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‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में ‘कॉफ़ी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श अड्डा-128’ में पावस ऋतु पर काव्य पाठ एवं बांग्ला कवि पल्लव चटर्जी की लघुकथा संग्रह ‘अनुघटक’ का लोकार्पण हुआ

👉 • कॉफ़ी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श अड्डा-128 भिलाई निवास के इंडियन कॉफ़ी हाउस में
• छत्तीसगढ़ आसपास
• भिलाई
भिलाई [22 अगस्त, 2026] : भिलाई निवास के इंडियन कॉफ़ी हाउस में ‘बंगीय साहित्य संस्था’ की 128वीं साहित्यिक विचार-विमर्श अड्डा आसाम से पधारी बांग्ला कवयित्री- दीपिका विश्वास की अध्यक्षता एवं ‘कला साहित्य मित्र समूह’ [कवच] के संयोजक- शक्ति चक्रवर्ती की विशेष उपस्थिति में हुई.
इस अवसर पर ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के संरक्षक- समरेंद्र विश्वास, उपसभापति- स्मृति दत्त, ‘मध्यबलय’ के संपादक- दुलाल समाद्दार, महासचिव- शुभेंदु बागची, कोषाध्यक्ष- पल्लव चटर्जी, प्रगतिशील जन-विचारधारा की साहित्यिक संस्था ‘आरंभ’ के अध्यक्ष- प्रदीप भट्टाचार्य, ‘आरंभ’ के अतिरिक्त कार्यकारी अध्यक्ष- ब्रजेश मल्लिक, ‘आरंभ’ के संयुक्त सचिव- आलोक कुमार चंदा, बीरेंद्रनाथ सरकार, रवींद्रनाथ देबनाथ, ‘सुरो-ओ-बानी’ के संयोजक- सुबीर रॉय, समाजसेवी रतन सरकार उपस्थित थे.
संचालन ‘बंगीय साहित्य संस्था’ की उप सभापति स्मृति दत्त एवं आभार व्यक्त सुबीर रॉय ने किया.

👉 • Bengali Short Stories ‘Anughatak’ by- Pallob Chatterjee and Bengali Writar Dipika Biswas

👉 • ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में ‘कॉफ़ी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श अड्डा-128’ में… [बाएँ से] प्रतिष्ठित बांग्ला कवि-लेखक समरेंद्र विश्वास, ‘आरंभ’ के संयुक्त सचिव- आलोक कुमार चंदा और प्रगतिशील जन-विचारधारा की साहित्यिक संस्था ‘आरंभ’ के अध्यक्ष- प्रदीप भट्टाचार्य.

👉 • ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में ‘कॉफ़ी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श अड्डा-128’ में… [बाएँ से] पल्लव चटर्जी, दीपिका विश्वास [आसाम] समरेंद्र विश्वास, आलोक कुमार चंदा और प्रदीप भट्टाचार्य.

👉 [बाएँ से] • ब्रजेश मल्लिक, पल्लव चटर्जी, दीपिका विश्वास, समरेंद्र विश्वास, आलोक कुमार चंदा और प्रदीप भट्टाचार्य

👉 • ‘बंगीय साहित्य संस्था’ की उप सभापति स्मृति दत्त के साथ संस्था के अन्य सक्रिय सदस्य
इस अवसर पर रंगकर्मी शक्ति चक्रवर्ती ने कहा कि-

👉 [बाएँ से] • दुलाल समाद्दार, शक्ति चक्रवर्ती और बीरेंद्रनाथ सरकार
‘बंगीय साहित्य संस्था’ द्वारा प्रति सप्ताह यह साहित्यिक विचार-विमर्श बैठक आप लोग कर रहे हैं, यह अपने आप में अनुकरणीय है. ऐसे आयोजन से हम बांग्ला साहित्य, संस्कृति एवं सांस्कृतिक धरोहर को बचाए रख सकते हैं. साहित्यवाद और हमारी प्रासंगिकता व वैचारिकता, कला-साहित्य को जीवंत रखना हम सबका कर्तव्य है, तभी आने वाली पीढ़ी इसे समझेगी. हम हैं तो भाषा में हैं-हम होंगे तो भाषा में होंगे.
बांग्ला की चर्चित कवयित्री दीपिका विश्वास ने अपनी बात को कुछ इस तरह रखा और अपनी प्रतिनिधि कविता का पाठ भी किया-
कला, साहित्य और विशेष रूप से बांग्ला भाषा एवं कविता को हम ऐसे ही साहित्यिक आयोजन से अस्तित्व में रख सकते हैं. ‘बंगीय साहित्य संस्था’ साहित्य की विश्वबिरादरी बनाने और सक्रिय करने में सफल हो रही है. साहित्य की जगह ऐसे ही बैठकों से बची रहेगी. दीपका विश्वास ने ‘टेलीफोन’ और ‘फिरा’ [लौटना] शीर्षक से कविता का पाठ भी किया.

