कविता आसपास : तारकनाथ चौधुरी
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• नमक की प्रयोजनीयता

रसोई में रखे मर्तबान से
चुटकियों में नमक लेकर
जब कोई भोजन को सुस्वादु बनाता है
तब नमक की प्रयोजनीयता
जीवन के स्वाद में परिणत हो जाती है।
किसी से कितना मिला जाये कि
संपर्क में मधुरता बनी रहे’–
ये नमक का संतुलित प्रयोग ही
हमें सिखाता है
नमक जब शिराओं में हो तो
तंदुरुस्ती और मुहावरों में हो तो
कसौटी संपर्कों की
डोम की मुट्ठियों में भी
इसकी प्रयोजनीयता कै़द रहती है
चिताओं के दाह की घडी़ में
इनका रिहा होना तय होता है।
जीवन के ढेरों प्रश्नों के उत्तर
मिल जाते हैं-
नमक की प्रयोजनीयता के माध्यम से।

• कवि संपर्क-
• 83494 08210
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chhattisgarhaaspaas
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