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विरोध : भारतीय मजदूर संघ [बीएमएस] ने स्टील अथारिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड में संविदा कर्मियों की संख्या में 40% कटोती के निर्देश का कड़ा विरोध किया

👉 • ‘बीएमएस’ की औद्योगिक इकाई भारतीय इस्पात मजदूर महासंघ के महामंत्री रंजय कुमार ने ‘सेल’ प्रबंधन को पत्र लिखकर कहा कि “इस निर्णय को तत्काल वापस लें, श्रमिकों से जुड़े किसी भी आदेश या नीतिगत बदलाव को ट्रेड यूनियन से पूर्व चर्चा किए बिना लागू करना हजारों श्रमिकों में भय एवं असुरक्षा का वातावरण पैदा करता है”

भारत के सबसे बड़े श्रमिक संगठन भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) ने राष्ट्र निर्माण एवं श्रम सुधारों में सदैव महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसी क्रम में बीएमएस की औद्योगिक इकाई भारतीय इस्पात मजदूर महासंघ ने स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) में संविदा कर्मियों की संख्या में 40% कटौती के निर्देश का कड़ा विरोध किया है।
महासंघ के महामंत्री रंजय कुमार (सदस्य – केंद्रीय ठेका श्रम सलाहकार बोर्ड, भारत सरकार) ने इस संबंध में उच्च प्रबंधन को पत्र लिखकर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इस निर्णय को तत्काल वापस लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि श्रमिकों से जुड़े किसी भी आदेश या नीतिगत बदलाव को ट्रेड यूनियन से पूर्व चर्चा किए बिना लागू करना हजारों श्रमिकों में भय एवं असुरक्षा का वातावरण पैदा करता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की स्थापना का मूल उद्देश्य केवल लाभ कमाना नहीं, बल्कि रोजगार सृजन और क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास को सुनिश्चित करना है। ऐसे में हजारों श्रमिकों की आजीविका को प्रभावित करने वाला यह निर्णय एक आदर्श नियोक्ता के सिद्धांतों के विपरीत है।
महासंघ ने यह भी चेताया कि संविदा कर्मियों की संख्या में 40% कटौती से संयंत्र की सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ेगा। शेष श्रमिकों पर कार्यभार बढ़ने से थकानजनित दुर्घटनाओं, उपकरणों के दुरुपयोग एवं उत्पादन में गिरावट की आशंका है, जिससे दीर्घकाल में कंपनी को अधिक नुकसान हो सकता है।
संभावित छंटनी से स्थानीय अर्थव्यवस्था, छोटे व्यवसायों और श्रमिक परिवारों पर व्यापक नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
महासंघ ने प्रबंधन को सुझाव दिया है कि वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए श्रमिकों की छंटनी के बजाय—
अनावश्यक प्रशासनिक खर्चों, यात्रा एवं सलाहकार शुल्क में कटौती की जाए
सतर्कता एवं जवाबदेही तंत्र को मजबूत किया जाए
उच्च मूल्य निविदाओं में अनियमितताओं एवं चोरी पर रोक लगाई जाए
ऊर्जा दक्षता अभियान चलाकर बिजली एवं ईंधन की खपत कम की जाए
स्लैग, स्क्रैप एवं अन्य उप-उत्पादों की आक्रामक बिक्री की जाए
महासंघ ने कहा कि औद्योगिक शांति एवं सामाजिक न्याय बनाए रखने के लिए प्रबंधन को संतुलित निर्णय लेना चाहिए।
यदि शीघ्र ही इस “तुगलकी फरमान” को वापस नहीं लिया गया, तो भारतीय इस्पात मजदूर महासंघ देशव्यापी चरणबद्ध आंदोलन—सड़क से संसद तक—करने के लिए बाध्य होगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी इस्पात प्रबंधन की होगी।
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