 जून), मैं राजस्थान के उदयपुर ज़िले के बारापाला आदिवासी गाँव में मनरेगा के लिए निश्चित एक कार्य स्थल पर थी। वहाँ मैं मजदूरों से बातचीत कर रही थी, जिनमें से अधिकांश महिलाएं थीं। राजस्थान में काम के लिए गर्मियों के हिसाब से खास समय तय होता है। सुबह 6:30 बजे से 10 बजे तक, यानी चार घंटे तक, बहुत सारी महिलाएँ आधिकारिक ऑनलाइन अटेंडेंस साइट के खुलने का इंतज़ार करती रहीं। लेकिन बार-बार कोशिश करने के बाद भी नेटवर्क कनेक्शन नहीं मिल पाया और प्रभारी ‘मेट’ को आख़िरकार यह कहना पड़ा कि उस दिन कोई काम नहीं हो पाएगा। मुझे बताया गया कि सामान्यतः ऐसा होता रहता है।

पिछले साल दिसंबर में जब मनरेगा को खत्म किया गया, तो संसद को भरोसा दिलाया गया था कि नया कानून लागू होने तक मनरेगा में काम जारी रहेगा। इसके बावजूद, इन महिला मज़दूरों को जनवरी से जून के बीच सिर्फ़ 18 दिन ही काम मिला है। कम से कम 12 बुज़ुर्ग महिला मज़दूरों ने बताया कि बायोमेट्रिक चेहरा पहचान प्रणाली ने उन्हें काम से बाहर धकेल दिया हैं, क्योंकि तकनीक ने उनकी आँखों को पहचानने से इंकार कर दिया। मैंने उदयपुर ज़िले के कई आदिवासी गाँवों में मज़दूरों से मुलाक़ात की। सभी की एक ही शिकायत थी। मनरेगा को बंद करना ग्रामीण ग़रीबों के लिए बहुत बुरा साबित हुआ है।

मैं आपको ये विवरण इसलिए दे रही हूँ, क्योंकि आपके मंत्रालय ने , ग्रामीणों और मनरेगा मज़दूर संगठनों और यूनियनों से बिना किसी बातचीत के, 22 मई को वीबी-ग्रामजी अधिनियम को लागू करने के लिए आठ नियमों का एक सेट जारी किया है। शायद अगर उनसे बातचीत की गई होती, तो मैंने ऊपर जो वास्तविक समस्याएँ बताई हैं, उन पर इन नियमों में ध्यान दिया गया होता। इसके विपरित, यह बहुत चिंता की बात है कि ये नियम मज़दूरों की आवाज़ और उनकी वास्तविक समस्याओं को नज़रअंदाज़ करने के मामले में, पहले से ही त्रुटिपूर्ण वीबी-ग्रामजी कानून से भी एक कदम आगे निकल गए हैं।

पहला सवाल यह उठता है कि क्या ये नियम संविधान के अनुच्छेद 258 का उल्लंघन करते हैं? इस अनुच्छेद का संबंध उन प्रावधानों से है, जो राज्यों पर जिम्मेदारियां “सौंपते या थोपते” हैं। वीबी-ग्रामजी कानून, राज्य सरकारों से बिना किसी सलाह-मशविरे या सहमति के, उन पर न केवल जिम्मेदारियां “थोपता” है, बल्कि उन पर वित्तीय बोझ भी डालता है। इस अनुच्छेद की उप-धारा (3) में कहा गया है : “जब इस अनुच्छेद के तहत किसी राज्य या उसके अधिकारियों या प्राधिकरणों को शक्तियां और जिम्मेदारियां सौंपी या थोपी जाती हैं, तो भारत सरकार राज्य को वह राशि देगी, जिस पर सहमति बनी हो, या सहमति न बनने की स्थिति में, भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा नियुक्त मध्यस्थ द्वारा तय की गई राशि का भुगतान किया जाएगा। यह भुगतान उन शक्तियों और जिम्मेदारियों के पालन के संबंध में राज्य द्वारा उठाए गए किसी भी अतिरिक्त प्रशासनिक खर्च के लिए होगा।” ये नियम न केवल राज्यों पर जिम्मेदारियां थोपते हैं, बल्कि निर्णय लेने की प्रक्रिया में राज्यों की किसी भी भूमिका को पूरी तरह से नकारते हैं। यह एक महत्वपूर्ण सवाल है, जिस पर मैं आपसे प्रतिक्रिया देने का अनुरोध करती हूं।

ये नियम : (1) फ़ैसले लेने की सारी ताक़त केंद्र सरकार के हाथों में केंद्रित करते हैं। (2) राज्य सरकारों को क़ानून लागू करने में कोई भी भूमिका नहीं देते, सिवाय उसके जो केंद्र सरकार तय करती है ; इस तरह ये संविधान के संघीय ढांचे पर हमला करते हैं। (3) फ़ंड के बंटवारे के लिए ऐसे “वस्तुनिष्ठ” पैमाने तय करते हैं, जो न तो वस्तुनिष्ठ हैं और न ही निष्पक्ष। (4) तकनीकी पर बहुत ज़्यादा निर्भर हैं। (5) मज़दूरी तय करने के लिए कोई पैमाना नहीं बताते।

