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‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में ‘रवींद्र-नज़रूल उत्सव- 2026’ : साहित्य, संगीत एवं संस्कृति-सांस्कृतिक का अनुपम महोत्सव

👉 [बाएँ से] • सपन गड़ाई, दुलाल समाद्दार, रवींद्रनाथ देबनाथ, डॉ. चित्तरंजन कर, समरेंद्र विश्वास और श्रीमती बानी चक्रवर्ती
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‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में ‘रवींद्र-नज़रूल उत्सव’- 2026 : साहित्य, संगीत एवं संस्कृति-सांस्कृतिक का अनुपम महोत्सव
इस्पात नगरी भिलाई [छत्तीसगढ़] में विगत 68 वर्षों से बांग्ला भाषा, कला, साहित्य, संस्कृति-सांस्कृतिक उन्नयन को लेकर समर्पित ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में 25 जुलाई, 2026 को प्रात: 11.00 बजे से रात्रि 10.00 बजे तक ऑफ़िसर्स एसोसिएशन के द्वारा संचालित ‘प्रगति भवन’ में ‘रवींद्र-नज़रूल उत्सव’ का भव्य आयोजन सम्पन्न हुआ. लगभग 10 घंटे तक चले इस सांस्कृतिक महोत्सव में साहित्य, संगीत, नृत्य और नाट्यकला का ऐसा अद्भुत संगम देखने को मिला, जिसने पूरे वातावरण को कला एवं संवेदनाओं की अनुपम आभा से आलोकित कर दिया.
‘रवींद्र-नज़रूल उत्सव-2026’- महोत्सव दो सत्रों में सम्पन्न हुआ. प्रथम सत्र में कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा पं. सुंदरलाल शर्मा साहित्यिक पुरस्कार से अलंकृत डॉ. चित्तरंजन कर थे. कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ चितरंजन कर, संरक्षक मानव सेन ‘बंगीय साहित्य संस्था’ की सभापति श्रीमती बानी चक्रवर्ती, बांग्ला भाषा में प्रकाशित साहित्यिक पत्रिका ‘मध्यबलय’ के संपादक दुलाल समाद्दार, मुख्य सलाहकार समरेंद्र विश्वास, कार्यक्रम के सभापति रविंद्रनाथ देबनाथ, वरिष्ठ सदस्य सपन गड़ाई ने रवींद्रनाथ टैगोर एवं काज़ी नज़रूल इस्लाम के तैल चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलित किया. तत्पश्चात् शुभेंदु बागची रचित, जिसे स्वरबद्ध किया दीपेंद्र हालदार ने, संस्था के सदस्यों ने वासंती रंग के ड्रेस कोड में इस थीम सांग- ‘पंख फैलाएं आसमान में, खुशबू मिला बहती हवा से…कंठ में विराजे तुम्हारी वाणी, तुम ही तुम हो सुर में मेरे…’ गीत को सामूहिक नृत्य के साथ प्रस्तुति दी.
डॉ. चित्तरंजन कर ने कवि रवींद्र-नज़रूल की कालजयी साहित्यिक विरासत, उनके जीवन-दर्शन तथा भारतीय समाज और विश्व संस्कृति पर अत्यंत विद्वत्तापूर्ण एवं प्रेरणादायी उद्बोधन दिया.
कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र के कार्यपालक निदेशक [प्रोजेक्ट] प्रबीर कुमार सरकार, बीएसपी ऑफ़िसर्स एसोसिएशन एवं ‘सेफ़ी’ के चेयरमैन नरेंद्र कुमार बंछोर एवं ऑफ़िसर्स एसोसिएशन के पूर्व महासचिव, बीएसपी एथेलेटिक्स क्लब के कार्यकारी अध्यक्ष एवं बीएसपी स्विमिंग क्लब, साइकिलिंग क्लब के अध्यक्ष परविंदर सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित हुए. प्रबीर कुमार सरकार ने आयोजन को वैचारिक ऊँचाई प्रदान करने के लिए ‘बंगीय साहित्य संस्था’ को बधाई दी और कहा कि ‘रवींद्र-नज़रूल उत्सव’ के माध्यम से दोनों महाकवियों के मानवीय मूल्यों और सृजनात्मक चेतना की गहराई से रुबरु हो सके. नरेंद्र कुमार बंछोर ने विश्वकवि गुरुदेव टैगोर के जीवन-दर्शन, मानवीय चिंतन, शिक्षा, संस्कृति और विश्वबंधुत्व की उनकी अवधारणा पर सारगर्भित विचार प्रस्तुत करते हुए अपनी बात रखी.