👉 • ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में कॉफ़ी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श अड्डा-128 [22 अगस्त,2026 : भिलाई निवास के इंडियन कॉफ़ी हाउस] में सुप्रसिद्ध बांग्ला-हिंदी के कवि पल्लव चटर्जी की पुस्तक ‘अनुघटक’ [लघुकथा] का विमोचन किया गया. [बाएँ से] रवींद्रनाथ देबनाथ, समरेंद्र विश्वास, आलोक कुमार चंदा, पल्लव चटर्जी, प्रदीप भट्टाचार्य, ब्रजेश मल्लिक, दुलाल समाद्दार, दीपिका विश्वास, स्मृति दत्त, वीरेंद्रनाथ सरकार और रतन सरकार.
आज की बैठक में पल्लव चटर्जी की नई कृति लघुकथा संग्रह ‘अनुघटक’ [‘Anughatak’ A Collection of Bengali Short Stories by Pallob Chatterjee] का लोकार्पण किया गया. ज्ञात हो कि इस संग्रह का विमोचन प्रगतिशील जन-विचारधारा की साहित्यिक संस्था ‘आरंभ’ के आयोजन में 12 अगस्त को ‘बंगीय साहित्य संस्था’ की सभापति- बानी चक्रवर्ती, मुख्य अतिथि देश की चर्चित कोकिलकंठी कवयित्री- संतोष झांझी के करकमलों द्वारा किया गया था. इस अवसर पर ‘आरंभ’ के मुख्य संरक्षक एवं उच्चन्यायालय के सेवानिवृत्त मजिस्ट्रेट श्री नीलम चंद सांखला और ‘आरंभ’ के मुख्य सलाहकार आचार्य डॉ. महेशचंद्र शर्मा विशेष रूप से उपस्थित थे. संचालन- शुभेंदु बागची ने किया था. कवि पल्लव चटर्जी ने इस अंक की प्रति उपस्थित सभी सदस्यों को आज सप्रेम भेंट में दिया.

👉 • Anughatak- A Collection of Bengali Short Stories by Pallob Chatterjee

👉 ‘आरंभ’ द्वारा आयोजित कार्यक्रम में ‘अनुघटक’ का विमोचन [बाएँ से] • आचार्य डॉ. महेशचंद्र शर्मा, श्री नीलम चंद सांखला, तारकनाथ चौधुरी, कवि पल्लव चटर्जी, संतोष झांझी और बानी चक्रवर्ती
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पावस ऋतु एवं अन्य विषयों पर सदस्यों ने कविता पाठ किया-

• स्मृति दत्त ने ‘इलीश-मलीश’/ • बीरेंद्रनाथ सरकार ने लघुकथा- ‘बंटी ओ तारा पृथ्वी’/ • पल्लव चटर्जी ने ‘इत्यादि’ और ‘सम्पर्क’/ • ब्रजेश मल्लिक ने ‘आत्मचिंतन’ और ‘शादी के बाद बेटी क्यों पराई हो जाती है’/ • आलोक कुमार चंदा ने कवि जाकिर हुसैन लिखित कविता ‘जोदी तुमी चावो’/ • समरेंद्र विश्वास ने ‘सुपरणा’ और ‘माँ’/ • दुलाल समाद्दार ने ‘श्रावण की धारा प्रवाह’ एवं ‘मामाबाड़ी’ और अंत में • प्रदीप भट्टाचार्य ने छोटी-छोटी मुक्तक.
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आभार व्यक्त करते हुए सुबीर रॉय ने कहा कि-
आज पढ़ी गई सभी कविताएं मार्मिक एवं अर्थगर्भ रही. सभी कविता लोक-मन और प्रकृति की भाषा को आत्मसजग आधुनिकता की भाषा से जोड़ती हैं. बांग्ला भाषा एक व्यापक है, हम इन कविताओं के माध्यम से हमारी आने वाली पीढ़ी को कुछ देकर जाएंगे, जिससे बंगाल के बाहर भी हम अपनी पहचान को खोने नहीं देंगे.



[ • रिपोर्ट एवं फोटो संयोजन- प्रदीप भट्टाचार्य ]
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