संवैधानिक मुद्दे के अलावा, मैं कुछ अहम मुद्दों के बारे में विस्तार से बताऊंगी, जिन पर मैं आपसे विचार करने का अनुरोध करती हूं :

मानक आबंटन (नियम 396ई) : कानून में पहले ही परिवर्तन किया जा चुका है और इस कार्यक्रम को मांग पर आधारित व्यवस्था से बदलकर फंड आबंटन पर निर्भर व्यवस्था में बदला जा चुका है, जिसमें केंद्र सरकार केवल 60 प्रतिशत राशि का भुगतान करती है। लेकिन नियम (396 ई) एक कदम और आगे बढ़कर मजदूरों के साथ उनके निवास स्थान के आधार पर भेदभाव करने वाला ढांचा बनाते हैं। इसे अब और क्या कहा जा सकता है, जब यह नियम कहता है कि आबंटन का आधार “सोलहवें वित्त आयोग द्वारा अनुशंसित और भारत सरकार द्वारा स्वीकृत क्षैतिज हस्तांतरण” होगा। यह मापता है कि किसी राज्य का प्रति व्यक्ति जीएसडीपी सबसे अमीर राज्यों की तुलना में कितना कम है, जिसे 42.5 प्रतिशत से अधिक का वेटेज दिया गया है। इसके बाद, सबसे अधिक वेटेज जनसंख्या (17.5%) को दिया गया है, जिससे बड़े राज्यों को लाभ होगा। इस कानून के तहत काम की मांग करने वाले ग्रामीण मज़दूरों का इन मानदंडों से क्या लेना-देना है?

दक्षिणी राज्यों की आबादी कम है। फिर भी, वे औसतन सबसे ज़्यादा दिनों का काम उपलब्ध करा रहे हैं। उदाहरण के लिए, केरल राज्य ने साल में औसतन 66 दिनों का काम दिया है, जो राष्ट्रीय औसत से कहीं ज़्यादा है। बहरहाल, आबादी को 17 प्रतिशत वेटेज दिए जाने के कारण केरल को फंड से वंचित होना पड़ेगा। जीएसडीपी के मामले में तमिलनाडु शीर्ष पाँच राज्यों में शामिल है। फिर भी, यहाँ मनरेगा के सबसे ज़्यादा सक्रिय मजदूर हैं। तथ्य बताते हैं कि सोलहवें वित्त आयोग के मानदंड का काम की माँग से कोई लेना-देना नहीं है। जिन राज्यों का जीएसडीपी ज़्यादा है और आबादी कम है, उन्हें कम फंड मिलेगा। इसके अलावा, नियमों में कहा गया है कि आबंटन का एक हिस्सा बेहतर प्रदर्शन के लिए “इनाम” के तौर पर दिया जाएगा। क्या काम के अधिकार को राज्य सरकारों की कार्यक्षमता या अक्षमता का बंधक बनाया जाएगा, जैसा कि केंद्र सरकार ने तय किया है? मानक आबंटन का पूरा मानदंड ही बेहद आपत्तिजनक और भेदभावपूर्ण है, और इस पर तुरंत पुनर्विचार करने की ज़रूरत है।

“अतिरिक्त खर्च” (नियम 403ई) : यह बात भी उतनी ही आपत्तिजनक है कि ये नियम किसी राज्य में काम की व्यवस्था करने के लिए ज़्यादा फंड देने के फ़ैसले को बहुत अपमानजनक तरीके से “अतिरिक्त खर्च” कहते हैं। असल में, केंद्र सरकार ही करों में छूट देकर कॉर्पोरेटों को सब्सिडी देने के मामले में “अतिरिक्त खर्च” करने और ग्रामीण कामकाजी गरीबों के मामले में “कम खर्च” करने की दोषी है। राज्य सरकार क्या खर्च करना चाहती है, यह उसका अपना मामला है। बहरहाल, यह नियम राज्य के खर्च को केंद्र की वित्तीय निगरानी प्रणाली से अनिवार्य रूप से जोड़ते हैं। यह राज्य सरकार के अपने फंड से विस्तार और नवाचार करने के अधिकारों, और काम के अधिकार पर हमले का एक उदाहरण है।

