■दीपावली पर विशेष : ■तारकनाथ चौधुरी.
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♀ कैसे मनाऊं दीवाली.
♀ तारकनाथ चौधुरी.
[ चरोदा-भिलाई, जिला-दुर्ग,छ. ग. ]

जब घर का दीपक ही नहीं
तो कैसे मनाऊँ दीवाली?
उसकी तुतली बोली से मुझे
आभास फुलझडी़ का होता,
उसके पापा संबोधन सुन
अपने दुःखों को मैं खोता।
अब हाल मेरा उस जैसा है,
ज्यों उजडे़ उपवन का माली।।
कैसे मनाऊँ दीवाली?
ज्योतिर्मय उसकी आँखों से
मम गृह निशि का उजियारा था,
काँतिमय उसके चेहरे से
छँट जाता घन अँधियारा था।
उसके सुरलोक गमन से हुई,
हर रात अमावस वाली।।
कैसे मनाऊँ दीवाली?
जब घर का दीपक ही नहीं,
तो कैसे मनाऊँ दीवाली?
●कवि संपर्क-
●83494 08210
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chhattisgarhaaspaas
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