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कोरोना काल के बाद युवाओं में बढ़ा हार्ट अटैक, 40 से पहले ढाई गुना बढ़ा खतरा, आंबेडकर अस्पताल का अध्ययन

रायपुर। हार्ट अटैक अब केवल बुजुर्गों की बीमारी नहीं रह गई है, बल्कि कम उम्र के युवा भी इसकी चपेट में तेजी से आ रहे हैं। रायपुर के डॉ. बीआर आंबेडकर अस्पताल के कार्डियोलॉजी विभाग द्वारा किए गए अध्ययन में यह बात सामने आई है कि 40 वर्ष या उससे कम उम्र के लोगों में एक्यूट कोरोनरी सिंड्रोम (एसीएस) के मामलों में उछाल आया है।
अध्ययन बताता है कि प्री-कोविड काल में हार्जअटैक से जुड़े मामलों में युवाओं की हिस्सेदारी आठ प्रतिशत से कम थी, वहीं अब यह 20 प्रतिशत से अधिक हो गई है।
इन कारणों से बढ़े मामले
अध्ययन में शामिल डॉक्टरों की टीम ने पाया कि युवाओं में इस खतरनाक बीमारी के पीछे मुख्य रूप से बढ़ता मोटापा, अत्यधिक शराब का सेवन, सिगरेट और गुटखा जैसी बुरी आदतें शामिल हैं। आंकड़ों के मुताबिक चालीस वर्ष तक के लगभग पंद्रह प्रतिशत युवा शराब और तंबाकू के सेवन के आदी पाए गए। इसके अलावा, शारीरिक गतिविधि में कमी और जंक फूड का अत्यधिक सेवन भी मेटाबोलिक जोखिम को तेजी से बढ़ा रहा है।
सतर्कता और नियमित स्वास्थ्य जांच जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि हालांकि अधिकांश युवाओं को कोरोना का टीका लगा था, लेकिन कोरोना संक्रमण और टीकाकरण का हृदय की कार्यक्षमता पर कोई सीधा नकारात्मक प्रभाव अध्ययन में नहीं देखा गया। फिर भी, तनाव भरी जीवनशैली और खानपान की गलत आदतें युवाओं के दिल पर भारी पड़ रही हैं। डॉक्टरों ने सलाह दी है कि युवाओं को अपने खानपान में सुधार करना चाहिए और नियमित रूप से स्वास्थ्य जांच करानी चाहिए ताकि समय रहते खतरे को टाला जा सके।
मार्च 24 से फरवरी 25 के बीच हुआ अध्ययन
मेडिकल कालेज रायपुर के कार्डियोलाजी विभागाध्यक्ष डाॅ. स्मित श्रीवास्तव, एसोसिएट प्रोफेसर डाॅ. सुरेश चंद्रवंशी और पीजी छात्रा डाॅ. निकिता गुसाईं ने मार्च 2024 से फरवरी 2025 के बीच 288 एसीएस मरीजों पर अध्ययन किया। इनमें 40 वर्ष या उससे कम उम्र के 144 और 40 वर्ष से अधिक उम्र के 144 मरीज शामिल थे। मरीजों के जोखिम कारकों, लक्षणों, हृदय की कार्यक्षमता और एंजियोग्राफी परिणामों की तुलना की गई।
युवाओं में मोटापा और नशे का खतरा अधिक
40 वर्ष तक के 19.44 प्रतिशत मरीज मोटापे से ग्रस्त थे, जबकि अधिक उम्र के मरीजों में यह 6.25 प्रतिशत था। युवाओं में शराब सेवन 45.14 प्रतिशत, सिगरेट 22.91 प्रतिशत और गुटखा सेवन 16.67 प्रतिशत मिला। अधिक उम्र में ये आंकड़े क्रमश: 29.87, 8.33 और 5.56 प्रतिशत रहे। अधिक उम्र के मरीजों में उच्च रक्तचाप 52.78 और टाइप-2 मधुमेह 38.20 प्रतिशत था। युवाओं में ये आंकड़े 24.31 और 18.06 प्रतिशत रहे। 65.28 प्रतिशत युवा मरीजों में कोई अन्य सह-रोग नहीं था, जबकि अधिक उम्र में यह 36.12 प्रतिशत रहा।
कोरोना के बाद मधुमेह और शराब सेवन बढ़ा
युवा एसीएस मरीजों में टाइप-2 मधुमेह 10.34 से बढ़कर 45.13 प्रतिशत, शराब सेवन 26.44 से बढ़कर 50.77 प्रतिशत और तंबाकू सेवन 16.09 से बढ़कर 29.74 प्रतिशत हुआ। धूम्रपान में मामूली बदलाव रहा और यह 27.59 से बढ़कर 28.21 प्रतिशत हुआ। दोनों समूहों में 31.94 प्रतिशत मरीजों में कोरोना संक्रमण का इतिहास मिला। 97.22 प्रतिशत युवा और 92.36 प्रतिशत अधिक उम्र के मरीजों का टीकाकरण हुआ था। अध्ययन में कोविड संक्रमण, टीकाकरण या टीके के प्रकार का हार्ट अटैक के बाद बाएं वेंट्रिकल की कार्यक्षमता में कमी से कोई महत्वपूर्ण संबंध नहीं मिला।
सीने में दर्द सबसे आम लक्षण
दोनों समूहों में सीने में दर्द प्रमुख लक्षण रहा। एंजियोग्राफी में सिंगल वेसल डिजीज युवाओं में 40.98 और अधिक उम्र के मरीजों में 34.73 प्रतिशत मिली। ट्रिपल वेसल डिजीज अधिक उम्र में 25 और युवाओं में 13.89 प्रतिशत रही। शोधकर्ताओं के अनुसार कोरोना के बाद शारीरिक गतिविधि में कमी, बैठे रहने वाली जीवनशैली और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों के सेवन से मोटापा और मेटाबोलिक जोखिम बढ़ा हो सकता है। युवाओं में शराब, तंबाकू और गुटखा जैसे जोखिम कारकों पर रोकथाम और नियमित स्वास्थ्य जांच जरूरी है।
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