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- ▶️ आज शिक्षक दिवस पर विशेष : डॉ. नीलकंठ देवांगन.
▶️ आज शिक्षक दिवस पर विशेष : डॉ. नीलकंठ देवांगन.
•छात्रों के विकास में शिक्षक का दायित्व.
डॉ. राधाकृष्ण एक महान दर्शनिक, तत्व चिंतक, आदर्श लेखक एवं विचारक, तत्वदर्शी – एक ऐसा तत्वदर्शी जो जीवन और कर्म से महर्षि वशिष्ठ तथा विश्वामित्र की तरह विश्व गुरु थे |
वे भारतीय संस्कृति के अद्वितीय विद्वान थे | अपनी ओजपूर्ण लेखनी से आपने भारतीय संस्कृति की नई व्याख्या की और भारत के युवकों में अध्यात्म निष्ठ जीवन के लिए नया उत्साह पैदा किया |
डॉ राधाकृष्णन मूलतः शिक्षक थे | इसीलिए देश के सबसे ऊंचा, प्रतिष्ठित एवं महामंडित पद ‘ राष्टृपति पद ‘ पर शुभासीन होते हुए भी उनके जन्म दिन को ‘ शिक्षक दिवस ‘ के रूप में मनाया जाना उनका मूलतः शिक्षक होने का स्मरण दिलाता तथा उनके शिक्षकीय पद को सम्मान देता है |
आज का बालक राष्टृ का भावी कर्णधार होता है | इन्हीं के अर्जित गुण, विद्या, बुद्धि, विवेक, चिंतन, संस्कार और चरित्र राष्टृ का शिला रखते तथा अनगढ़ को गढ़ते हैं | बालकों के विकास में, निर्माण में घर, समाज और सरकार की अपेक्षा शिक्षकों का दायित्व सर्वाधिक होता है | उन्हें उनमें उन आदतों का निर्माण करना होता है जिन्हें अपनाकर बालक सफलता पूर्वक जी सके | इन आदतों का निर्माण मात्र पाठ्यक्रम के कुछ पाठों को पढ़ाने से नहीं होता, बल्कि शिक्षक को अपने जीवन मूल्यों एवं आदर्शों को छात्रों के समक्ष प्रस्तुत करना पड़ता है | इसी से छात्रों में अच्छी आदतों का निर्माण और दूषित प्रवृत्तियों का निराकरण तथा ज्ञान का सही प्रतिस्थापन होता है | जिस देश का शिक्षक इस महत्व को समझ कर अपने छात्रों के निर्माण में लगेगा, वही संसार का सिरमौर तथा सर्वश्रेष्ठ देश होगा |
विश्व पूजित व सम्मानित इस महान दार्शनिक का विचार है कि इस समय की सबसे बड़ी आवश्यकता मूल्यों की शिक्षा देना है | इस प्रकार की शिक्षा कि मानव वैयक्तिक क्षूद्र स्वार्थों से ऊपर उठकर स्वार्थपरक इच्छाओं और कामनाओं को त्याग करे | उन्हें इस प्रकार की शिक्षा दी जानी चाहिए जिससे कि वे अपनी अंतरात्मा में सुप्त देवता को जगा सके |
डॉ राधाकृष्णन का जन्म 1988 में 5 सितंबर को हुआ था | 1962 से प्रति वर्ष शिक्षकों के सम्मान में इस दिन देश भर में ‘ शिक्षक दिवस ‘ मनाया जाता है |
•संपर्क –
•84355 52828
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