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कविता आसपास : तारक नाथ चौधुरी
2 years ago
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• त्रिपथगा
– तारक नाथ चौधुरी
[ चरोदा-भिलाई, छत्तीसगढ़ ]

(1)
कितना पाबंद है सूरज
सबको वक्त पर जगाता है
तुम कब तक बंद रखोगे आँखें?
(2)
श्रेष्ठ का हो गया राज्याभिषेक
हर्ष-ध्वनि में दब गईं सपनों की कराहें
देख रहे हैं सभी बाँयी तर्जनी।
(3)
गिरकर उठा सरपट दौड़ चला
इस क्षण या उस क्षण लक्ष्य पा जायेगा
पहाडी़ झरने की बात समझ गया।
(4)
कृष्ण-भक्ति में डूबे अब भी नाच रहे
बाहर पुलिसिया वाहनों की ध्वनि
कल कुछ बाबाओं की पेशी है।
• संपर्क-
• 83494 08210
०००
chhattisgarhaaspaas
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