मज़दूरी के भुगतान का तरीका (402ई) और मज़दूरों की पहचान (397ई) : ये नियम मज़दूरी की दरें तय करने, मज़दूरी बढ़ाने की अनिवार्य समय-सीमा, मूल्य सूचकांक से जुड़ाव वगैरह पर कोई चर्चा नहीं करते। इनमें सिर्फ़ “भुगतान के तरीके” का ज़िक्र है, जो ग्रामीण हकीकत पर नहीं, बल्कि तथाकथित तकनीकी रूप से विकसित भारत की सोच पर आधारित है। मज़दूरों के लिए अलग-अलग ऑनलाइन पंजीयन पर ज़ोर देना गलत और अन्यायपूर्ण है। इंटरनेट ठीक होने पर भी इसमें एक से तीन घंटे लग सकते हैं। क्या इस समय के लिए भी मज़दूरी मिलेगी या ग्रामीण मज़दूरों के समय की कोई कीमत नहीं है? हाज़िरी दर्ज करने के और भी तरीके हैं। अधिकारियों की बेईमानी की सज़ा मज़दूरों को क्यों मिलनी चाहिए? यह पूरा तरीका एक ऐसी सोच पर आधारित है कि तकनीक का मतलब ही न्याय है। लाखों मनरेगा मज़दूरों का अनुभव बताता है कि यह सच नहीं है। कानून के मुताबिक, मज़दूरी पीस रेट पर तय होती है। लेकिन उत्पादकता के नियम अक्सर मनमाने और इतने ऊंचे होते हैं कि एक मज़दूर के लिए बुनियादी न्यूनतम मज़दूरी कमाना भी नामुमकिन हो जाता है। नियमों में समय के इस्तेमाल का नियमित सर्वे होना चाहिए, ताकि काम करने लायक नियम तय किए जा सकें। चूंकि इन कार्यस्थलों पर काम करने वालों में महिलाओं की बड़ी संख्या है, इसलिए हाथ से काम करने वाली महिला मज़दूरों की मेहनत की लूट रोकने के लिए यह और भी ज़रूरी है।

नियम (397ई) में कहा गया है कि संक्रमण के दौर में, पहले से मौजूद उन जॉब कार्ड का इस्तेमाल किया जा सकता है, जो ई-केवाईसी से सत्यापित हैं और आधार से जुड़े हैं। यह भी बिना सोचे-समझे लिया गया और गलत फैसला है। इसका मतलब है कि लगभग 44 प्रतिशत सक्रिय मजदूरों को काम नहीं मिल पाएगा। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने बताया है कि आधे से कुछ ज़्यादा, यानी 56 प्रतिशत लोगों का ही ई-केवाईसी सत्यापन हुआ है। ई-केवाईसी सत्यापन के लिए स्मार्टफ़ोन जैसे तकनीकी साधनों की ज़रूरत होती है, जो शायद कई ग्रामीण मज़दूरों के पास न हों। अगर किसी मजदूर के पास पहचान का कोई दूसरा सबूत है, तो ऐसे सत्यापन पर ज़ोर देना पूरी तरह से गलत है।

राष्ट्रीय स्तर पर संचालन कमिटी (397ई) केंद्रीय परिषद (399ई) : इन नियमों के तहत एक राष्ट्रीय स्तर पर संचालन कमिटी (एनएलएससी) बनाई गई है, जो असल में केंद्र सरकार द्वारा मनोनीत किया गया एक सरकारी निकाय है। इसमें राज्यों का प्रतिनिधित्व बहुत कम है – सिर्फ़ पाँच राज्य ही इसके सदस्य हैं – और इसमें मज़दूरों के प्रतिनिधियों या किसी भी हितधारक को शामिल नहीं किया गया है। यहां तक कि जिन मंत्रालयों को इसमें रखा गया है, वे भी इस प्रक्रिया के प्रति संवेदनहीन रवैये को दिखाते हैं। जबकि कुल मज़दूरों में से 18 प्रतिशत आदिवासी और 17 प्रतिशत दलित हैं, और 50 प्रतिशत से ज़्यादा महिलाएँ हैं, फिर भी इनमें से किसी भी मंत्रालय का प्रतिनिधित्व इसमें नहीं है। जनजातीय मामलों के मंत्रालय, सामाजिक न्याय मंत्रालय और महिला मंत्रालय को इसमें शामिल नहीं किया गया है। हालाँकि राज्य 40 प्रतिशत खर्च उठा रहे हैं, फिर भी उनके साथ बहुत अन्यायपूर्ण व्यवहार किया गया है और राज्यों के सिर्फ़ पाँच प्रतिनिधि ही रखे गए हैं। यह ऐसा ही है, जैसे कि राज्य सरकारों से केंद्र सरकार कह रही हो : खर्च उठाना आपकी ज़िम्मेदारी है, लेकिन फ़ैसले लेना हमारा अधिकार है।

जो केंद्रीय परिषद गठित की गई है, उसमें “गैर-सरकारी” सदस्य और आदिवासियों, दलितों व महिलाओं आदि के प्रतिनिधि शामिल किए गए हैं। बहरहाल, इस परिषद के पास कोई अधिकार नहीं है। यह सिफारिशें कर सकती है, जिन्हें संसद के सामने रखा जाएगा, लेकिन इन सिफारिशों को मानने की कोई बाध्यता नहीं हैं।