इस्पात नगरी भिलाई [छत्तीसगढ़] में विगत 68 वर्षों से बांग्ला भाषा, कला, साहित्य, संस्कृति-सांस्कृतिक उन्नयन को लेकर समर्पित ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में 25 जुलाई, 2026 को प्रात: 11.00 बजे से रात्रि 10.00 बजे तक ऑफ़िसर्स एसोसिएशन के द्वारा संचालित ‘प्रगति भवन’ में ‘रवींद्र-नज़रूल उत्सव’ का भव्य आयोजन सम्पन्न हुआ. लगभग 10 घंटे तक चले इस सांस्कृतिक महोत्सव में साहित्य, संगीत, नृत्य और नाट्यकला का ऐसा अद्भुत संगम देखने को मिला, जिसने पूरे वातावरण को कला एवं संवेदनाओं की अनुपम आभा से आलोकित कर दिया.
‘रवींद्र-नज़रूल उत्सव-2026’- महोत्सव दो सत्रों में सम्पन्न हुआ. प्रथम सत्र में कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा पं. सुंदरलाल शर्मा साहित्यिक पुरस्कार से अलंकृत डॉ. चित्तरंजन कर थे. कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ चितरंजन कर, संरक्षक मानव सेन ‘बंगीय साहित्य संस्था’ की सभापति श्रीमती बानी चक्रवर्ती, बांग्ला भाषा में प्रकाशित साहित्यिक पत्रिका ‘मध्यबलय’ के संपादक दुलाल समाद्दार, मुख्य सलाहकार समरेंद्र विश्वास, कार्यक्रम के सभापति रविंद्रनाथ देबनाथ, वरिष्ठ सदस्य सपन गड़ाई ने रवींद्रनाथ टैगोर एवं काज़ी नज़रूल इस्लाम के तैल चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलित किया. तत्पश्चात् शुभेंदु बागची रचित, जिसे स्वरबद्ध किया दीपेंद्र हालदार ने, संस्था के सदस्यों ने वासंती रंग के ड्रेस कोड में इस थीम सांग- ‘पंख फैलाएं आसमान में, खुशबू मिला बहती हवा से…कंठ में विराजे तुम्हारी वाणी, तुम ही तुम हो सुर में मेरे…’ गीत को सामूहिक नृत्य के साथ प्रस्तुति दी.
डॉ. चित्तरंजन कर ने कवि रवींद्र-नज़रूल की कालजयी साहित्यिक विरासत, उनके जीवन-दर्शन तथा भारतीय समाज और विश्व संस्कृति पर अत्यंत विद्वत्तापूर्ण एवं प्रेरणादायी उद्बोधन दिया.
कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र के कार्यपालक निदेशक [प्रोजेक्ट] प्रबीर कुमार सरकार, बीएसपी ऑफ़िसर्स एसोसिएशन एवं ‘सेफ़ी’ के चेयरमैन नरेंद्र कुमार बंछोर एवं ऑफ़िसर्स एसोसिएशन के पूर्व महासचिव, बीएसपी एथेलेटिक्स क्लब के कार्यकारी अध्यक्ष एवं बीएसपी स्विमिंग क्लब, साइकिलिंग क्लब के अध्यक्ष परविंदर सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित हुए. प्रबीर कुमार सरकार ने आयोजन को वैचारिक ऊँचाई प्रदान करने के लिए ‘बंगीय साहित्य संस्था’ को बधाई दी और कहा कि ‘रवींद्र-नज़रूल उत्सव’ के माध्यम से दोनों महाकवियों के मानवीय मूल्यों और सृजनात्मक चेतना की गहराई से रुबरु हो सके. नरेंद्र कुमार बंछोर ने विश्वकवि गुरुदेव टैगोर के जीवन-दर्शन, मानवीय चिंतन, शिक्षा, संस्कृति और विश्वबंधुत्व की उनकी अवधारणा पर सारगर्भित विचार प्रस्तुत करते हुए अपनी बात रखी.


