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- ‘संधान’ के तत्वावधान में डॉ. भगवती साहू के प्रथम कहानी संग्रह ‘राहगीर’ के विमोचन के अवसर पर डॉ. रमेश अनुपम ने कहा कि- ‘हिंसक हो रहे समाज में रचनाकारों की जिम्मेदारी बढ़ रही है. लेखक अपनी रचनाओं में समाज की विदूपताओं पर गंभीर प्रतिक्रियाओं को शामिल करना चाहिए’
‘संधान’ के तत्वावधान में डॉ. भगवती साहू के प्रथम कहानी संग्रह ‘राहगीर’ के विमोचन के अवसर पर डॉ. रमेश अनुपम ने कहा कि- ‘हिंसक हो रहे समाज में रचनाकारों की जिम्मेदारी बढ़ रही है. लेखक अपनी रचनाओं में समाज की विदूपताओं पर गंभीर प्रतिक्रियाओं को शामिल करना चाहिए’

👉 • ‘राहगीर’ कहानी संग्रह का विमोचन करते हुए अतिथि
• छत्तीसगढ़ आसपास
• भिलाई-दुर्ग
‘संधान जनकल्याण समिति’ के तत्वावधान में बीते दिनों साहित्यकार डॉ. भगवती साहू के प्रथम कहानी संग्रह ‘राहगीर’ का विमोचन सिविक सेंटर स्थित भिलाई निवास इंडियन कॉफ़ी हाउस के सभागार में किया गया.
‘राहगीर’ पुस्तक विमोचन समारोह में साहित्य जगत की जानी-मानी हस्तियों, भाषाविदों और साहित्यप्रेमियों की उपस्थिति रही. कार्यक्रम में साहित्यकारों ने कहानी संग्रह के भाषा शिल्प और सौंदर्य, वैचारिक सरोकारों के साथ ही वर्तमान सामाजिक संदर्भों में उसकी प्रासंगिकता पर सार्थक विचार-विमर्श किया.
‘संधान’ के सचिव शिक्षाविद् प्रो. डॉ. देवेंद्र नाथ शर्मा ने स्वागत वक्तव्य देते हुए कहा कि-

किसी भी रचनाकार के लिए उसकी पहली कृति का विमोचन किसी उत्सव से कम नहीं होता. यह उसकी लेखन यात्रा के प्रमाणीकरण का महत्वपूर्ण क्षण होता है. ‘संधान’ के बारे में प्रकाश डालते हुए बोले कि- ‘संधान’ एक राज्य स्तरीय गैर-शासकीय सामाजिक संगठन है. पूर्व में ‘संधान’ 2004-2007 तक तत्कालीन दुर्ग जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में ‘केयर’ के सौजन्य से महिला व शिशु स्वास्थ्य परियोजनाओं पर सफलतापूर्वक कार्य कर चुका है. दुर्ग,बिलासपुर और रायपुर में बेसलाइन सर्वे तथा इंपेक्ट इ-वल्यूवेशन [Impact Evaluation] जैसे कार्य किए हैं. महासमुंद जिले में ‘वॉटरशेड प्रोजेक्ट’ के मुल्यांकन जैसे कई कार्य किए हैं. 3-4 वर्षों के अंतराल के बाद ‘संधान’ संस्थान को दो वर्ष पूर्व पुन-स्थापित पुनर्गठित किया गया. मुझे विश्वास है कि आप सबका निरंतर सहयोग रचनात्मक गतिविधियों को मिलता रहेगा. हम सब मिलकर जो कुछ भी थोड़ा बहुत कर सकें, करने का प्रयास करेंगे.
डॉ. भगवती साहू ने कहा कि-
‘राहगीर’ में उन्होंने अपने आसपास की घटनाओं को शब्दों में पिरोने का प्रयास किया है. उन्हें विश्वास है कि संग्रह की कहानियां पाठकों के मर्म को अवश्य स्पर्श करेंगी.
छत्तीसगढ़ प्रदेश हिंदी साहित्य सम्मेलन के प्रदेश अध्यक्ष रवि श्रीवास्तव ने कहा कि-

