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अखिल भारतीय कला महोत्सव ‘रंग तरंग’-2026 के चौथे दिन सुरों की मिठास, रंगमंच की धार और पुरोधाओं की स्मृति से सजा कला महोत्सव

👉 • ‘रंग तरंग’ द्वारा आयोजित यह प्रतियोगिता और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां ही नहीं बल्कि भिलाई की कला-संस्कृति की विरासत को सम्मान देने, नई प्रतिभाओं को मंच देने और देश के विभिन्न हिस्सों की कलाओं को एक सूत्र में पिरोने का भी सार्थक प्रयास बनकर उभरा…

• छत्तीसगढ़ आसपास
• भिलाई
भिलाई [29 अगस्त, 2026] : महात्मा गांधी कला मंदिर, सिविक सेंटर में चल रहे पांच दिवसीय अखिल भारतीय कला महोत्सव ‘रंग तरंग-2026’ में शनिवार का दिन संगीत, नृत्य, रंगमंच और स्मृतियों के नाम रहा। रविन्द्र निकेतन, कालीबाड़ी, हुडको, भिलाई एवं गीता आर्ट्स, एक्ट एंड नृत्य एसोसिएशन (GANA), भिलाई द्वारा आयोजित इस महोत्सव को कला-साहित्य अकादमी, छत्तीसगढ़ का सहयोग तथा सेल, भिलाई इस्पात संयंत्र, भिलाई का महत्वपूर्ण सहयोग प्राप्त है।
कलावती सामंत स्मृति गायन के फाइनल में सुरों का मुकाबला-

आज [शनिवार] के प्रथम सत्र में ‘स्व. कलावती सामंत स्मृति गायन प्रतियोगिता’ के फाइनल राउंड में प्रतिभागियों ने एक से बढ़कर एक सदाबहार गीत प्रस्तुत कर संगीतप्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। सुर, ताल, लय, भाव और आवाज की विविधता से सजी प्रस्तुतियों का स्तर इतना ऊंचा रहा कि तीनों निर्णायकों के लिए श्रेष्ठ प्रतिभा का चयन करना खासा चुनौतीपूर्ण हो गया।
प्रत्येक गायक ने अपनी अलग गायन शैली और भावपूर्ण प्रस्तुति से मंच पर अपनी पहचान बनाई। पुराने सदाबहार गीतों को प्रतिभागियों ने जिस आत्मविश्वास और खूबसूरती से पेश किया, उससे सभागार में संगीत की स्वर्णिम यादें फिर जीवंत हो उठीं।
इन प्रस्तुतियों को जे.एम.सी. लाइव बैंड के वादकों ने शानदार और सधी हुई वाद्य-संगति दी। गायकों की आवाज के अनुरूप लय और वाद्य संयोजन ने गीतों के प्रभाव को और बढ़ाया। लाइव बैंड और गायकों के बेहतरीन तालमेल ने पूरे फाइनल राउंड को उच्चस्तरीय संगीतमय प्रस्तुति में बदल दिया।
सुरों के बीच भिलाई-दुर्ग के पुरोधा कलाकारों, लेखकों एवं साहित्यकारों को स्मृति नमन-

👉 • सुप्रसिद्ध लेखिका स्व. प्रभा सरस को उनके साहित्यिक योगदान के लिए ‘रंग तरंग’ द्वारा विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित कर याद किया गया. प्रभा सरस की सुपुत्री राजुल को ‘आरंभ’ के अध्यक्ष प्रदीप भट्टाचार्य के कर कमलों से गमले में पौधा भेंट किया गया

