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मानसून में घर की सीलन बन सकती है सेहत की दुश्मन, इन 5 परेशानियों का बढ़ सकता है खतरा

LIFESTYLE NEWS: मानसून के दौरान लगातार बारिश से मौसम सुहाना जरूर हो जाता है, लेकिन घर के अंदर बढ़ती नमी कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकती है। बंद कमरों, गीली दीवारों, छत से रिसाव और कम वेंटिलेशन वाली जगहों पर फफूंद तेजी से पनप सकती है। यही फफूंद हवा में मौजूद होकर सांस और त्वचा से जुड़ी परेशानियों का कारण बन सकती है।
अगर आपके घर में भी बारिश के दिनों में सीलन की गंध आती है, दीवारों पर काले-हरे निशान दिखाई देते हैं या पेंट उखड़ने लगा है, तो इसे सिर्फ घर की खराब हालत समझकर नजरअंदाज न करें। लंबे समय तक ऐसे वातावरण में रहने से खासकर बच्चों, बुजुर्गों और एलर्जी या सांस संबंधी परेशानी वाले लोगों को दिक्कत हो सकती है।
1. एलर्जी और नाक से जुड़ी परेशानी
नमी वाली जगहों पर पनपने वाली फफूंद के छोटे कण हवा में मिल सकते हैं। इनके संपर्क में आने से छींक, नाक बहना, नाक बंद होना, आंखों में खुजली और पानी आने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। जिन लोगों को पहले से किसी तरह की एलर्जी है, उनमें परेशानी ज्यादा बढ़ सकती है।
2. अस्थमा के मरीज रहें सावधान
सीलन और फफूंद अस्थमा से पीड़ित लोगों के लिए परेशानी बढ़ाने वाले कारक हो सकते हैं। ऐसे वातावरण में रहने से खांसी, सांस फूलना और घरघराहट जैसी शिकायतें बढ़ सकती हैं। इसलिए अस्थमा के मरीजों को घर के अंदर नमी और फफूंद को नियंत्रित रखना चाहिए।
3. सांस लेने में परेशानी
लगातार नम और बंद वातावरण में रहने से श्वसन तंत्र पर असर पड़ सकता है। फफूंद और दूसरे जलन पैदा करने वाले कण सांस के साथ शरीर में पहुंचकर खांसी या सांस लेने में असहजता जैसी समस्या पैदा कर सकते हैं। छोटे बच्चों और पहले से सांस की बीमारी से परेशान लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
4. लंबे समय तक खांसी और ब्रोंकाइटिस जैसे लक्षण
घर में मौजूद फफूंद से निकलने वाले कण गले और सांस की नली में जलन पैदा कर सकते हैं। इसकी वजह से लगातार खांसी, गले में खराश या सांस लेने में परेशानी महसूस हो सकती है। अगर खांसी लंबे समय तक बनी रहे या बढ़ती जाए, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
5. त्वचा में खुजली और जलन
अधिक नमी वाले वातावरण में कुछ लोगों को त्वचा संबंधी परेशानी भी हो सकती है। फफूंद के संपर्क में आने से खुजली, लालिमा या त्वचा में जलन महसूस हो सकती है। संवेदनशील त्वचा या एलर्जी वाले लोगों में ऐसी समस्या ज्यादा दिखाई दे सकती है।
घर को सीलन और फफूंद से कैसे बचाएं?
बारिश के मौसम में घर की नमी को नियंत्रित रखना बेहद जरूरी है। दीवार, छत, खिड़की या पाइप से पानी का रिसाव हो रहा है तो उसे जल्द ठीक करवाएं। कमरों में हवा का पर्याप्त आवागमन रखें और गीले कपड़ों या सामान को लंबे समय तक घर के अंदर न रखें।
जहां संभव हो, घर की अंदरूनी नमी को करीब 50 प्रतिशत से नीचे रखने की कोशिश करें। जरूरत के अनुसार एयर कंडीशनर या डीह्यूमिडिफायर की मदद भी ली जा सकती है।
अगर दीवारों, फर्नीचर या दूसरे हिस्सों पर फफूंद दिखाई दे रही है, तो सिर्फ उस जगह पर पेंट या दूसरा कवर लगाने के बजाय पहले नमी की वजह का पता लगाना जरूरी है। फफूंद ज्यादा फैल गई हो या घर में किसी व्यक्ति को लगातार सांस लेने में परेशानी हो रही हो, तो विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर रहेगा।
छोटी सीलन को न करें नजरअंदाज
मानसून में घर की साफ-सफाई के साथ-साथ नमी पर ध्यान देना भी जरूरी है। समय रहते लीकेज ठीक करना, कमरे में हवा का आवागमन बनाए रखना और फफूंद को नियंत्रित करना घर के वातावरण को बेहतर रखने में मदद कर सकता है।
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