डॉ. भगवती साहू के साहस की सराहना की, उन्होंने अध्यापन के साथ लेखन जारी रखा. संग्रह की प्रथम कहानी ‘गुंजन’ की गूंगी पात्र तथा अंतिम कहानी ‘कल्पना के बदरंग चित्र’ की पात्र हिना के माध्यम से संग्रह की विविधता को रेखांकित किया.
डॉ. अम्बरीष त्रिपाठी ने कहानी संग्रह की भाषा-शैली और वाक्य विन्यास पर समीक्षात्मक टिप्पणी करते हुए कहा कि कल्पनाशीलता में तार्किकता जरूरी है.
कथाकार गुलबीर सिंह भाटिया ने कहा कि-
साहित्यिक समीक्षा केवल प्रशंसा पाने के लिए नहीं, बल्कि कुछ जानने और सीखने के लिए भी होती है.
डॉ. रमेश अनुपम ने मौजूदा सामाजिक परिस्थितियों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि हिंसक हो रहे समाज में रचनाकारों की जिम्मेदारी बढ़ गई है. अपनी रचनाओं में समाज की विदूरुपताओं पर गंभीर प्रतिक्रियाओं को रचनाकार शामिल करना चाहिए.
डॉ. अभिनेष सुराना ने कहा कि- डॉ. भगवती साहू की कहानियों में ग्रामीण परिवेश और शहरी वातावरण का वास्तविक चित्रण देखने को मिलता है.
प्रसिद्ध उपन्यास ‘बस्तर-बस्तर’ के लेखक लोकबाबू ने प्रथम कहानी संग्रह ‘राहगीर’ के लिए डॉ. भगवती साहू को बधाई दी.
सुरेश सिंह परिहार ने ‘राहगीर’ संग्रह से ‘मेहनत की स्याही से लिखी जीवन की इबारत’ का प्रभावपूर्ण वाचन किया.
कार्यक्रम का कुशल संचालन प्रगतिशील कवि शरद कोकास ने किया.

👉 • संचालन शरद कोकास ने किया
इस अवसर पर कथाकार डॉ. भगवती साहू का शॉल, श्रीफल, पुष्पगुच्छ एवं कुंड पादप भेंटकर सम्मान किया गया.
‘राहगीर’ विमोचन के साक्षी आप भी रहे-


प्रख्यात व्यंग्यकार विनोद साव, कवयित्री संतोष झांझी, शुचि ‘भवि’, नीलम जायसवाल, शायर मुमताज, लेखिका डॉ. अंजना श्रीवास्तव, डॉ. रजनी नेलसन, बाल साहित्यकार कमलेश चंद्राकर, नाट्य निर्देशक विभाष उपाध्याय, विजय दिल्लीवार, डॉ. अर्चना झा, टी. सहदेव, दीपक दास, डॉ. रूपमती साहू, शंभू राम साहू, डॉ. मेघा साहू, विनोद साहू, डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’ और डॉ. भगवती साहू के परिवारजन एवं प्रबुद्धजन.
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• विमोचन समारोह की कुछ प्रमुख सचित्र झलकियाँ-

👉 • कथाकार डॉ. भगवती साहू को पुष्प गुच्छ देकर सम्मान करती हुई सुपरिचित कवयित्री शुचि ‘भवि’

👉 • कथाकार लोक बाबू का सम्मान करते हुए पत्रकार दीपक दास

👉 [बाएँ से] • विनोद साव, गुलबीर सिंह भाटिया, प्रो. डीएन शर्मा और डॉ. भगवती साहू

👉 [बाएँ से] • शायर मुमताज, विजय दिल्लीवार वर्तमान, लोक बाबू, प्रो. डीएन शर्मा और डॉ. भगवती साहू



👉 • लेखिका डॉ. रजनी नेलसन ने भी संबोधित किया
[ • रिपोर्ट एवं फोटो संयोजन- डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’ ]
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