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बांग्ला साहित्यिक ‘बंगीय साहित्य संस्था’ ने कॉफी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श आड्डा-125 में विश्वगुरु कवि रवींद्रनाथ टैगोर का 165वीं जयंती मनाई

👉 [नोबेल पुरस्कार प्राप्त गीत, ज्ञान और मानवता के कवि टैगोर की 165वीं जयंती में शामिल हुए] • बानी चक्रवर्ती, स्मृति दत्त, दीपाली दासगुप्त, दुलाल समाद्दार, शुभेंदु बागची, प्रकाशचंद्र मण्डल, पल्लव चटर्जी, प्रदीप भट्टाचार्य, वीरेंद्रनाथ सरकार, सोमाली शर्मा, जीबोन हालदार, विपुल सेन, सुजॉशा सेन, ममता सरकार, देवाशीष मुखर्जी, सुबीर रॉय, कृष्णचंद्र रॉय, रविंद्रनाथ देबनाथ, धुर्व मजूमदार और बेबी इशिता शील


• छत्तीसगढ़ आसपास
• छत्तीसगढ़ [भिलाई-दुर्ग]
‘बंगीय साहित्य संस्था’ की नींव अंतर्राष्ट्रीय बांग्ला कवि स्व. शिबव्रत देवानजी और लब्धप्रतिष्ठत लेखक डॉ. भवानी प्रसाद मुखर्जी ने की थी. विगत 65 वर्षों से इस्पात नगरी भिलाई-दुर्ग में बांग्ला सांस्कृतिक-संस्कृति एवं साहित्य को जीवंत रखी हुई है. संस्था प्रतिमाह साहित्य सभा, प्रति सप्ताह आड्डा, वार्षिक साहित्य उत्सव आयोजन के साथ-साथ बांग्ला भाषा में प्रकाशित मासिक बुलेटिन और ”मध्यबलय’ पत्रिका का निरंतर प्रकाशन कर रही है. ”मध्यबलय’ के संपादक बांग्ला के सुप्रसिद्ध कवि दुलाल समाद्दार हैं.
‘बंगीय साहित्य संस्था’ की वर्तमान सभापति बांग्ला की देशव्यापी कवयित्री बानी चक्रवर्ती और उप सभापति द्वय बांग्ला की चर्चित कवयित्री स्मृति दत्त, दीपाली दासगुप्त हैं. महासचिव शुभेंदु बागची और उप सचिव प्रकाशचंद्र मण्डल हैं. कोषाध्यक्ष पल्लव चटर्जी हैं.
आज की विचार गोष्ठी की शुरुआत विश्व प्रसिद्ध काव्य रचना ‘गीतांजलि’ के रचियता रवींद्रनाथ टैगोर के तैल चित्र में पुष्पांजलि और दीप प्रज्ज्वलित कर की गई. सभी सदस्यों ने गुरुदेव की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की और सुजॉशा सेन ने गुरुदेव कवि का स्मरण कर गायन प्रस्तुत किया गया.
इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही सभापति बानी चक्रवर्ती ने कहा कि-

