- Home
- Chhattisgarh
- राष्ट्रीय संस्था ‘समरस संस्थान साहित्य सृजन भारत’ छत्तीसगढ़ जिला-दुर्ग इकाई गठित : राजकुमार भल्ला ‘आर्य’ अध्यक्ष बने और प्रगतिशील जन-विचारधारा की साहित्यिक संस्था ‘आरंभ’ के अध्यक्ष प्रदीप भट्टाचार्य को सर्वसम्मति से सचिव बनाया गया
राष्ट्रीय संस्था ‘समरस संस्थान साहित्य सृजन भारत’ छत्तीसगढ़ जिला-दुर्ग इकाई गठित : राजकुमार भल्ला ‘आर्य’ अध्यक्ष बने और प्रगतिशील जन-विचारधारा की साहित्यिक संस्था ‘आरंभ’ के अध्यक्ष प्रदीप भट्टाचार्य को सर्वसम्मति से सचिव बनाया गया

• छत्तीसगढ़ आसपास
• जिला-दुर्ग भिलाई
राष्ट्रीय पंजीकृत संस्था ‘समरस संस्थान साहित्य सृजन भारत’ के राष्ट्रीय संस्थापक व संयोजक डॉ. मुकेश कुमार व्यास ‘स्नेहिल’ के दिशा-निर्देश पर छत्तीसगढ़ यूनिट के राज्य प्रभारी एवं राष्ट्रीय संगठन मंत्री डॉ. गणेश हरिहारनो ‘दीप’, छत्तीसगढ़ राज्य इकाई के अध्यक्ष अखिलेश्वर मिश्रा ‘अकाट्य’ एवं राज्य उपाध्यक्ष हरिप्रकाश गुप्ता ‘सरल’ के मार्गदर्शन में जिला-दुर्ग इकाई का गठन बीते दिनों भिलाई के स्मृति नगर स्थित ‘होटल गौरी इन’ में किया गया.

‘समरस संस्थान साहित्य सृजन भारत’ जिला-दुर्ग की नवगठित इकाई छत्तीसगढ़ राज्य महिला प्रकोष्ठ की महामंत्री श्रीमती सोनिया नायडू और प्रदेश उपाध्यक्ष हरिप्रकाश गुप्ता ‘सरल’ की उपस्थिति में किया गया. राजकुमार भल्ला ‘आर्य’ [अध्यक्ष] डॉ. रचना पाण्डेय [उपाध्यक्ष] प्रदीप भट्टाचार्य [सचिव] एनएल मौर्य ‘प्रीतम’ [कोषाध्यक्ष] ओमप्रकाश जायसवाल [संगठन सचिव] अजय निदान कन्नूकर [प्रचार-प्रसार सचिव] नमित क्षत्रिय [मीडिया प्रभारी] कार्यका रिणी सदस्य- सुरभि ताम्रकर ‘शावि’, एसडी गोयल, ए. विजयलक्ष्मी और संरक्षक- डॉ. संध्या श्रीवास्तव, मनीष श्रीवास्तव, नितिन गोस्वामी, सीता गुप्ता.
ज्ञात हो कि ‘समरस संस्थान साहित्य सृजन भारत’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. शशि जैन ‘चन्द्रिका’ और छत्तीसगढ़ राज्य महिला प्रकोष्ठ की अध्यक्षा श्रीमती गायत्री साहू ‘शिवांगी’ हैं.


बीते दिनों [होटल गौरी इन] 13 मई, 2026 को नवगठित सदस्यों का परिचय बैठक प्रदेश उपाध्यक्ष हरिप्रकाश गुप्ता ‘ सरल’ की अध्यक्षता और प्रदेश महिला प्रकोष्ठ की महामंत्री सोनिया नायडू की विशेष उपस्थिति में हुई.