👉 • इस अवसर पर स्व. प्रभा सरस की पुत्री, बहु और पत्रकार विमल शंकर झा ‘विमल’, प्रदीप भट्टाचार्य, रंगकर्मी आरसी सामंता, नरेंद्र राठौर एवं मणिमय मुखर्जी मंचस्थ रहे…
कार्यक्रम में भिलाई इस्पात संयंत्र के 1960-70 के दशक के दिवंगत पुरोधा कलाकारों को भावपूर्ण ‘स्मृति नमन’ अर्पित किया गया। इनमें तेलुगु भाषा के रंगमंच से जुड़े कलाकार भी शामिल रहे, जिन्होंने अपने समय में भिलाई की सांस्कृतिक और रंगमंचीय गतिविधियों को समृद्ध किया।
दिवंगत कलाकारों के परिजनों को मंच पर आमंत्रित कर सम्मानित किया गया और उन्हें गमले में पौधा भेंट किया गया। यह पहल सम्मान से कहीं आगे बढ़कर स्मृति और विरासत को भविष्य से जोड़ने का संदेश बनी। जिस तरह इन कलाकारों ने अपनी कला से भिलाई की सांस्कृतिक जमीन को सींचा, उसी तरह उनकी स्मृति में दिया गया पौधा भी बढ़ते हुए आने वाली पीढ़ियों को उनके योगदान की याद दिलाता रहेगा।
स्मृति को हरियाली से जोड़ने की यह पहल समारोह का भावुक और अर्थपूर्ण पक्ष रही।
नृत्य प्रतियोगिता विजेताओं को पुरुस्कार देकर सम्मानित किया गया-

‘वो एक रात’ से ‘सुनिबा हुए ए कहिनी’ तक रंगमंच पर दिखी विविधता-



आज की शाम रंगमंच के नाम रही। राजनांदगांव थिएटर की टीम ने ‘वो एक रात’ नाटक प्रस्तुत किया, जिसमें कथानक, अभिनय और मंचीय प्रस्तुति के माध्यम से दर्शकों को बांधे रखा। नाटक की प्रस्तुति ने रंगमंच की प्रभावी संवाद शैली और कलाकारों की अभिनय क्षमता का परिचय दिया।
इसके बाद ओड़िया नाटक ‘सुनिबा हुए ए कहिनी’ ने दर्शकों को ओड़िया रंगमंच की विशिष्ट संवेदना और सांस्कृतिक रंग से रूबरू कराया। अलग भाषा और सांस्कृतिक परिवेश की प्रस्तुति के बावजूद कथ्य और अभिनय ने दर्शकों से सीधा संवाद कायम किया।
शाम के कार्यक्रम में कानपुर के श्री प्रवीण अरोरा की बेहतरीन मोनो एक्टिंग भी आकर्षण का केंद्र रही। अकेले कलाकार द्वारा मंच पर विभिन्न भावों और परिस्थितियों को जीवंत करना दर्शकों के लिए रंगमंच की अभिनय शक्ति का प्रभावशाली अनुभव रहा। कलाकार ने अपने अभिनय कौशल से मंच को पूरी तरह अपने नियंत्रण में रखा और दर्शकों की खूब सराहना बटोरी।
शनिवार की नाट्य संध्या ने यह साबित किया कि भाषा अलग हो सकती है, लेकिन रंगमंच की संवेदना सार्वभौमिक होती है। राजनांदगांव से लेकर ओड़िशा, कानपुर और रायगढ़ तक की रंगमंचीय प्रतिभाओं को एक मंच पर लाकर ‘रंग तरंग-2026’ ने भारतीय रंगमंच की विविधता को भिलाई के दर्शकों के सामने प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।
कला के रंगों में एकजुट हुआ भिलाई
‘रंग तरंग-2026’ का शनिवार इस मायने में खास रहा कि एक ही दिन सदाबहार संगीत, लाइव बैंड, शास्त्रीय नृत्य, पुरोधा कलाकारों को स्मृति नमन और देश के विभिन्न क्षेत्रों की रंगमंचीय प्रस्तुतियां एक साथ देखने को मिलीं।
आज प्रमुख उपस्थित रहे-
पी भानुजी राव, यश ओबेरॉय, सुप्रियो सेन, मीता दास, मनोरंजन दास, प्रदीप भट्टाचार्य, शेफाली भट्टाचार्य, मिथुन दास, कुंवर नरेंद्र प्रताप सिंह राठौर, विमल शंकर झा, शायर मुमताज, शक्ति चक्रवर्ती, शांतुनु दासगुप्ता, मणिमय मुखर्जी, संगीता लहरी और अनेक रंगकर्मी, कलाकार, साहित्यकार, पत्रकार एवं बुद्धिजीवी
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कार्यक्रम के कुछ प्रमुख झलकियाँ-









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