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गणेशोत्सव पर छत्तीसगढ़ में 700 करोड़ का कारोबार, 50 लाख घरों में विराजेंगे बप्पा, मूर्तियों के दाम 50% तक बढ़े

CG NEWS: गणेश चतुर्थी मंगलवार को है। इस दिन प्रदेश में गणपति विराजमान होंगे। छत्तीसगढ़ में करीब 50 लाख गणपति की प्रतिमाएं घरों में विराजमान होती हैं और 20 हजार से ज्यादा बडे गणपति सार्वजनिक समितियों द्वारा रखे जाते हैं। बाजार में छोटे गणपति के दाम जहां 500 से 7000रुपए तक हैं, वहीं बड़ी गणपति मूर्तियों के दाम 50 हजार से पांच लाख तक हैं। शहरों की सार्वजनिक गणेश समितियों आमतौर पर एक लाख से ज्यादा दाम के ही गणपति रखे जाते हैं। मूर्तिकारों और बड़े कारोबारियों का अनुमान है, राज्य में छोटे गणपति का 500 करोड़ का कारोबार होता है और बड़ी मूर्तियां 200 करोड़ की बिकती हैं। इस बार महंगाई के कारण दाम भी करीब डबल हो गए है।
बीते साल छोटे गणपति दो से तीन सौ में मिल जाते थे, लेकिन इस बार चार सौ रुपए से कम की कीमत की प्रतिमाएं नहीं हैं। गणेश चतुर्थी के लिए राजधानी रायपुर के साथ ही प्रदेश के हर छोटे से लेकर बड़े शहरों में बाजार गुलजार हैं। रायपुर में लगातार गणपति प्रतिमाओं की बिक्री हो रही है। बाजार में भारी भीड़ है। जहां तक रायपुर की बात हैं तो यहां पर घरों में विराजमान किए जाने वाले छोटे गणपति की कीमत एक हजार से 8000 रुपए तक है। इसी के साथ कुछ छोटे गणपति 400 से 500 रुपए में भी बिक रहे हैं।
20 हजार से ज्यादा बड़े गणपति
प्रदेश में करीब 20 हजार गांव हैं। जानकारों के मुताबिक आमतौर पर हर छोटे गांव में एक सार्वजनिक समिति गणपति रखती है। इसी के साथ बड़े गांवों में दो से चार सार्वजनिक समितियों द्वारा गणपति रखा जाता है। बड़े शहरों में इसकी संख्या बहुत ज्यादा है। राजधानी रायपुर में 500 से ज्यादा समितियां बड़े गणपति रखती हैं। बिलासपुर, राजनांदगांव, कोरबा, रायगढ़ सहित बड़े शहरों में भी दो से तीन सौ सार्वजनिक समितियों द्वारा बड़े गणपति रखे जाते हैं। एक अनुमान के मुताबिक प्रदेश में 20 हजार से ज्यादा बड़े गणपति रखे जाते हैं।
इनकी कीमत 50 हजार से लेकर पांच लाख तक है। गांवों और छोटे शहरों में जहां 50 हजार से एक लाख तक के गणपति रखे जाते हैं, वहीं बड़े शहरों में दो से पांच लाख तक वाले गणपति रखे जाते हैं। ऐसे में एक बड़े गणपति की औसत कीमत एक लाख भी मानी जाए तो 20 हजार गणपति के लिए 200 करोड़ होते हैं। श्री बजरंग नवयुवक मित्र मंडल हनुमान मंदिर गोलबाजार गणेशोत्सव समिति के संरक्षक केदारनाथ गुप्ता ने बताया उनकी समिति में तीन लाख रुपए की गणपति की प्रतिमा रखी जा रही है। इसी तरह से शहर की और पमितियों की भी प्रतिमा की कीमत दो से तीन लाख है।
रायपुर में एक लाख छोटी प्रतिमाएं
प्रदेश में छोटे गणपति का ही बड़ा कारोबार होता है। जानकारों के मुताबिक प्रदेश में 50 लाख से ज्यादा घरों में छोटे गणपति विराजमान होते हैं। राजधानी रायपुर में ही करीब एक लाख छोटी गणेश प्रतिमाएं बिकती हैं। औसत कीमत एक हजार मान ले तो इसका 500 करोड़ का कारोबार होता है।
दाम करीब डबल
