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आत्मानंद स्कूलों में LKG शुरू करने का हाईकोर्ट का आदेश, पालकों की याचिका पर सरकार को 4 हफ्ते की मोहलत

बिलासपुर। प्रदेश के स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में प्री-प्राइमरी शिक्षा को लेकर हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। बेमेतरा जिले के 12 अभिभावकों की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस एके प्रसाद की एकल पीठ ने राज्य शासन को निर्देश दिया है कि सभी जिलों में, खास तौर पर बेमेतरा में LKG की कक्षाएं बिना देरी शुरू की जाएं।
कोर्ट ने साफ कहा कि आदेश की कॉपी मिलने के बाद 4 सप्ताह के अंदर LKG के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षक-व्यवस्था और एडमिशन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी, ताकि इसी सत्र में बच्चों को पढ़ाई का मौका मिल सके। कोर्ट ने टिप्पणी की कि शासन की कल्याणकारी शिक्षा योजना का लाभ किसी एक जिले के बच्चों से नहीं रोका जा सकता।
क्या है पूरा मामला?
प0साजा ब्लॉक के सुदर्शन लोढ़ी, सूरज साहू, गोविंद पटेल सहित 12 पालकों ने वकील के जरिए याचिका दायर की थी। उनका कहना था कि वे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार से आते हैं, बच्चों को आत्मानंद स्कूल में LKG में पढ़ाना चाहते हैं, लेकिन बेमेतरा जिले में LKG में एडमिशन ही शुरू नहीं हुआ। जबकि प्रदेश के कई अन्य जिलों में LKG से लेकर 12वीं तक अंग्रेजी माध्यम में प्रवेश दिया जा रहा है।
पालकों के मुताबिक राजामोहगांव के आत्मानंद स्कूल में संपर्क करने पर बताया गया कि शासन से LKG के लिए स्वीकृति, बजट और स्टाफ ही नहीं मिला है।
कोर्ट ने मामले में 27 फरवरी 2026 को DEO बेमेतरा और 28 फरवरी 2026 को स्कूल प्राचार्य द्वारा लिखे गए पत्रों का जिक्र किया। दोनों पत्रों में LKG शुरू न हो पाने की वजह बजट और स्टाफ की कमी बताई गई थी। कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड में इसके अलावा कोई ठोस वजह नहीं दिख रही है।
सरकार का तर्क और कोर्ट की टिप्पणी
शासन की ओर से उप महाधिवक्ता डॉ. सौरभ पांडे ने दलील दी कि सरकार की नीति हर जिले में एक मॉडल आत्मानंद स्कूल खोलने की है, जिसका खर्च DMF से चलता है। RTE कानून और अनुच्छेद 21-ए के तहत 6 से 14 साल के बच्चों को शिक्षा का अधिकार है, LKG प्री-स्कूल स्तर है, इसलिए इसे हर जगह शुरू करना कानूनी रूप से अनिवार्य नहीं है, यह सरकार के नीतिगत विवेक पर निर्भर करता है।
कोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि जब शासन ने पूरे प्रदेश में अंग्रेजी माध्यम में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने की योजना बनाई है, तो उसका लाभ हर जिले के बच्चों को समान रूप से मिलना चाहिए। क्षेत्र के आधार पर भेदभाव नहीं हो सकता।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला
कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के दिनेश बिवाजी अष्टिकार बनाम महाराष्ट्र शासन के फैसले का हवाला दिया और कहा कि शिक्षा में समान अवसर अनुच्छेद 14 और 21 से जुड़ा संवैधानिक अधिकार है। शिक्षा समवर्ती सूची में है, इसलिए केंद्र और राज्य दोनों की जिम्मेदारी है कि सभी बच्चों तक बिना भेदभाव शिक्षा पहुंचे।
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