यह विडंबना ही है कि पारदर्शिता सुनिश्चित करने और भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के मकसद से बनाए गए नियमों में सोशल ऑडिट के लिए कोई अलग निकाय या कोई स्वतंत्र प्राधिकरण नहीं है। सोशल ऑडिट या “निगरानी” का काम सरकार द्वारा नियुक्त नौकरशाहों पर नहीं छोड़ा जा सकता। इसके लिए पूरी अधिकारिता वाला एक स्वतंत्र निकाय होना चाहिए। लेकिन अब तक जारी किए गए नियमों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।

इस पूरी प्रक्रिया का स्वरूप ऊपर से थोपा हुआ और नौकरशाहीपूर्ण है, क्योंकि इन नियमों में पंचायतों के अधिकारों और फ़ैसले लेने की प्रक्रिया में उनकी आवाज़ को बिल्कुल भी मान्यता नहीं दी गई है।

इन्हीं सब वजहों से, इन नियमों को वापस लिया जाना चाहिए। मनरेगा को लागू रहना चाहिए। जैसी कि योजना है, 1 जुलाई को इसे खत्म करना हमारे देश के ग्रामीण मेहनतकश लोगों के लिए बहुत बड़ा और क्रूर झटका होगा।

भवदीया,

बृंदा करात

[ अनुवाद- संजय पराते ]

🟥🟥🟥

विज्ञापन (Advertisement)

ब्रेकिंग न्यूज़

छत्तीसगढ़ के स्टील का प्रदेश में ही हो अधिकतम मूल्य संवर्धन, डाउनस्ट्रीम और स्पेशियलिटी उत्पादों के निर्माण पर दें जोर – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ के स्टील का प्रदेश में ही हो अधिकतम मूल्य संवर्धन, डाउनस्ट्रीम और स्पेशियलिटी उत्पादों के निर्माण पर दें जोर – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

स्वतंत्रता दिवस पर युवाओं पर केंद्रित हो सकता है CM साय का भाषण, भर्ती से AI मिशन तक बड़े फैसलों का जिक्र संभव
breaking Chhattisgarh

स्वतंत्रता दिवस पर युवाओं पर केंद्रित हो सकता है CM साय का भाषण, भर्ती से AI मिशन तक बड़े फैसलों का जिक्र संभव

किसानों की समृद्धि से ही समृद्ध होगा छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय
breaking Chhattisgarh

किसानों की समृद्धि से ही समृद्ध होगा छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

CBI-ED जांच के आदेश पर राहुल गांधी का बड़ा कदम, अब सुप्रीम कोर्ट में 17 अगस्त को होगी सुनवाई
breaking Chhattisgarh

CBI-ED जांच के आदेश पर राहुल गांधी का बड़ा कदम, अब सुप्रीम कोर्ट में 17 अगस्त को होगी सुनवाई

Chhattisgarh Police के 12 अधिकारियों-कर्मचारियों को मिलेगा राष्ट्रपति पदक, देखें पूरी लिस्ट
breaking Chhattisgarh

Chhattisgarh Police के 12 अधिकारियों-कर्मचारियों को मिलेगा राष्ट्रपति पदक, देखें पूरी लिस्ट

टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन का इस्तीफा, AGM से पहले उठाया बड़ा कदम
breaking National

टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन का इस्तीफा, AGM से पहले उठाया बड़ा कदम

छत्तीसगढ़ में फिर सक्रिय होगा मानसून, अगले 4 दिन बारिश के आसार; जानिए रायपुर समेत किन इलाकों में बरसेंगे बादल
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में फिर सक्रिय होगा मानसून, अगले 4 दिन बारिश के आसार; जानिए रायपुर समेत किन इलाकों में बरसेंगे बादल

‘रील के जमाने में शॉर्टकट न अपनाएं…’, पीएम मोदी का Gen-Z को संदेश, पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा का विमोचन किया
breaking National

‘रील के जमाने में शॉर्टकट न अपनाएं…’, पीएम मोदी का Gen-Z को संदेश, पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा का विमोचन किया

3200 करोड़ के शराब घोटाले में EOW के बाद अब ED का बड़ा एक्शन, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रामगोपाल अग्रवाल गिरफ्तार
breaking Chhattisgarh

3200 करोड़ के शराब घोटाले में EOW के बाद अब ED का बड़ा एक्शन, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रामगोपाल अग्रवाल गिरफ्तार

वरिष्ठता के आधार पर उच्च पद का प्रभार पाने का दावा अधिकार नहीं: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का स्पष्ट फैसला
breaking Chhattisgarh

वरिष्ठता के आधार पर उच्च पद का प्रभार पाने का दावा अधिकार नहीं: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का स्पष्ट फैसला