👉 {बाएँ से} • राजकुमार भल्ला ‘आर्य’, हरिप्रकाश गुप्ता ‘सरल’ और प्रदीप भट्टाचार्य
इस अवसर पर ‘सरल’ ने संस्था के बारे में बताया कि-
‘समरस संस्थान साहित्य सृजन भारत’ एक राष्ट्रीय पंजीकृत समिति है. इसका मुख्य केंद्रीय कार्यालय गुजरात में हैं. देश-प्रदेशों एवं जिलों में इसकी इकाई तेजी से बढ़ रही है. इसी कड़ी में जिला-दुर्ग इकाई का गठन किया गया है. हमारी संस्था साहित्य की मुख्यधारा से जुड़कर अन्य समाजसेवा का भी कार्य कर रही है. ऑनलाइन गूगल मीट आभासी कवि सम्मेलन समय-समय पर किया जा रहा है. छत्तीसगढ़ में इकाई के गठन के बाद 12 मई, 2026 को हमने “चिड़ियों के लिए दाना-पानी व सकोरा अभियान” शीर्षक पर काव्य पाठ किया था और अब 19 मई, 2026 को विषय- “रक्तदान महादान थैलेसीमिया बच्चों का जीवन दान” पर गूगल मीट के माध्यम से काव्य पाठ रखा गया है. सर्वश्रेष्ठ रचनाओं को पुरस्कृत कर सम्मानित भी किया जाएगा. आगामी 24 मई, 2026 को राजनांदगांव में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में गठित इकाई का शपथ ग्रहण समारोह रखा गया है. इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय संस्थापक गुजरात से डॉ. मुकेश कुमार व्यास ‘स्नेहिल’ उपस्थित रहेंगे.

👉 {बाएँ से-बैठे हुए} • प्रदीप भट्टाचार्य, हरिप्रकाश गुप्ता ‘सरल’, राजकुमार भल्ला ‘आर्य’ और एनएल मौर्य ‘प्रीतम’ {बाएँ से खड़े हुए} • सुरभि ताम्रकर ‘शावि’, अजय निदान, टीआर कोशरिया ‘अलकहरा’, डॉ. संध्या श्रीवास्तव और सोनिया नायडू
उद्बोधन के पश्चात सभी सदस्यों ने अपना-अपना परिचय देते हुए, एक-एक प्रतिनिधि रचना का पाठ किया-
गिरगिट को रश्क है, कोई नाम चुरा लिया/हम भूखे मर रहे हैं, कोई काम चुरा लिया/पहचानना बहुत मुश्किल है, ये रंग बदलते लोग/बदनाम रहे हैं हम, कोई पहचान चुरा लिया…
– टीआर कोशरिया ‘अलकरहा’
मैं आसमां हूँ ‘प्रीतम’ दुनिया क्या झुकायेगी/मैं तो हमेशा झुका ही रहता हूँ…
– एनएल मौर्य ‘प्रीतम’
साँसों से अपनी/मेरी सांसो में तुम घुल जाओ न…
मुरझा गया मेरे प्रीत का पौधा…
– सोनिया नायडू
कविताएं मेरी हथेली पर, मेहंदी सी रचने लगी है आजकल/पिता पर लिखी कविता भाग्य रेखा/माँ पर लिखी कविता लक्ष्य रेखा है/मेरी प्रेम पर लिखी कविता मस्तिष्क रेखा लगती है/और समाज पर लिखी कविता जीवन-रेखा सी लगती है…
– सुरभि ताम्रकर ‘शावि’
हर शख्स ने पूछा, हादसा कैसे हुआ? दास्तां सुना-सुनाकर हर जख्म ताज़ा हो गया…
– अजय निदान
ये जीवन बड़ा ही मायाजाल है/फस के रह गया जो, बुरा उसका हाल है…
– हरिप्रकाश ‘सरल’
जंगल-जंगल के गालों में/पुष्प पलाश खिल जाते हैं/अमसतास के झूमर पीले, मन के हर ले जाते हैं/हरियाले आम बौराते हैं/तरबूजे रसघट भर ले आते हैं/तब कटु नीम की छाया में भी, मीठे अहसास पनप जाते हैं…
– डॉ. संध्या श्रीवास्तव
मैं फूल हूँ मुस्कुराता हूँ…
– राजकुमार भल्ला ‘आर्य’
अंत में प्रदीप भट्टाचार्य ने मुक्तक कविताओं के माध्यम से समय, समाज और जीवन से जुड़े छोटे-छोटे प्रसंगों को व्यापक संदर्भ से जोड़कर कविता पढ़ी-
“जीवन में छोटी-छोटी पगडंडियाँ भी बहुत दूर तक ले जाती हैं/शर्त एक है, हम पगडंडियों का साथ न छोड़े/जहाँ आगे का रास्ता न हो, वहाँ एक नया रास्ता जोड़ें…”
– प्रदीप भट्टाचार्य

आभार व्यक्त नवनियुक्त अध्यक्ष व कवि राजकुमार भल्ला ‘आर्य’ ने किया.
🟥🟥🟥
chhattisgarhaaspaas
विज्ञापन (Advertisement)