👉 • दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए डॉ. चित्तरंजन कर एवं अन्य अतिथि
कुशल संचालन करते हुए ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के महासचिव शुभेंदु बागची ने प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए कहा कि-
कार्यक्रम के सफलता की कुंजी संस्था के समस्त सदस्यों के अथक परिश्रम से ही संभव हो पाता है. उन्होंने कहा अध्यक्षा- बानी चक्रवर्ती की प्रेरणा, उनकी मातृ सुलभ व्यवहार से हम यह कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न करा पाए. कोई भी आयोजन तभी सफल हो पाता है, जब सभी सदस्यों का सहयोग मिलता है. बानी चक्रवर्ती ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि- बंग संतान जहाँ भी जाते हैं, वहां साहित्य चर्चा में मशगूल रहते हैं एवं एक कालीबाड़ी का निर्माण अवश्य करते हैं इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए बांग्ला साहित्य की धरोहर को बचाए रखने के लिए इस्पात नगरी में ‘बंगीय साहित्य संस्था, भिलाई’ की स्थापना की. बांग्ला के सुविख्यात कवि समरेंद्र विश्वास ने ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के इतिहास बताते हुए कहा कि- 1958 में कुछ साहित्यिक मित्रों स्व. शिबब्रत देवानजी, स्व. क्षितिज देबसिकदार, विनायक मजूमदार, स्व. शीतल कुमार भादुड़ी, कमलेश जैन और रविंद्र गुहा ने मिलकर इसकी स्थापना की. आज, संस्था 58 साल बाद भी जीवित है, इसकी मुख्य वजह है ‘साहित्य की जगह भले कोने में हो, अंधेरे और गर्द गुबार में हो, वह ऐसी जगह है जहाँ से मनुष्य अपनी समग्रता को देख और पहचान, महसूस और प्रश्ननांकित कर सकता है, साहित्य की जगह बची रहेगी क्योंकि समग्रता की चाह मनुष्य में कभी खत्म नहीं होगी’. संस्था द्वारा बांग्ला भाषा में 1983 से निरंतर प्रकाशित की जा रही पत्रिका ‘मध्यबलय’ के संपादक दुलाल समाद्दार ने ‘मध्यबलय’ प्रकाशन के उद्देश्य पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि- ‘मध्यबलय’ पत्रिका साहित्य के माध्यम से एक तरह की विश्वयारी, साहित्य की एक विश्वबिरादरी बनाने और सक्रिय करने में सफल हुई है.

👉 • थीम सोंग के साथ ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के सदस्यों का सामूहिक नृत्य