कल स्कूल-कॉलेज के अलावा सरकारी दफ्तर भी रहेंगे बंद, 12 अगस्त को सार्वजनिक अवकाश
breaking Chhattisgarh

कल स्कूल-कॉलेज के अलावा सरकारी दफ्तर भी रहेंगे बंद, 12 अगस्त को सार्वजनिक अवकाश

छत्तीसगढ़ में 13 महीने में दो बार बढ़ी बिजली की दरें, 201 से 400 यूनिट वालों पर 50 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में 13 महीने में दो बार बढ़ी बिजली की दरें, 201 से 400 यूनिट वालों पर 50 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी

छत्तीसगढ़ में महतारी वंदन योजना का बढ़ेगा दायरा, अब 40+ अविवाहित महिलाओं को भी मिलेगा लाभ
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में महतारी वंदन योजना का बढ़ेगा दायरा, अब 40+ अविवाहित महिलाओं को भी मिलेगा लाभ

छत्तीसगढ़ में जड़ी, बूटी, औषधीय पौधे उगाओ, एडवांस में लाखों पाओ, राज्य सरकार ने जारी की प्रोत्साहन राशि
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में जड़ी, बूटी, औषधीय पौधे उगाओ, एडवांस में लाखों पाओ, राज्य सरकार ने जारी की प्रोत्साहन राशि

तिरंगा यात्रा पर भूपेश बघेल ने कहा – जो कहती है उसके विपरीत चलती है भाजपा, राम नाम जपना, पराया माल अपना
breaking Chhattisgarh

तिरंगा यात्रा पर भूपेश बघेल ने कहा – जो कहती है उसके विपरीत चलती है भाजपा, राम नाम जपना, पराया माल अपना

राजधानी में निकली तिरंगा यात्रा, CM साय ने भरी हुंकार, कहा- आसानी से नहीं मिली आजादी, वीरों ने दिया बलिदान…
breaking Chhattisgarh

राजधानी में निकली तिरंगा यात्रा, CM साय ने भरी हुंकार, कहा- आसानी से नहीं मिली आजादी, वीरों ने दिया बलिदान…

महतारी वंदन योजना से जुड़ा बड़ा अपडेट: 40 वर्ष से अधिक उम्र की अविवाहित महिलाओं को भी मिलेगा लाभ
breaking Chhattisgarh

महतारी वंदन योजना से जुड़ा बड़ा अपडेट: 40 वर्ष से अधिक उम्र की अविवाहित महिलाओं को भी मिलेगा लाभ

स्पा सेंटर की आड़ में देह व्यापार का भंडाफोड़, मैनेजर, महिला दलाल और ग्राहकों समेत कुल 9 गिरफ्तार
breaking Chhattisgarh

स्पा सेंटर की आड़ में देह व्यापार का भंडाफोड़, मैनेजर, महिला दलाल और ग्राहकों समेत कुल 9 गिरफ्तार

छत्तीसगढ़ में शिक्षकों के तबादले का इंतजार खत्म, 700 शिक्षको के हुए ट्रांसफर; 400 नाम हटाए गए
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में शिक्षकों के तबादले का इंतजार खत्म, 700 शिक्षको के हुए ट्रांसफर; 400 नाम हटाए गए

छत्तीसगढ़ वन विभाग में बड़ा फेरबदल, 24 IFS अधिकारियों को मिली नई पदस्थापना, देखें पूरी लिस्ट
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ वन विभाग में बड़ा फेरबदल, 24 IFS अधिकारियों को मिली नई पदस्थापना, देखें पूरी लिस्ट

कविता

आरंभ साहित्यिक मंच : उभरते हुए प्रगतिशील परंपरा एवं सोच के कवि डॉ. गिरधर चंद्रा ‘साज़’
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच : उभरते हुए प्रगतिशील परंपरा एवं सोच के कवि डॉ. गिरधर चंद्रा ‘साज़’

इस माह की कवयित्री –  सेवानिवृत्त प्राचार्या शासकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय जुनवानी भिलाई जिला- दुर्ग छत्तीसगढ़ की श्रीमती वर्षा ठाकुर
poetry

इस माह की कवयित्री – सेवानिवृत्त प्राचार्या शासकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय जुनवानी भिलाई जिला- दुर्ग छत्तीसगढ़ की श्रीमती वर्षा ठाकुर

आरंभ साहित्यिक मंच : बांग्ला-हिंदी के सुविख्यात प्रगतिशील परंपरा के छोटी-छोटी कविताओं के रचनाशील कवि पल्लव चटर्जी
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच : बांग्ला-हिंदी के सुविख्यात प्रगतिशील परंपरा के छोटी-छोटी कविताओं के रचनाशील कवि पल्लव चटर्जी

पावस रचना : दीप्ति श्रीवास्तव
poetry

पावस रचना : दीप्ति श्रीवास्तव

आरंभ साहित्यिक मंच – अर्पिता चौधुरी
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच – अर्पिता चौधुरी

