- Home
- Chhattisgarh
- कला साहित्य अकादमी छत्तीसगढ़ कवच : पंडवानी की अप्रतिम साधिका तीजन बाई को कलाकारों ने दी श्रद्धांजलि : भिलाई में ‘तंबूरा स्मारक’ बनाने की उठी मांग
कला साहित्य अकादमी छत्तीसगढ़ कवच : पंडवानी की अप्रतिम साधिका तीजन बाई को कलाकारों ने दी श्रद्धांजलि : भिलाई में ‘तंबूरा स्मारक’ बनाने की उठी मांग

👉 • शायर मुमताज श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए बोले कि- पिछले लंबे समय से अस्वस्थ चल रहीं तीजन बाई 5 जुलाई को अलसुबह ‘एम्स’ में अंतिम सांस ली. उनके गृहग्राम ‘गनियारी’ में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया. तीजन बाई का जन्म 24 अप्रैल, 1956 को हुआ था. 1988 में पद्मश्री, 2003 में पद्म भूषण और 2019 में पद्म विभूषण से भारत सरकार द्वारा सम्मानित तीजन बाई पंडवानी को अमर कर गई. तीजन बाई 80 दशक में भारत की सांस्कृतिक दूत बनकर जर्मनी, फ्रांस, इंग्लेंड, स्विटजरलैंड और रोमानिया समेत 15 देशों की यात्रा की. बिलासपुर रविशंकर और खैरागढ़ विश्वविद्यालयों ने डी.लिट् की मानद उपाधि से सम्मानित किया. 1995 में संगीत नाटक अकादमी से सम्मानित हुई तीजन बाई को शत् शत् नमन
पंडवानी की अप्रतिम साधिका, पद्म विभूषण स्वर्गीय डॉ. तीजन बाई के आकस्मिक निधन पर सोमवार, 6 जुलाई को कला साहित्य अकादमी, छत्तीसगढ़ (कवच) की ओर से रविन्द्र निकेतन, कालीबाड़ी (हुडको) में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। साहित्यकारों, कलाकारों और संस्कृतिप्रेमियों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए पंडवानी और छत्तीसगढ़ी लोकसंस्कृति में उनके अतुलनीय योगदान को याद किया।
कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. तीजन बाई के तैलचित्र पर माल्यार्पण और पुष्पांजलि अर्पित कर की गई।
माल्यार्पण करने वालों में शामिल थे:
विजय दिल्लीवार “वर्तमान”, परविंदर सिंह, रिखी क्षत्रिय, मुमताज भाई, जय प्रकाश नायर, मणिमय मुखर्जी, शक्ति चक्रवर्ती, एल. रुद्र मूर्ति, बबलू विश्वास
वक्ताओं ने कहा कि डॉ. तीजन बाई ने अपनी अद्वितीय गायन शैली और असाधारण प्रतिभा से पंडवानी को गांव-गांव की चौपालों से निकालकर अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाया। उन्होंने छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को विश्वभर में नई पहचान दिलाई। उनके सरल, सहज और आत्मीय व्यक्तित्व से जुड़े संस्मरण साझा करते हुए उपस्थित जनों ने उनके निधन को कला जगत की अपूरणीय क्षति बताया। इस अवसर पर विजय दिल्लीवार “वर्तमान” ने तीजन बाई के जीवन संघर्ष के उन पहलुओं को भी बताया जो आम लोगों को कम ज्ञात हैं।
श्रद्धांजलि सभा में यह मांग भी उठी कि भिलाई के किसी प्रमुख चौराहे पर डॉ. तीजन बाई की स्मृति में विशाल तंबूरे की आकृति वाला स्मारक स्थापित किया जाए। इसके साथ भिलाई इस्पात संयंत्र के स्थापना काल 1960 से 70 दशक के विभिन्न विधाओं के दिवंगत कलाकारों-साहित्यकारों के नाम भी अंकित रहें, ताकि आने वाली पीढ़ियां पंडवानी की इस महान परंपरा, उसकी शीर्ष साधिका और भिलाई के स्थापना काल के पुरोधा कलाकारों-साहित्यकारों को सदैव स्मरण रख सकें।
कार्यक्रम का संचालन श्रीमती रचनाश्रीवास्तव ने किया.

👉 • नाट्यकार मणिमय मुखर्जी ने कहा कि- जब भी महाभारत का लोकगायन होगा, तब-तब तीजन बाई की पंडवानी शैली को याद की जाएगी. मंच पर जब भी तंबूरा बजेगा, स्वर में द्रोपदी का दर्द, भीम का पराक्रम या करण की करुणा गूंजेगी. तीजन बाई की अद्वितीय कला-साधना और विलक्षण प्रतिभा को विश्व परिदृश्य पर हमेशा याद किया जाएगा. शत् शत् नमन

👉 • कलाकार शक्ति चक्रवर्ती ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए बोले कि- तीजन बाई का जन्म दुर्ग जिले के ‘अटारी’ गांव में पारधी समुदाय में हुआ था. पिता का छुनुकलाल पारधी और माँ का नाम सुखवती देवी था. देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित तीजन बाई छत्तीसगढ़ की एकमात्र कलाकार, जिन्हें तीनों पद्म सम्मान मिला. ऐसे छत्तीसगढ़ की कलाकार को शत् शत् नमन.
श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित प्रमुख गणमान्यजन-

रचना श्रीवास्तव, शान्तनु दासगुप्ता, ममता देवी, चन्द्रा बैनर्जी, मौ दत्ता, सुमिता सरकार, भाष्वोती बोस, डॉ. संस्कृति वर्मा, एल. रुद्र मूर्ति, एम. जनकीराव, जय प्रकाश नायर, मिथुन दास, परविंदर सिंह, विजय दिल्लीवार “वर्तमान”, रिखी क्षत्रिय, मुमताज, त्रिलोक तिवारी, मणिमय मुखर्जी, बरुण चक्रवर्ती, रामचन्द्र सामंत, प्रदीप गोले, मुकेश पटेल, श्रवण कुमार, शक्ति चक्रवर्ती, पी.पी. बिस्वास, प्रदीप कुमार मित्रा, आशुतोष बोस, सोमा बोस, रुमा बर्धन, स्वरा, अयन दत्ता.
👉 • नाट्य कलाकार एल. रुद्रमूर्ति तीजन बाई को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए बोले…
👉 • लेखक-कवि विजय वर्तमान ने तीजन बाई को श्रद्धांजलि देते हुए बोले…
अंत में उपस्थित सभी लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई.
🟥🟥🟥
chhattisgarhaaspaas
विज्ञापन (Advertisement)