👉 • कुशल संचालन करते हुए ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के महासचिव शुभेंदु बागची
कार्यक्रम के प्रथम सत्र- ‘सिंधुभैरवी’ में विश्वकवि रवींद्रनाथ टैगोर रचित हास्य नाटक ‘एकन्नोबोरटी’ अपनी सशक्त कथा, कलाकारों के प्रभावशाली अभिनय और भावपूर्ण प्रस्तुति ने दर्शकों का दिल जीत लिया. निर्देशक प्रकाशचंद्र मण्डल के कुशल डायरेक्शन एवं संयोजन में संदीप मल्लिक, ब्रजेश्वर मल्लिक, प्रभात मण्डल, सुबीर रॉय, स्मृति दत्त, ममता सरकार, सुजॉशा सेन, सोमाली शर्मा का अभिनय प्रभावशाली रहा. बैकग्राउंड म्यूजिक गौतम शील, श्री कर, बैक स्क्रीन आर्ट मिहिर समाद्दार एवं सामग्रीक दिशानिर्देश शुभेंदु बागची का था. नृत्यकला में पारंगत दीपाली दासगुप्ता, अनीता सरकार, श्रेया समाद्दार की मनमोहक प्रस्तुति एवं अमृता सान्याल के निर्देशन में बच्चों का प्रस्तुतिकरण बेहतरीन रहा. तकरीबन ग्यारह साल बाद ‘मध्यबलय’ बुलेटिन का प्रकाशन पुन: शुरू किया गया. मुखपृष्ठ डिज़ाइन मिहिर समाद्दार ने किया एवं इस अंक का संपादन किया- स्मृति दत्त ने.
‘बंगीय साहित्य संस्था’ द्वारा प्रगतिशील जन-विचारधारा की साहित्यिक संस्था ‘आरंभ’ को ‘उत्कृष्ट पहल सम्मान’ [Excellence of Initiation Award for Hindi & Urdu Literature] से सम्मानित किया गया. यह सम्मान ‘आरंभ’ के अध्यक्ष प्रदीप भट्टाचार्य और इनकी टीम ने अतिथियों के हाथों ग्रहण किया. ‘गीत वितान कला केंद्र’ को ‘टैगोर लिगेसी अवार्ड’ से सम्मानित किया गया. यह सम्मान कला केंद्र के कलाकारों के साथ नृत्यमणी मिथुन दास ने ग्रहण किया. सामाजिक कार्यकर्ता बिमान भट्टाचार्य को ‘एप्रेसियेशन फॉर सोशल’ अवार्ड से सम्मानित किया गया.

👉 ‘आरंभ’ को मिला ‘उत्कृष्ट पहल सम्मान’ [बाएँ से] • शेफाली भट्टाचार्य, पल्लव चटर्जी, डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’, आलोक कुमार चंदा, प्रदीप भट्टाचार्य, प्रबीर कुमार सरकार, नरेंद्र कुमार बंछोर, शुभेंदु बागची, जॉली चक्रवर्ती और बानी चक्रवर्ती

👉 • ‘गीत वितान कला केंद्र’ को मिला ‘टैगोर लिगेसी अवार्ड’

👉 • बिमान भट्टाचार्य को ‘एप्रेसियेशन फॉर सोशल’ अवार्ड से सम्मानित किया गया. बिमान दादा का यह सम्मान समरेंद्र विश्वास ने प्राप्त किया
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में- शाम 4.00 बजे से 9.00 बजे तक उपस्थित बंगीय साहित्यविदों ने कविगुरु रवींद्रनाथ टैगोर तथा विद्रोही कवि काज़ी नज़रूल इस्लाम के व्यक्तित्व एवं कृतित्व से जुड़े अनेक रोचक, प्रेरक एवं कुछ भूले बिसरे प्रसंग साझा किए. रवींद्र-नज़रूल गीतों की प्रस्तुति व काव्य पाठ हुआ. गायन में मनोरंजन दास, दीपेंद्र हालदार, डॉ. चित्तरंजन कर, माया बैनर्जी, तुहिनाद्री सान्याल, पापिया गड़ाई, शंभु साहा, इंद्राणी मुखर्जी, देवाशीष विश्वास, तानिया समाद्दार, सुजॉशा सेन, पामेला विश्वास, सोमेन कुंडू, आरएम घोष, भावना सेन, अर्पिता चक्रवर्ती और सोमेश्वर राव के बेहतरीन प्रस्तुति से समा बांधा. काव्य एवं आलेख पाठ किया- मीता दास, बानी चक्रवर्ती, दिपाली दासगुप्ता, स्मृति दत्त, ममता सरकार, जॉली चक्रवर्ती, दुलाल समाद्दार, वीरेंद्रनाथ सरकार, मिहिर समाद्दार, पल्लव चटर्जी, विपुल सेन, पं. बासुदेब भट्टाचार्य, शुभेंदु बागची और उदय भगत.
समापन के पूर्व शुभेंदु बागची ने कहा कि-
‘1958 में स्थापित ‘बंगीय साहित्य संस्था’ की नींव रखने वाले संस्थापक सदस्य स्व.शिबव्रत देवानजी ने जो बीजरोपण किया था, आज एक वटवृक्ष का रूप धारण कर चुका है’.
👉 • प्रकाशचंद्र मण्डल के निर्देशन में रवींद्रनाथ टैगोर रचित नाटक ‘एकन्नोबोरटी’ का मंचन