इस माह के ग़ज़लकार : सुशील यादव
poetry

इस माह के ग़ज़लकार : सुशील यादव

आरंभ साहित्यिक मंच : शुचि ‘भवि’
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच : शुचि ‘भवि’

आज पढ़ें ‘आरंभ’ साहित्यिक मंच में बांग्ला और हिंदी के सुस्थापित कवि पल्लव चटर्जी
poetry

आज पढ़ें ‘आरंभ’ साहित्यिक मंच में बांग्ला और हिंदी के सुस्थापित कवि पल्लव चटर्जी

इस माह की कवयित्री : शुचि ‘भवि’
poetry

इस माह की कवयित्री : शुचि ‘भवि’

आरंभ साहित्यिक मंच : संध्या जैन
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच : संध्या जैन

कवि और कविता : इस माह के कवि में नीलमचंद सांखला
poetry

कवि और कविता : इस माह के कवि में नीलमचंद सांखला

‘आरंभ’ साहित्यिक मंच : दीप्ति श्रीवास्तव
poetry

‘आरंभ’ साहित्यिक मंच : दीप्ति श्रीवास्तव

‘आरंभ’ साहित्यिक मंच : सुरभि ताम्रकार ‘शावि’
poetry

‘आरंभ’ साहित्यिक मंच : सुरभि ताम्रकार ‘शावि’

आरंभ साहित्यिक मंच : सोनिया नायडू
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच : सोनिया नायडू

‘आरंभ साहित्यिक मंच’ : हरि प्रकाश गुप्ता ‘सरल’
poetry

‘आरंभ साहित्यिक मंच’ : हरि प्रकाश गुप्ता ‘सरल’

‘आरंभ’ साहित्यिक मंच : दीप्ति श्रीवास्तव
poetry

‘आरंभ’ साहित्यिक मंच : दीप्ति श्रीवास्तव

कवि और कविता : पल्लव चटर्जी
poetry

कवि और कविता : पल्लव चटर्जी

साहित्यिक पटल : सुरभि ताम्रकर ‘शावि’
poetry

साहित्यिक पटल : सुरभि ताम्रकर ‘शावि’

साहित्यिक ‘आरंभ’ : सुरभि ताम्रकार ‘शावि’
poetry

साहित्यिक ‘आरंभ’ : सुरभि ताम्रकार ‘शावि’

विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष दोहावली : ठाकुर दशरथ सिंह भुवाल सोनपांडर
poetry

विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष दोहावली : ठाकुर दशरथ सिंह भुवाल सोनपांडर

कहानी

लेख : कैलाश जैन बरमेचा
story

लेख : कैलाश जैन बरमेचा

कहानी : दीप्ति श्रीवास्तव
story

कहानी : दीप्ति श्रीवास्तव

लघु कथा : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय
story

लघु कथा : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय

लघुकथा : सरस सलिला – दीप्ति श्रीवास्तव
story

लघुकथा : सरस सलिला – दीप्ति श्रीवास्तव

आलेख : ‘बहकता बचपन’ – साजिद अली ‘सतरंगी’
story

आलेख : ‘बहकता बचपन’ – साजिद अली ‘सतरंगी’

स्वर्ग का न्याय : महेश की आत्मकथा – लेखक शायर नावेद रज़ा दुर्गवी
story

स्वर्ग का न्याय : महेश की आत्मकथा – लेखक शायर नावेद रज़ा दुर्गवी

कहानी : ‘पीहू’ – डॉ. दीक्षा चौबे
story

कहानी : ‘पीहू’ – डॉ. दीक्षा चौबे

संदेशप्रद लघु कथा : ‘पुकार’ – कैलाश बरमेचा जैन
story

संदेशप्रद लघु कथा : ‘पुकार’ – कैलाश बरमेचा जैन

लेखिका विद्या गुप्ता की कृति ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ की समीक्षा लेखक कवि विजय वर्तमान के शब्दों में – ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ यह विद्या गुप्ता की सच्ची, निर्भीक और सर्व स्वीकार्य घोषणा है
story

लेखिका विद्या गुप्ता की कृति ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ की समीक्षा लेखक कवि विजय वर्तमान के शब्दों में – ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ यह विद्या गुप्ता की सच्ची, निर्भीक और सर्व स्वीकार्य घोषणा है