भारत रत्न रवींद्रनाथ टैगोर का जन्म 7 मई, 1861 को कोलकाता के जोड़ासांको ठाकुरबाड़ी में हुआ था. बंगाली परंपरा के अनुसार उनकी जयंती बैशाख माह के 25वें दिन को मनाई जाती है. टैगोर का जन्म एक ऐसे परिवार में हुआ था जो साहित्य, कला और सामाजिक चेतना का केंद्र था. उनकी रचनात्मक को सम्मान मिला और विश्व कवि नाम से जाने जाने लगे. 1913 में ‘गीतांजलि’ काव्य रचना के लिए साहित्य का नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस सम्मान को प्राप्त करने वाले पहले गैर यूरोपीय बनें. रवींद्रनाथ टैगोर की सबसे विशिष्ट पहचान इनकी रचनाएं दो देशों की राष्ट्रगान बनी. भारत में ‘जन गण मन…’ और बांग्लादेश में ‘आमार सोनार बांग्ला…’ इनके पिता का नाम देवेंद्रनाथ टैगोर, एक महान दार्शनिक और समाज सुधारक थे. सन् 1941 में उनका निधन हुआ. प्रमुख कृतियाँ- ‘गीतांजलि’,’गोरा’, ‘घरे-बाइर’, ‘काबुलीवाला’ और ‘डाकघर’. इसके अलावा उन्होंने हजारों गीतों की रचना की, जिन्हें ‘रवींद्र संगीत’ के नाम से जाना जाता है. आज इनकी जयंती पर शत् शत् नमन.
इस अवसर पर उपस्थित सदस्यों सुजॉशा सेन, ममता सरकार, सोमाली शर्मा, विपुल सेन, जीबोन हालदार, वीरेंद्रनाथ सरकार, पल्लव चटर्जी, देवाशीष मुखर्जी, दुलाल समाद्दार, बानी चक्रवर्ती, शुभेंदु बागची,स्मृति दत्त, प्रकाशचंद्र मण्डल और दीपाली दासगुप्त ने अपने-अपने शब्दों में रवींद्रनाथ टैगोर को श्रद्धांजलि देते हुए उनके योगदानों की व्याख्या की. टैगोर जी की कविताओं को भी सदस्यों ने पढ़ा. बेबी इशिता शील ने हेमंत मुखर्जी का लोकप्रिय बांग्ला गीत अपनी मधुर स्वर में गाकर सुनाया. गीत था- “पुरोनो सेई दिनर कथा…” उपस्थित सदस्य बेबी इशिता के कंठ से गीत सुनकर भाव विभोर हो गए.

👉 • विचारवान कवि वीरेंद्रनाथ सरकार, रवींद्रनाथ टैगोर पर अपनी बात रखते हुए…

👉 • बेबी इशिता शील ने बांग्ला में गीत गाया…

👉 • दुलाल समाद्दार और प्रकाशचंद्र मण्डल, रवींद्रनाथ टैगोर को समर्पित रचना का पाठ किया…
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आभार-
अंतरराष्ट्रीय प्रवासी बंगाली सांस्कृतिक एवं समाज कल्याण सोसायटी ‘पुबेर हाओआ’ के अध्यक्ष, वेब पत्रिका ‘दण्डक अरणि’ के संपादक और ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के महासचिव ग़ज़लकार-कवि शुभेंदु बागची ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि-

“रवींद्रनाथ टैगोर का दृष्टिकोण केवल साहित्य और संगीत तक सीमित नहीं था, बल्कि वे एक महान शिक्षाविद् और दार्शनिक भी थे. उन्होंने ‘शांति निकेतन’ की स्थापना इस उद्देश्य से की थी कि शिक्षा प्रकृति के सानिध्य में दी जाए और विद्यार्थियों को स्वतंत्र रूप से सोचने और सीखने का अवसर मिले. टैगोर द्वारा स्थापित यही संस्थान ‘विश्व भारती विश्वविद्यालय’ बना. टैगोर की रचनाएं, विचार आज भी हमें बेहतर मनुष्य बनने की ओर प्रेरित करती है.”
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रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती पर आड्डा-125 की कुछ और झलकियाँ-

👉 • कवयित्री सुजॉशा सेन और प्रदीप भट्टाचार्य, रवींद्रनाथ टैगोर को पुष्प अर्पित करते हुए…

👉 • शुभेंदु बागची, वीरेंद्रनाथ सरकार और जीबोन हालदार, रवींद्रनाथ टैगोर को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए…

👉 • ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के सक्रिय सदस्य

👉 [बाएँ से] • स्मृति दत्त, बानी चक्रवर्ती, सुजॉशा सेन, बेबी इशिता शील, दीपाली दासगुप्त, सोमाली शर्मा और ममता सरकार

👉 • दीपाली दासगुप्त और देवाशीष मुखर्जी, रवींद्रनाथ टैगोर का स्मरण करते हुए कविता पाठ किए…

👉 • रवींद्रनाथ टैगोर को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के सदस्य…
आज के कार्यक्रम की सभापति थीं ‘बंगीय साहित्य संस्था’ की अध्यक्ष बानी चक्रवर्ती और संचालन उप सचिव प्रकाशचंद्र मण्डल ने किया. आभार व्यक्त शुभेंदु बागची ने दिया.
[ • प्रस्तुति,रपट परिकल्पना एवं फोटो संयोजन- प्रगतिशील जन-विचारधारा की साहित्यिक संस्था ‘आरंभ’ के अध्यक्ष प्रदीप भट्टाचार्य ]
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