👉 [बाएँ से] • स्मृति दत्त, ममता सरकार, संदीप मल्लिक, प्रभात मण्डल, सोमाली शर्मा, ब्रजेश्वर मल्लिक, सुजॉशा सेन, प्रकाशचंद्र मण्डल और सुबीर रॉय
अंत में आभार व्यक्त करते हुए सुबीर रॉय ने कहा कि-
यह उत्सव केवल सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का मंच नहीं था, बल्कि रवींद्र-नज़रूल की मानवीय चेतना, साहित्यिक वैभव और संस्कृति विरासत को समर्पित एक जीवंत सांस्कृतिक पर्व बनकर उपस्थित कला प्रेमियों के हृदय में अमिट छाप छोड़ गया. कार्यक्रम में प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकार साथी की गरिमामयी उपस्थिति एवं उनकी सहभागिता ने इस महत्वपूर्ण सांस्कृतिक आयोजन को व्यापक जनसरोकार प्रदान किया. रतन सरकार, आलोक कुमार चंदा, विपुल सेन, पं. बासुदेब भट्टाचार्य, प्रभात मण्डल, कृष्णकांत रॉय, देबाशीष विश्वास, शंभू साहा, ममता सरकार, शेफाली भट्टाचार्य, सोमाली शर्मा, पापिया गड़ाई, जॉली चक्रवर्ती और सुजॉशा सेन ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. ब्रजेश्वर मल्लिक का युवा जोश, मीडिया एवं पब्लिसिटी इंचार्ज- प्रदीप भट्टाचार्य एवं ‘मध्यबलय’ बुलेटिन प्रिंटिंग प्रमुख- मिहिर समाद्दार का समर्पण को हमेशा याद किया जाएगा. ‘बंगीय साहित्य संस्था’ की उपाध्यक्षद्वय- दीपाली दासगुप्ता, स्मृति दत्त, उपसचिव- प्रकाशचंद्र मण्डल, कोषाध्यक्ष- पल्लव चटर्जी, वरिष्ठ सदस्य- मनोरंजन दास, मीता दास, सपन गड़ाई, वीरेंद्रनाथ सरकार और माया बैनर्जी का भी आभार प्रकट करते हैं कि पूरे समय आप सबकी उपस्थिति रही.

👉 • स्पेशल गेस्ट प्रबीर कुमार सरकार के साथ [दाएं से] बानी चक्रवर्ती [अध्यक्ष] दुलाल समाद्दार [संपादक- ‘मध्यबलय’] प्रबीर कुमार सरकार और प्रकाशचंद्र मण्डल [उपसचिव]

👉 [बाएँ से] • सुबीर रॉय, पल्लव चटर्जी, डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’, प्रदीप भट्टाचार्य, प्रकाशचंद्र मण्डल, शुभेंदु बागची, दीपेंद्र हालदार, सोमेश्वर राव और आलोक कुमार चंदा

👉 [बाएँ से] • शुभेंदु बागची {महासचिव} पल्लव चटर्जी {कोषाध्यक्ष} दुलाल समाद्दार {संपादक}

👉 [बाएँ से] • मीता दास, ममता बैनर्जी और बानी चक्रवर्ती

👉 [बाएँ से] • नरेंद्र कुमार बंछोर, प्रबीर कुमार सरकार, प्रदीप भट्टाचार्य, शुभेंदु बागची, अतिथि और मीता दास

👉 [बाएँ से] • प्रभात मण्डल, डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’, प्रदीप भट्टाचार्य, आलोक कुमार चंदा, पल्लव चटर्जी और सुबीर रॉय

