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साकेत साहित्य परिषद् सुरगी [राजनांदगांव] : विश्व प्रसिद्ध कहानीकार-उपन्यासकार प्रेमचंद को याद करते हुए यथार्थवादी साहित्य पर हुई सार्थक चर्चा की गई

👉 • चर्चा गोष्ठी के मुख्य अतिथि ‘छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग’ के जिला समन्वयक- आत्माराम कोशा एवं अध्यक्षता ‘प्रगतिशील लेखक संघ’ [राजनांदगांव] के अध्यक्ष- प्रभात तिवारी रहे
• छत्तीसगढ़ आसपास
• राजनांदगांव [सुरगी]
महान कहानीकार एवं उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की 146वीं जयंती के अवसर पर साकेत साहित्य परिषद, सुरगी के बैनर तले हरदी स्थित निषाद भवन में साहित्यिक आयोजन एवं सरस कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संयोजन वरिष्ठ साहित्यकार एवं परिषद के संरक्षक कुबेर सिंह साहू तथा पूर्व अध्यक्ष सचिन निषाद ने किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के जिला समन्वयक आत्माराम कोशा अमात्य थे। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि मुंशी प्रेमचंद ने हिंदी कहानी साहित्य में क्रांतिकारी परिवर्तन किया तथा अपने यथार्थवादी लेखन से समाज को नई दिशा प्रदान की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रगतिशील लेखक संघ, राजनांदगांव के अध्यक्ष प्रभात तिवारी ने की। उन्होंने प्रेमचंद की विभिन्न कहानियों का उल्लेख करते हुए उनके साहित्य की समकालीन प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।
वरिष्ठ साहित्यकार कुबेर सिंह साहू ने प्रेमचंद के कहानी-शिल्प पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने प्रेमचंद की प्रथम कहानी ‘दुनिया का सबसे अनमोल रत्न’ से लेकर अंतिम कहानी ‘कफन’ तक का उल्लेख करते हुए उनके कथा-शिल्प की विशेषताओं को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य आदर्शवाद से यथार्थवाद और आगे चलकर वैचारिक चेतना की ओर क्रमिक विकास का परिचायक है।
परिषद के अध्यक्ष ओमप्रकाश साहू ‘अंकुर’ ने आधार वक्तव्य प्रस्तुत करते हुए कहा कि प्रेमचंद के नारी पात्र अत्यंत सशक्त, संवेदनशील और प्रेरणादायी हैं। कवयित्री करिश्मा श्रीवास्तव ने कहानी-पाठ किया, जबकि मानसिंह मौलिक ने छत्तीसगढ़ी साहित्य में गद्य लेखन की आवश्यकता पर बल दिया। अंबागढ़ चौकी के डामन लाल डोंगरी ने प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी ‘बड़े घर की बेटी’ की छत्तीसगढ़ी में समीक्षा प्रस्तुत की।
परिचर्चा में पुरवाही साहित्य समिति, पाटेकोहरा-छुरिया के अध्यक्ष ग्वाला प्रसाद यादव ‘नटखट’ ने कहा कि प्रेमचंद आमजन के लेखक हैं और उनकी कहानियाँ मानवीय संवेदनाओं की सशक्त अभिव्यक्ति हैं। वरिष्ठ साहित्यकार रोशन लाल साहू ने प्रेमचंद को अप्रतिम साहित्यकार बताते हुए कहा कि उनकी कहानियों के पात्र एवं संवाद योजना अत्यंत प्रभावशाली हैं। परिषद के उपाध्यक्ष पवन यादव ‘पहुना’ ने ‘दो बैलों की कथा’ पर विचार व्यक्त करते हुए प्रेमचंद की कहानियों का वर्णानुक्रम के आधार पर रोचक परिचय दिया। मीडिया प्रभारी कुलेश्वर दास साहू ने ‘गिल्ली-डंडा’ तथा सहसचिव डोहर दास साहू ने ‘ईदगाह’ कहानी पर अपने विचार रखे।
परिचर्चा का प्रभावी संचालन परिषद के पूर्व अध्यक्ष लखनलाल साहू ‘लहर’ ने किया। उन्होंने प्रत्येक वक्ता के विचारों का सार प्रस्तुत करते हुए चर्चा को सटीक एवं सारगर्भित ढंग से आगे बढ़ाया। उन्होंने प्रेमचंद की ‘मंत्र’ कहानी का संदर्भ देते हुए कहा कि साधारण पात्रों के माध्यम से असाधारण सामाजिक संदेश प्रस्तुत करना प्रेमचंद की विशिष्टता है, जहाँ मानव सेवा सर्वोपरि बनकर उभरती है।
द्वितीय सत्र में सरस कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता जिला निषाद समाज के अध्यक्ष द्रुपत निषाद ‘मुन्ना’ ने की। वरिष्ठ कवि आनंद राम सार्वा ने किसान और सावन की महिमा का वर्णन किया। परिषद के सचिव राजकुमार चौधरी ‘रौना’ ने अपनी ग़ज़ल के माध्यम से सामाजिक विसंगतियों पर तीखा प्रहार किया, जबकि वरिष्ठ गीतकार नंदकिशोर साव ‘नीरव’ ने अपने गीतों की प्रस्तुति दी।
ग्वाला प्रसाद यादव ‘नटखट’, डामन लाल डोंगरी एवं रोशन लाल साहू ने हास्य-व्यंग्य रचनाओं से श्रोताओं का भरपूर मनोरंजन किया। फकीर प्रसाद साहू ‘फक्कड़’ ने लघुकथा के माध्यम से समसामयिक विषयों पर प्रभावशाली व्यंग्य प्रस्तुत किया। सचिन निषाद ने किसानों की मेहनत और संघर्ष को अपनी कविता का आधार बनाया। पप्पू पौवार्त्य ‘कलिहारी’ ने जीवन की क्षणभंगुरता का उल्लेख करते हुए समरसता के साथ जीवन जीने का संदेश दिया। चुरामन साहू एवं सिब्दी के दिनेश कुमार साहू जी ने भी प्रभावशाली काव्य-पाठ किया।

कवि गोष्ठी का सरस संचालन पवन यादव ‘पहुना’ ने किया। अंत में सचिन निषाद ने सभी अतिथियों, साहित्यकारों एवं सहभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर प्यारीराम साहू, तुकाराम, अमित श्रीवास्तव, योगेश श्रीवास्तव सहित बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे।
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