मास्टर स्ट्रोक [व्यंग्य] : राजशेखर चौबे
story

मास्टर स्ट्रोक [व्यंग्य] : राजशेखर चौबे

लघु कथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती
story

लघु कथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती

सत्य घटना पर आधारित कहानी : ‘सब्जी वाली मंजू’ :  ब्रजेश मल्लिक
story

सत्य घटना पर आधारित कहानी : ‘सब्जी वाली मंजू’ : ब्रजेश मल्लिक

लघुकथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती
story

लघुकथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती

कहिनी : मया के बंधना – डॉ. दीक्षा चौबे
story

कहिनी : मया के बंधना – डॉ. दीक्षा चौबे

🤣 होली विशेष :प्रो.अश्विनी केशरवानी
story

🤣 होली विशेष :प्रो.अश्विनी केशरवानी

चर्चित उपन्यासत्रयी उर्मिला शुक्ल ने रचा इतिहास…
story

चर्चित उपन्यासत्रयी उर्मिला शुक्ल ने रचा इतिहास…

story

रचना आसपास : उर्मिला शुक्ल

story

रचना आसपास : दीप्ति श्रीवास्तव

story

कहानी : संतोष झांझी

story

कहानी : ‘ पानी के लिए ‘ – उर्मिला शुक्ल

लेख

‘साहित्य सृजन परिषद्’ के तत्वावधान में पावस ऋतु पर सरस काव्य गोष्ठी 26 जुलाई को इंदिरा गाँधी उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय सुपेला-भिलाई में अपराह्न 2.30 बजे से
Article

‘साहित्य सृजन परिषद्’ के तत्वावधान में पावस ऋतु पर सरस काव्य गोष्ठी 26 जुलाई को इंदिरा गाँधी उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय सुपेला-भिलाई में अपराह्न 2.30 बजे से

रवींद्र-नज़रूल उत्सव-2026 : ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में रवींद्र-नज़रूल उत्सव 25 जुलाई को ‘ऑफिसर्स एसोसिएशन प्रगति भवन’ में प्रात:11.00 बजे से रात 8.00 बजे तक
Article

रवींद्र-नज़रूल उत्सव-2026 : ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में रवींद्र-नज़रूल उत्सव 25 जुलाई को ‘ऑफिसर्स एसोसिएशन प्रगति भवन’ में प्रात:11.00 बजे से रात 8.00 बजे तक

काव्य संध्या : प्रगतिशील कवि डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय के निवास में दिव्या सक्सेना, विजया भारती, गजेंद्र द्विवेदी ‘गिरीश’, पारुल पांडेय, संजय मैथिल, युसूफ सागर, हाजी रियाज़ खान गौहर, मनमोहन मतवाला, ओम पांडेय, डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’, छ्गनलाल सोनी, संतराम वर्मा और डॉ. आरबी कुशवाहा शामिल हुए
Article

काव्य संध्या : प्रगतिशील कवि डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय के निवास में दिव्या सक्सेना, विजया भारती, गजेंद्र द्विवेदी ‘गिरीश’, पारुल पांडेय, संजय मैथिल, युसूफ सागर, हाजी रियाज़ खान गौहर, मनमोहन मतवाला, ओम पांडेय, डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’, छ्गनलाल सोनी, संतराम वर्मा और डॉ. आरबी कुशवाहा शामिल हुए

विशेष : भाईदूज, भाई-बहन के परस्पर प्रेम और दायित्व का त्योहार : भाईदूज और रक्षा बंधन की सनातनी मान्यताएं – श्रीमती संजीव ठाकुर
Article

विशेष : भाईदूज, भाई-बहन के परस्पर प्रेम और दायित्व का त्योहार : भाईदूज और रक्षा बंधन की सनातनी मान्यताएं – श्रीमती संजीव ठाकुर

Article

तीन लघुकथा : रश्मि अमितेष पुरोहित

व्यंग्य : देश की बदनामी चालू आहे ❗ – राजेंद्र शर्मा
Article

व्यंग्य : देश की बदनामी चालू आहे ❗ – राजेंद्र शर्मा

Article

लघुकथा : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय [केंद्रीय विद्यालय वेंकटगिरि, आंध्रप्रदेश]

जोशीमठ की त्रासदी : राजेंद्र शर्मा
Article

जोशीमठ की त्रासदी : राजेंद्र शर्मा

18 दिसंबर को जयंती के अवसर पर गुरू घासीदास और सतनाम परम्परा
Article

18 दिसंबर को जयंती के अवसर पर गुरू घासीदास और सतनाम परम्परा

जयंती : सतनाम पंथ के संस्थापक संत शिरोमणि बाबा गुरु घासीदास जी
Article

जयंती : सतनाम पंथ के संस्थापक संत शिरोमणि बाबा गुरु घासीदास जी

व्यंग्य : नो हार, ओन्ली जीत ❗ – राजेंद्र शर्मा
Article

व्यंग्य : नो हार, ओन्ली जीत ❗ – राजेंद्र शर्मा

🟥 अब तेरा क्या होगा रे बुलडोजर ❗ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा.
Article

🟥 अब तेरा क्या होगा रे बुलडोजर ❗ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा.

🟥 प्ररंपरा या कुटेव  ❓ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा
Article

🟥 प्ररंपरा या कुटेव ❓ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा

▪️ न्यायपालिका के अपशकुनी के साथी : वैसे ही चलना दूभर था अंधियारे में…इनने और घुमाव ला दिया गलियारे में – आलेख बादल सरोज.
Article

▪️ न्यायपालिका के अपशकुनी के साथी : वैसे ही चलना दूभर था अंधियारे में…इनने और घुमाव ला दिया गलियारे में – आलेख बादल सरोज.