👉 [बाएँ से] • आलोक कुमार चंदा, प्रदीप भट्टाचार्य और श्रीमती शेफाली भट्टाचार्य
कार्यक्रम में विश्वजीत सरकार, समीर रक्षित, डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’, शांतुनु दासगुप्ता, मुहम्मद जाकिर हुसैन, शक्ति चक्रवर्ती, बबलू विश्वास, राकेश गुप्ता ‘रुसिया’, मणिमय मुखर्जी, शायर मुमताज, सुशील यादव, श्रीमती माधुरी कर और श्रीमती साथी सेन की भी गरिमामयी उपस्थिति रही.
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रवींद्र-नज़रूल उत्सव- 2026 की कुछ प्रमुख सचित्र झलकियाँ-


☝️ • संगीत की मनमोहक प्रस्तुति देते हुए कलाकार


☝️ • नृत्य की कुछ प्रमुख प्रस्तुति


☝️ • काव्य पाठ की प्रस्तुति

👉 स्मृति दत्त के संपादन में प्रकाशित बुलेटिन ‘मध्यबलय’ के प्रथम अंक का विमोचन [बाएँ से] • मीता दास, ब्रजेश्वर मल्लिक, पल्लव चटर्जी, सपन गड़ाई, दुलाल समाद्दार, रविंद्रनाथ देबनाथ, स्मृति दत्त, डॉ. चित्तरंजन कर, समरेंद्र विश्वास और बानी चक्रवर्ती

👉 • उद्बोधन देते हुए ‘मध्यबलय’ के संपादक दुलाल समाद्दार

👉 • ‘रवींद्र-नज़रूल उत्सव’ के मीडिया-पब्लिकेशन प्रभारी एवं प्रगतिशील जन-विचारधारा की साहित्यिक संस्था ‘आरंभ’ के अध्यक्ष- प्रदीप भट्टाचार्य सम्मान प्राप्त करने के बाद ‘बंगीय साहित्य संस्था’ का आभार प्रकट करते हुए

👉 • कार्यक्रम संयोजक शुभेंदु बागची, ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के सक्रिय सदस्य रतन सरकार का परिचय अतिथियों से करवाते हुए…

👉 संस्था द्वारा पुस्तक प्रदर्शनी भी लगाया गया था [बाएँ से] • शायर मुमताज, डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’, पं. बासुदेब भट्टाचार्य, प्रकाशचंद्र मण्डल, सोमाली शर्मा, शुभेंदु बागची और विपुल सेन

👉 [बाएँ से] • श्रीमती शेफाली भट्टाचार्य और श्रीमती सोमाली शर्मा

👉 [बाएँ से] • प्रदीप भट्टाचार्य, शेफाली भट्टाचार्य और सोमाली शर्मा

👉 आयोजन के दो प्रमुख [बाएँ से] शुभेंदु बागची और दुलाल समाद्दार

👉 • ‘बंगीय साहित्य संस्था’ की उपाध्यक्षा स्मृति दत्त [बाएँ] और शेफाली भट्टाचार्य

👉 • ऑफ़िसर्स एसोसिएशन द्वारा संचालित ‘प्रगति भवन’ सभागार में उपस्थित कला-संस्कृतकर्मी



☝️ • ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के सदस्य


☝️ • विभिन्न लेखकों की बांग्ला पुस्तकों के साथ बंगीय सदस्य

👉 [बाएँ से] • सोमाली शर्मा, बानी चक्रवर्ती, दीपाली दासगुप्ता और सुजॉशा सेन

👉 • ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के महासचिव एवं ‘रवींद्र-नज़रूल उत्सव’ के संयोजक- शुभेंदु बागची [बाएँ] और उत्सव के मीडिया-पब्लिकेशन इंचार्ज प्रदीप भट्टाचार्य
[ • रिपोर्ट एवं चित्र संयोजन- प्रदीप भट्टाचार्य, शुभेंदु बागची एवं प्रभात मण्डल ]
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