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कीर्तिशेष सम्मान : स्व. राम मोहनन की स्मृति में इस वर्ष कीर्तिशेष सम्मान-2026 प्रख्यात पंडवानी लोक गायिका पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई को मरणोपरांत दिया गया

• छत्तीसगढ़ आसपास
• जिला-दुर्ग
[गनियारी तीजन बाई के निवास से 26 जुलाई, 2026] प्रति वर्ष स्व. राम मोहनन की स्मृति में दिया जाने वाला छत्तीसगढ़ राज्य का प्रतिष्ठित सम्मान इस वर्ष प्रख्यात पंडवानी लोक गायिका पद्म विभूषण को मरणोपरांत उनके निवास [गृह ग्राम- गनियारी] में दिया गया. कीर्तिशेष सम्मान के तहत शॉल, श्रीफल, मोती की माला, स्मृति चिन्ह, प्रशस्ति पत्र और 10,001.00रु. की नगद राशि दी जाती है.

विदित हो कि कीर्तिशेष सम्मान निर्णायक समिति के सलाहकार मंडल के सदस्य प्रो. डीएन शर्मा, शिक्षाविद् डॉ. हंसा शुक्ला एवं पत्रकार-कवि प्रदीप भट्टाचार्य ने 4 जुलाई, 2026 को यह सम्मान डॉ. तीजन बाई को देने का निर्णय लिया था, इस बीच 5, जुलाई को खबर आती है कि पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई हमारे बीच नहीं रही. और अब यह सम्मान सलाहकार मंडल की सहमति से 26 जुलाई को उनके गृह ग्राम- गनियारी में स-सम्मान स्व. राम मोहनन कीर्तिशेष स्मृति समिति की अध्यक्ष शानू मोहनन के नेतृत्व में एक प्रतिनिधि मंडल ने उनके परिवार को मरणोपरांत प्रदान किया.
‘अखिल भारतीय उत्कृष्ट बहुउद्देशीय संस्था’ की संस्थापक एवं स्व. राम मोहनन कीर्तिशेष स्मृति सम्मान की संयोजिका व स्व. राम मोहनन की धर्मपत्नी शानू मोहनन ‘अम्मा’ के नेतृत्व में राजीव बी.अस्थाना, संगीता अस्थाना, अभिलाषा मिश्रा, ए. विजय लक्ष्मी और स्व. तीजन बाई परिवार की तरफ से बहू वेणु देशमुख, बेटा दिलहरण पारधी, सावित्री पारधी, निशा पारधी, मनीषा पारधी, बुधराम ठाकुर, प्रेमा ठाकुर, मीना विश्वकर्मा, आयुष वर्मा, विवान पारधी, जास्मिन पारधी और ग्रामवासी उपस्थित थे.
इस पारिवारिक आत्मीय सम्मान समारोह में शानू मोहनन ने स्व. तीजन बाई के सम्पूर्ण जीवनी पर प्रकाश डालते हुए कहा-

पद्मश्री {1988} पद्म भूषण {2003} पद्म विभूषण {2019} संगीत नाटक अकादमी सम्मान {1995} फुकुओका पुरुस्कार {2018} और बिलासपुर रविशंकर एवं खैरागढ़ विश्वविद्यालय से डी. लिट्. की मानद उपाधि से सम्मानित पंडवानी को अमर कर तीजन बाई 5, जुलाई को अंतिम सांस ली. तीजन बाई का जन्म 24 अप्रैल, 1956 को हुआ था. तंबूरे की थाप से कई दशकों तक भीष्म की प्रतिज्ञा, अर्जुन के गांडीव, द्रोपदी की पीड़ा और कृष्ण के संदेश को अपनी दमदार आवाज़ एवं अनोखी प्रस्तुति से जीवंत कर गई. प्रसिद्ध फ़िल्मकार श्याम बेनेगल ने तीजन बाई को चर्चित धारावाहिक ‘भारत एक खोज’ में मौका दिया. जब भी महाभारत का लोक गायन होगा, तीजन की पंडवानी शैली दोहराई जाएगी. उनके योगदान को हम कभी भूला नहीं पाएंगे. आज उन्हें यह सम्मान देकर हम गौरवान्वित हैं. उनकी कला-साधना को शत् शत् नमन.

प्रशस्ति पत्र का वाचन राजीव बी. अस्थाना ने पढ़ा. वेणु देशमुख ने तीजन बाई द्वारा बताए गए विदेश यात्रा के रोचक बातों को सुनाया. संगीता अस्थाना ने भी कहा कि- ‘तंबूरे की मधुर तान के साथ उनकी आवाज़ लोगों को एक अलग दुनिया में ले जाती थी. तीजन बाई ने विश्व में छत्तीसगढ़ राज्य का गौरव बढ़ाया’. अंत में आभार व्यक्त अभिलाषा मिश्रा ने दिया.
[ • रिपोर्ट- प्रदीप भट्टाचार्य ]
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