▪️ मशहूर शायर गीतकार साहिर लुधियानवी : ‘ जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है, जंग क्या मसअलों का हल देगी ‘ : वो सुबह कभी तो आएगी – गणेश कछवाहा.
Article

▪️ मशहूर शायर गीतकार साहिर लुधियानवी : ‘ जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है, जंग क्या मसअलों का हल देगी ‘ : वो सुबह कभी तो आएगी – गणेश कछवाहा.

▪️ व्यंग्य : दीवाली के कूंचे से यूँ लक्ष्मी जी निकलीं ❗ – राजेंद्र शर्मा
Article

▪️ व्यंग्य : दीवाली के कूंचे से यूँ लक्ष्मी जी निकलीं ❗ – राजेंद्र शर्मा

25 सितंबर पितृ मोक्ष अमावस्या के उपलक्ष्य में… पितृ श्राद्ध – श्राद्ध का प्रतीक
Article

25 सितंबर पितृ मोक्ष अमावस्या के उपलक्ष्य में… पितृ श्राद्ध – श्राद्ध का प्रतीक

Article

🟢 आजादी के अमृत महोत्सव पर विशेष : डॉ. अशोक आकाश.

Article

🟣 अमृत महोत्सव पर विशेष : डॉ. बलदाऊ राम साहू [दुर्ग]

Article

🟣 समसामयिक चिंतन : डॉ. अरविंद प्रेमचंद जैन [भोपाल].

राजनीति न्यूज़

breaking Politics

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उदयपुर हत्याकांड को लेकर दिया बड़ा बयान

Politics

■छत्तीसगढ़ :

Politics

भारतीय जनता पार्टी,भिलाई-दुर्ग के वरिष्ठ कार्यकर्ता संजय जे.दानी,लल्लन मिश्रा, सुरेखा खटी,अमरजीत सिंह ‘चहल’,विजय शुक्ला, कुमुद द्विवेदी महेंद्र यादव,सूरज शर्मा,प्रभा साहू,संजय खर्चे,किशोर बहाड़े, प्रदीप बोबडे,पुरषोत्तम चौकसे,राहुल भोसले,रितेश सिंह,रश्मि अगतकर, सोनाली,भारती उइके,प्रीति अग्रवाल,सीमा कन्नौजे,तृप्ति कन्नौजे,महेश सिंह, राकेश शुक्ला, अशोक स्वाईन ओर नागेश्वर राव ‘बाबू’ ने सयुंक्त बयान में भिलाई के विधायक देवेन्द्र यादव से जवाब-तलब किया.

breaking Politics

भिलाई कांड, न्यायाधीश अवकाश पर, जाने कब होगी सुनवाई

धमतरी आसपास
Politics

धमतरी आसपास

Politics

स्मृति शेष- बाबू जी, मोतीलाल वोरा

Politics

छत्तीसगढ़ कांग्रेस में हलचल

breaking Politics

राज्यसभा सांसद सुश्री सरोज पाण्डेय ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से कहा- मर्यादित भाषा में रखें अपनी बात

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल  ने डाॅ. नरेन्द्र देव वर्मा पर केन्द्रित ‘ग्रामोदय’ पत्रिका और ‘बहुमत’ पत्रिका के 101वें अंक का किया विमोचन
Politics

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने डाॅ. नरेन्द्र देव वर्मा पर केन्द्रित ‘ग्रामोदय’ पत्रिका और ‘बहुमत’ पत्रिका के 101वें अंक का किया विमोचन

मरवाही उपचुनाव
Politics

मरवाही उपचुनाव

Politics

प्रमोद सिंह राजपूत कुम्हारी ब्लॉक के अध्यक्ष बने

Politics

ओवैसी की पार्टी ने बदला सीमांचल का समीकरण! 11 सीटों पर NDA आगे

breaking Politics

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, ग्वालियर में प्रेस वार्ता

breaking Politics

अमित और ऋचा जोगी का नामांकन खारिज होने पर बोले मंतूराम पवार- ‘जैसी करनी वैसी भरनी’

breaking Politics

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री, भूपेश बघेल बिहार चुनाव के स्टार प्रचारक बिहार में कांग्रेस 70 सीटों में चुनाव लड़ रही है

सियासत- हाथरस सामूहिक दुष्कर्म
breaking National Politics

सियासत- हाथरस सामूहिक दुष्कर्म

breaking Politics

हाथरस गैंगरेप के घटना पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने क्या कहा, पढ़िए पूरी खबर

breaking Politics

पत्रकारों के साथ मारपीट की घटना के बाद, पीसीसी चीफ ने जांच समिति का किया गठन