इस बार गणपति के दाम भी करीब डबल हो गए हैं। आजाद चौक के एक दुकानदार किशोर साहू ने बताया, बीते साल उनकी दुकान में दो सौ रुपए से छोटे गणपति प्रारंभ हो जाते थे, लेकिन इस बार चार सौ रुपए से कम दाम के गणपति संभव ही नहीं हैं। हर साइज के गणपति के दाम 40 से 50 फीसदी बढ़ गए हैं। रंगों से साथ श्रृंगार का सामान भी महंगा हो गया है।
50 वर्ष में पहली बार गणपति स्थापना संग तीज, 9 वर्ष पश्चात गणेशोत्सव 12 दिनों का
चतुर्थी तिथि का प्रारंभ 14 सितंबर को प्रातः काल 7 बजकर 6 मिनट पर होगा और 15 सितंबर को प्रातः काल 7 बजकर 44 पर चतुर्थी तिथि का समापन होगा, इसलिए मध्याह्न व्यापनी चतुर्थी में 14 सितंबर को श्री गणेश जी की स्थापना होगी और इसी के साथ 11 दिवसीय श्री गणेश महोत्सव का शुभारंभ होगा। घरों और पंडालों में गणेश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 10 बजकर 50 मिनट से दोपहर 1 बजकर 18 मिनट तक रहेगा। 25 सितंबर अनंत चतुर्दशी को गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन होगा।
इसके साथ ही हरतालिका तीज भाद्रपद शुक्ल तृतीया का व्रत उदयातिथि के अनुसार 13 और 14 सितम्बर को स्पर्श कर रहा है। तृतीया तिथि का प्रारम्भ 13 सितम्बर रविवार को प्रातः 7:08 बजे से हो चुका है। तृतीया तिथि का समापन 14 सितम्बर सोमवार को प्रातः 7:06 बजे होगा। तृतीया तिथि यदि द्वितीया से युक्त हो तो ग्राह्य नहीं होती है। चतुर्थी से युक्त तृतीया को ही उत्तम एवं शुद्ध माना गया है। 13 सितम्बर को सूर्योदय के समय द्वितीया तिथि विद्यमान थी।
तृतीया तिथि रविवार को सुबह 7:08 बजे से प्रारम्भ हुई, इसलिए 13 सितम्बर की तृतीया तिथि द्वितीया युक्त थी। यही कारण है कि सोमवार की तृतीया तिथि को ही व्रत के लिए शुभकारी है और आज ही गणेश स्थापना के साथ तीज व्रत रखा जाएगा। इसके पूर्व 1976 में ऐसा संयोग निर्मित हुआ था, जब तीज व गणेश चतुर्थी एक ही दिन मनाई गई।
नवपंचम राजयोग दिलाएंगे सफलता
वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस वर्ष गणेश चतुर्थी पर कई तरह के शुभ योगों का निर्माण हो रहा है। इस बार 14 सितंबर से गणेश उत्सव के दौरान मालव्य, भद्र योग से लेकर हंस राजयोग और रवि योग का निर्माण हो रहा है। वहीं बुध और अरुण के संयोग से नवपंचम राजयोग का निर्माण हो रहा है। ये पंचयोग सभी तरह के कार्यों में शुभफल प्रदान करने वाले सिद्ध होंगे। चतुर्थी तिथि दो दिन, इसलिए गणेशोत्सव 12 दिनों का Nगणेशोत्सव 10 दिनों का होता है, 11वें दिन प्रतिमा विसर्जित की जाती है।
गणेशोत्सव भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी (गणेश चतुर्थी) से शुरू होकर अनंत चतुर्दशी (गणेश विसर्जन) तक चलता है। इस साल भगवान गणेश की स्थापना 14 सितंबर को हो रही है। वहीं, बप्पा का अंतिम विसर्जन यानी अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर को है। पंचांग के अनुसार, तिथियों के घटने-बढ़ने (तिथि वृद्धि) की वजह से भक्तों को बप्पा की सेवा और आराधना करने के लिए इस बार सामान्य से अधिक दिन मिल रहे हैं। ऐसा दुर्लभ महासंयोग पूरे 9 साल बाद बना है। चतुर्थी तिथि के लंबे होने (तिथि वृद्धि) के कारण इस वर्ष गणपति आराधना के लिए एक दिन अधिक मिलेगा।
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