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भिलाई इस्पात संयंत्र : जेएलएन चिकित्सालय में नवजात पुनर्जीवन पर राष्ट्रीय IPN-NAP-FGM कार्यशाला आयोजित

👉 • इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स [आईएपी] छत्तीसगढ़ एवं नेशनल नियोनेटोलॉजी फोरम [एनएनएफ] के सहयोग से राष्ट्रीय IAP-NNF-FGM बेसिक नियोनेटल रिससिटेशन प्रोग्राम [एनआरपी]-प्रथम गोल्डन मिनट [एफजीएम] कार्यशाला का शुभारंभ मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. उदय कुमार ने किया

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भिलाई [21 सितम्बर, 2026] : सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं विभाग के अंतर्गत संचालित जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय एवं अनुसंधान केंद्र (जेएलएनएचआरसी), सेक्टर-9, भिलाई में गुणवत्तापूर्ण नवजात देखभाल को सुदृढ़ करने तथा नवजात मृत्यु दर में कमी लाने के उद्देश्य से इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (आईएपी) छत्तीसगढ़ एवं नेशनल नियोनेटोलॉजी फोरम (एनएनएफ) के सहयोग से राष्ट्रीय IAP-NNF-FGM बेसिक नियोनेटल रिससिटेशन प्रोग्राम (एनआरपी)-फर्स्ट गोल्डन मिनट (एफजीएम) कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि मुख्य चिकित्सा अधिकारी (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं) डॉ. उदय कुमार ने किया। विशिष्ट अतिथि के रूप में मुख्य चिकित्सा अधिकारी एवं विभागाध्यक्ष (बाल रोग एवं नवजात शिशु विभाग) डॉ. संबिता पंडा उपस्थित रहीं।

अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (एएपी) के सहयोग से संचालित IAP-NNF फर्स्ट गोल्डन मिनट प्रोजेक्ट के तहत आयोजित इस राष्ट्रीय पहल का उद्देश्य प्रत्येक प्रसव के समय एनआरपी -प्रशिक्षित व्यक्ति की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। कार्यक्रम में महाप्रबंधक (एम एंड एस) श्री संजय शर्मा, महाप्रबंधक (एम एंड एचएस) श्री संजय दवे, अतिरिक्त मुख्य चिकित्सा अधिकारी एवं प्रभारी (एनआईसीयू) डॉ. सुबोध साहा तथा अतिरिक्त मुख्य चिकित्सा अधिकारी एवं विभागाध्यक्ष (प्रसूति एवं स्त्री रोग) डॉ. नीना गुहा ने सहभागिता की।
मुख्य अतिथि डॉ. उदय कुमार ने पहल की सराहना करते हुए कहा कि जन्म के बाद के पहले 60 सेकंड नवजात पुनर्जीवन की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। इस अवधि में त्वरित एवं सही हस्तक्षेप नवजात के जीवनरक्षा में अहम भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि संरचित एवं कौशल-आधारित प्रशिक्षण से स्वास्थ्यकर्मियों की दक्षता बढ़ाने के साथ-साथ रोकथाम योग्य नवजात मृत्यु को कम किया जा सकता है।
मुख्य परामर्शदाता (एम एंड एचएस) एवं छत्तीसगढ़ राज्य शैक्षणिक समन्वयक, बेसिक नियोनेटल रिससिटेशन तथा कार्यशाला समन्वयक डॉ. माला चौधरी ने बताया कि IAP-NNF-FGM कार्यशाला एक संरचित, वस्तुनिष्ठ एवं एल्गोरिथम-आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम है जिसमें राष्ट्रव्यापी रूप से निर्धारित चरणों का क्रमबद्ध पालन किया जाता है। प्रतिभागियों के पुनर्जीवन कौशल का मूल्यांकन परफॉर्मेंस चेकलिस्ट (पीसीइएल) तथा परफॉर्मेंस इवैल्यूएशन टेस्ट (पीईटी) के माध्यम से किया जाता है।
कार्यशाला में कुल 24 प्रतिभागियों ने भाग लिया। इनमें बाल रोग एवं प्रसूति विभाग के पोस्ट ग्रेजुएट रेजिडेंट डॉक्टर, लेबर रूम एवं मैटरनिटी नर्स तथा अपोलो कॉलेज ऑफ नर्सिंग एवं श्री शंकराचार्य इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज की नर्सिंग छात्राएं शामिल थीं। प्रतिभागियों को जन्म के बाद शुरुआती 60 सेकंड में प्रभावी नवजात पुनर्जीवन के लिए हैंड्स-ऑन कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया गया। कार्यशाला का आयोजन राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप ऑफलाइन मैनिकिन-आधारित कौशल प्रशिक्षण, वीडियो प्रदर्शन एवं व्यावहारिक मूल्यांकन के माध्यम से किया गया। कार्यशाला में पूर्व अनिवार्य ऑनलाइन मॉड्यूल एवं प्री-टेस्ट पूरा कर चुके प्रतिभागियों ने ऑफलाइन प्रशिक्षण में भाग लिया था।
विशेषज्ञ संकाय में निदेशक (स्पर्श मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल, रायपुर) डॉ. ए. पी. सावंत एवं प्रोफेसर (श्री शंकराचार्य इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, भिलाई) डॉ. ज्ञानेश मिश्रा शामिल थे। आईएपी-एनएनएफ राज्य समन्वयक, (जेएनएम मेडिकल कॉलेज, रायपुर) डॉ. आकाश लालवानी द्वारा राज्य-स्तरीय नेतृत्व प्रदान किया गया। कार्यशाला के आयोजन में उप प्रबंधक (नर्सिंग प्रशासन) श्रीमती शायला अब्राहम तथा सहायक प्रबंधक (आपातकालीन सेवाएं) श्रीमती लता मिश्रा ने सहयोग प्रदान किया।
नेशनल नियोनेटोलॉजी फोरम (एनएनपीडी) नेटवर्क के अनुसार, पेरिनेटल एस्फिक्सिया भारत में लगभग 20 प्रतिशत नवजात मृत्यु का कारण है। जन्म के समय लगभग 10 प्रतिशत नवजातों को सांस लेने में सहायता तथा लगभग 1 प्रतिशत को गहन पुनर्जीवन की आवश्यकता होती है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी NFHS-5 फैक्टशीट के अनुसार, भारत में नवजात मृत्यु दर 18 प्रति 1,000 जीवित जन्म है, जबकि छत्तीसगढ़ में यह दर 26 प्रति 1,000 जीवित जन्म दर्ज की गई है। यह स्थिति छत्तीसगढ़ में नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने तथा इस दिशा में लक्षित और प्राथमिकता-आधारित प्रयासों की आवश्यकता को रेखांकित करती है। फर्स्ट गोल्डन मिनट प्रोजेक्ट एक राष्ट्रीय पहल है। आईएपी-एनएनएफ ने प्रत्येक मेडिकल कॉलेज एवं समर्पित बर्थ कॉर्नर वाले संस्थानों में इस कार्यक्रम के नियमित आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया है।

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