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PM मोदी की बात पुतिन-शी तक पहुंचाने वाले सिद्धार्थ बाबू कौन? AIR 15 के बाद भी IAS नहीं, चुना IFS

BRICS 2026: दिल्ली में BRICS सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात ने दुनियाभर का ध्यान खींचा. इस दौरान एक और चेहरा चर्चा में आया, जो पीएम मोदी की बात विदेशी नेताओं तक पहुंचाते हुए नजर आए. ये हैं विदेश मंत्रालय के अधिकारी सिद्धार्थ बाबू. सिद्धार्थ बाबू को अक्सर प्रधानमंत्री मोदी के साथ हाई-लेवल बैठकों और अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों में देखा जाता है.
सिद्धार्थ बाबू की खासियत सिर्फ यह नहीं है कि वह प्रधानमंत्री की महत्वपूर्ण बैठकों का हिस्सा रहते हैं. उनकी कहानी भी काफी दिलचस्प है. उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की, ई-कॉमर्स सेक्टर में काम किया और फिर UPSC की तैयारी का फैसला किया. UPSC में शानदार सफलता हासिल करने के बाद भी उन्होंने IAS की जगह IFS को चुना.
कौन हैं सिद्धार्थ बाबू?
सिद्धार्थ बाबू केरल के कोच्चि से हैं. उनकी शुरुआती पढ़ाई का संबंध सीधे तौर पर डिप्लोमेसी से नहीं था. उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और इसके बाद ई-कॉमर्स सेक्टर में काम भी किया.
सिविल सर्विसेज उनके करियर का शुरुआती लक्ष्य नहीं था. हालांकि, समय के साथ अंतरराष्ट्रीय मामलों और देशों के बीच होने वाली बातचीत में उनकी दिलचस्पी बढ़ती गई. वह यह समझना चाहते थे कि अलग-अलग देश आपस में किस तरह बातचीत करते हैं और मिलकर जटिल समस्याओं का समाधान कैसे निकालते हैं.
धीरे-धीरे ग्लोबल पॉलिटिक्स और अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की भूमिका को समझने की उनकी दिलचस्पी इतनी बढ़ी कि उन्होंने कॉर्पोरेट नौकरी छोड़कर सिविल सर्विसेज की तैयारी करने का फैसला किया.
पहले प्रयास में नहीं मिली सफलता
UPSC सिविल सर्विसेज परीक्षा का सफर सिद्धार्थ बाबू के लिए पहली कोशिश में आसान नहीं रहा. वह अपने पहले प्रयास में परीक्षा पास नहीं कर पाए. लेकिन उन्होंने इसे असफलता मानकर हार नहीं मानी.
उन्होंने अपनी कमियों को समझा और तैयारी के तरीके पर दोबारा काम किया. उन्हें महसूस हुआ कि UPSC जैसी परीक्षा के लिए सिर्फ ज्यादा पढ़ना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि सही रणनीति, टाइम मैनेजमेंट और लगातार फोकस भी जरूरी है.
इसके बाद उन्होंने दूसरे प्रयास के लिए पहले से बेहतर रणनीति के साथ तैयारी शुरू की.
UPSC में हासिल की AIR 15
सिद्धार्थ बाबू ने अपने दूसरे प्रयास में शानदार प्रदर्शन किया. UPSC 2016 की परीक्षा में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 15 हासिल की.
उनका वैकल्पिक विषय इंटरनेशनल रिलेशंस था, जो उनकी अंतरराष्ट्रीय मामलों में बढ़ती दिलचस्पी को भी दर्शाता है.
इतनी शानदार रैंक हासिल करने के बाद उनके सामने IAS समेत प्रतिष्ठित सेवाओं का विकल्प था. लेकिन उन्होंने अपनी रुचि और लक्ष्य के अनुरूप इंडियन फॉरेन सर्विस (IFS) को चुना.
IAS की जगह IFS क्यों चुना?
सिद्धार्थ बाबू की दिलचस्पी शुरुआत से ही अंतरराष्ट्रीय मामलों और कूटनीति में बढ़ती गई थी. इसी वजह से AIR 15 जैसी शानदार रैंक हासिल करने के बावजूद उन्होंने IAS की बजाय IFS को प्राथमिकता दी.
IFS में शामिल होने के बाद उन्होंने डिप्लोमेसी से जुड़ी उन्नत ट्रेनिंग ली. समय के साथ उन्होंने कई भाषाओं में भी दक्षता हासिल की. उनकी भाषा संबंधी क्षमता, शांत स्वभाव और अंतरराष्ट्रीय मामलों की समझ ने उन्हें महत्वपूर्ण राजनयिक जिम्मेदारियों के लिए उपयुक्त बनाया.
पीएम मोदी के साथ अक्सर क्यों नजर आते हैं?
सिद्धार्थ बाबू की इन्हीं क्षमताओं के चलते उन्हें कई संवेदनशील और उच्चस्तरीय राजनयिक बैठकों में अहम भूमिका निभाने का अवसर मिलता है. अंतरराष्ट्रीय नेताओं के साथ होने वाली महत्वपूर्ण बैठकों के दौरान वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ नजर आते हैं.
BRICS 2026 के दौरान पीएम मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात के दौरान भी सिद्धार्थ बाबू दिखाई दिए. वह पीएम मोदी की बात को विदेशी नेताओं तक पहुंचाते हुए नजर आए.
उनकी मौजूदगी ने लोगों का ध्यान इसलिए भी खींचा, क्योंकि प्रधानमंत्री और विदेशी राष्ट्राध्यक्षों के बीच बातचीत में भाषा और संवाद की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है.
अभी विदेश मंत्रालय में संभाल रहे हैं जिम्मेदारी
फिलहाल सिद्धार्थ बाबू विदेश मंत्रालय (MEA) में डिप्टी सेक्रेटरी (यूरोप और अमेरिका) के तौर पर काम कर रहे हैं.
एक मैकेनिकल इंजीनियर से कॉर्पोरेट प्रोफेशनल और फिर UPSC में AIR 15 हासिल करने वाले IFS अधिकारी तक का उनका सफर काफी खास है. खास बात यह है कि उन्होंने अपनी रुचि को करियर की दिशा बनाया और IAS जैसी प्रतिष्ठित सेवा के विकल्प के बावजूद अंतरराष्ट्रीय कूटनीति को चुना.
BRICS जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी मौजूदगी एक बार फिर बताती है कि पर्दे के पीछे काम करने वाले राजनयिक अधिकारी भी भारत की विदेश नीति और वैश्विक संवाद में कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.
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