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सुरेर कैनवासे : कोलकाता में रवींद्र-नज़रूल को सुरांजलि देंगे ‘रवींद्र सुधा’ भिलाई के संगीत गुरु विश्वजीत सरकार के नेतृत्व में 16 कलाकार

👉 • भिलाई के 16 कलाकारों में प्रमुख हैं- संचयिता रॉय, चैताली पाल, अनिता मुखर्जी, सुचिता मुखर्जी, सुमिता डे, महुआ भौमिक, आल्पना तालुकदार, बनानी विश्वास, संगीता चटर्जी, प्रतिमा दरीपा, सोमा रॉय, भाश्वती बोस, श्रावणी दास, सुतापा पात्र, रणबीर पाल एवं मणिमय मुखर्जी
• छत्तीसगढ़ आसपास
• भिलाई
बंगाल की सांस्कृतिक चेतना के दो महान स्तंभ कविगुरु रवींद्रनाथ ठाकुर और विद्रोही कवि काज़ी नज़रुल इस्लाम की अमर स्मृति को समर्पित भव्य संगीत-नृत्य आलेख्य “सुरेर कैनवासे” का आयोजन 23 अगस्त, रविवार को शाम 5 बजे रवींद्र भवन, दमदम, कोलकाता में किया जाएगा। वैष्णवघाटा साधना, कोलकाता द्वारा आयोजित इस सांस्कृतिक संध्या में करीब 160 कलाकार गीत, नृत्य और आवृत्ति के माध्यम से दोनों महाकवियों की कालजयी रचनाओं को मंच पर जीवंत करेंगे।
सुरों के कैनवास पर उभरेंगे रवींद्र-नज़रूल के रंग

“सुरेर कैनवासे” की संकल्पना संगीत के सुरों को एक ऐसे कैनवास के रूप में प्रस्तुत करती है, जिस पर रवींद्रनाथ और नज़रुल की भावनाओं, विचारों, मानवीय संवेदनाओं और सृजनशीलता के विविध रंग उभरते हैं। कार्यक्रम में गीत, नृत्य और आवृत्ति को एक सूत्र में पिरोकर तैयार किया गया है।
कार्यक्रम को कोलकाता के वरिष्ठ कलाकार सतीनाथ मुखोपाध्याय एवं मिताली बैनर्जी के मार्गदर्शन एवं सहयोग से संवारा गया है। इसके मेंटर के रूप में जमशेदपुर की रुमकी दास, धनबाद की कुमकुम बैनर्जी, भिलाई के बिश्वजीत सरकार, रांची की लिली मुखर्जी, जमशेदपुर के संदीप दास तथा धनबाद की समिता भट्टाचार्य सहित अनेक प्रतिष्ठित कलाकार अपनी सहभागिता देंगे।
भिलाई के 16 कलाकार देंगे सुरांजलि
इस आयोजन में भिलाई की सांस्कृतिक संस्था ‘रवींद्र सुधा’ की विशेष सहभागिता रहेगी। संगीत गुरु श्री विश्वजीत सरकार के नेतृत्व में भिलाई के 16 गायक-गायिकाएं रवींद्रनाथ ठाकुर और काज़ी नज़रुल इस्लाम की कालजयी रचनाओं एवं स्वरबद्ध गीतों के माध्यम से उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करेंगे।
भिलाई के कलाकारों में संचयिता राय, चैताली पाल, अनिता मुखर्जी, सुचिता मुखर्जी, सुमिता डे, महुआ भौमिक, आल्पना तालुकदार, बनानी विश्वास, संगीता चटर्जी, प्रतिमा दरीपा, सोमा राय, भाश्वती बोस, श्रावणी दास, सुतापा पात्र, रनबीर पाल एवं मणिमय मुखर्जी शामिल हैं।
भिलाई के इन कलाकारों की सामूहिक प्रस्तुति छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरती की ओर से रवींद्र-नज़रुल को भावपूर्ण सुरांजलि होगी। रवींद्र संगीत की कोमल भावधारा और नज़रुल गीतों की विद्रोही चेतना का संगम दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण रहेगा।
विशिष्ट विभूतियों का होगा सम्मान
कार्यक्रम में विधायक तरंगज्योति तिवारी सहित अनसूया मुखोपाध्याय, सतीनाथ मुखोपाध्याय, श्रीकांत आचार्य, प्रबुद्ध राहा, सुस्मिता गोस्वामी एवं सुरजीत चट्टोपाध्याय जैसी विशिष्ट विभूतियों को सम्मानित किया जाएगा।
आयोजकों के अनुसार, “सुरेर कैनवासे” का उद्देश्य केवल रवींद्रनाथ और नज़रुल की स्मृतियों को नमन करना नहीं, बल्कि उनकी रचनाओं में निहित मानवता, प्रेम, सौंदर्य, स्वतंत्र चेतना और सामाजिक सरोकारों को संगीत, नृत्य और शब्दों के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। यह आयोजन पूर्वी और मध्य भारत के बांग्ला सांस्कृतिक परिवार को भी एक साझा भाव-सूत्र में जोड़ने का प्रयास है।

रवींद्र के गीतों की आत्मीयता और नज़रुल की ज्वलंत चेतना जब एक ही मंच पर सुरों में गुंथेगी, तब “सुरेर कैनवासे” केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि दो महान कवि-आत्माओं के प्रति संगीत, नृत्य और कला की सामूहिक प्रणति का रूप लेगा।
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