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‘त्रिधारा’ [हिंदी संस्करण] : ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में आयोजित ‘कॉफ़ी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श अड्डा-129’ में बांग्ला की सुप्रसिद्ध लेखिका स्मृति दत्त की मूल बांग्ला पुस्तक ‘त्रिधारा’ का हिंदी अनुवाद ‘त्रिधारा’ का विमोचन हुआ

👉 • एस.एस. पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित मूल पुस्तक ‘त्रिधारा’ का हिंदी अनुवाद सरला शर्मा एवं मोऊ दत्त ने किया. इस पुस्तक की लेखिका स्मृति दत्त ने कृति को अपने प्रिय मित्र स्व. कल्लोल भट्टाचार्य को समर्पित किया है.
• छत्तीसगढ़ आसपास
• भिलाई
भिलाई [प्रदीप भट्टाचार्य] : भिलाई निवास के इंडियन कॉफ़ी हाउस में बीते दिनों ‘बंगीय साहित्य संस्था’ की उप सभापति एवं बांग्ला की सुप्रसिद्ध वयोवृद्ध लेखिका स्मृति दत्त की बांग्ला में प्रकाशित पुस्तक ‘त्रिधारा’ के हिंदी अनुवाद कृति ‘त्रिधारा’ का विमोचन किया गया. बांग्ला से हिंदी ‘त्रिधारा’ का अनुवाद सुपरिचित लेखिका सरला शर्मा और मोऊ रॉय ने किया है. मुखपृष्ठ एवं अंदर के पृष्ठ का चित्रांकन आर्टिस्ट गौतम कुमार शील [भिलाई] एवं प्रसोन्नजीत चौधुरी [कोलकाता] ने बनाया है.

👉 विमोचन : ‘त्रिधारा’ हिंदी संस्करण
विमोचन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ‘बंगीय साहित्य संस्था’ की सभापति व बांग्ला-हिंदी की देशव्यापी कवयित्री श्रीमती बानी चक्रवर्ती थीं. अध्यक्षता ‘त्रिधारा’ की अनुवादक व बांग्ला-हिंदी की जानकार लेखिका सरला शर्मा थीं. विमोचन के इस अवसर पर ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के अनेक सदस्य उपस्थित रहे.

👉 • विमोचन समारोह के साक्षी बनें- सरला शर्मा, ‘मध्यबलय’ के संपादक दुलाल समाद्दार, ‘बंगीय साहित्य संस्था’ की सभापति बानी चक्रवर्ती, महासचिव शुभेंदु बागची, ‘आरंभ’ साहित्य समिति के अध्यक्ष प्रदीप भट्टाचार्य, ब्रजेश मल्लिक, आलोक कुमार चंदा, जीवन चंद्र हालदार, सुबीर रॉय, तापस किरण रॉय, संध्या रॉय, तपन रॉय, बीरेंद्रनाथ सरकार, रतन सरकार, विपुल सेन, सुजॉशा सेन, गौतम कुमार शील, प्रभात मंडल, जॉली चक्रवर्ती, मीता दास, मनोरंजन दास, विष्णु ढाली, स्मृति दत्त की सुपुत्री अपर्णा रॉय, दामाद अमित रॉय, अपर्णा वर्मा एवं कवयित्री डॉ. बीना सिंह रागी और स्मृति के परिवार से जुड़े शुभचिंतक.
कार्यक्रम का कुशल संचालन अपने चिर-परिचित अंदाज़ में संस्था के महासचिव शुभेंदु बागची ने किया और आभार व्यक्त करते हुए भावुक हो उठीं, स्मृति दत्त की सुपुत्री नृत्यांगना अपर्णा रॉय ने दिया.
‘त्रिधारा’ विमोचन के पश्चात स्मृति दत्त ने अपनी बात रखी और कुछ रचनाओं का पाठ किया. स्मृति जी ने कहा कि मेरी बांग्ला ग्रंथ ‘त्रिधारा’ के अंतर्गत तीन स्वतंत्र कृतियाँ ‘आण्विक’, ‘कबियाल’ और ‘स्मरणिका’ को एक ही आवरण में हिंदी अनुवाद संग्रह एसएस पब्लिकेशन [बोरसी-भिलाई] ने प्रकाशित किया है. इस संग्रह का हिंदी अनुवाद सरला शर्मा व मोऊ रॉय ने किया. आवरण चित्र गौतम शील [भिलाई] एवं प्रसोन्नजीत चौधुरी [कोलकाता] ने बनाया. यह मेरी 10वीं कृति है. मेरी पूर्व में प्रकाशित बंगाली संग्रह है- ‘नाना दिनेर नाना रंग’ [2015] ‘एकेर भीतर तीन’ [2016] ‘जा देखी जा सुनी’ [2017] ‘जुगलबंदी’ [2019] ‘हृदयेर दुकूले’ [2020] ‘लेनिन साहेबर साथे देखा’ [2021] ‘केमिस्ट्री प्रेक्टिकल ओ टीवी शो’ [2022] और ‘त्रिधारा’ [2023]. मैंने अपने जीवनकाल में प्रकाश का मुख देख लिया, मेरी मनोकामना पूरी हो गई. मूल पुस्तक ‘त्रिधारा’ को मैंने मेरे प्रिय उस मित्र को समर्पित किया है, जिनसे कभी भेंट नहीं हुई. वे हैं स्व. कल्लोल भट्टाचार्य.
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• ‘त्रिधारा’ तीन खंडों में है-

प्रथम खंड- ‘आनबिक’ : को लेखिका स्मृति दत्त ने कनाडा के बिप्लब मजूमदार को समर्पित किया है. इस खंड का प्रस्तावना ‘मध्यबलय’ के संपादक दुलाल समाद्दार ने लिखा है. इस खंड में 17 लघु कथा/कहानियां प्रकाशित की गई है.

द्वितीय खंड- ‘कबियाल’ : को लेखिका स्मृति दत्त ने बांग्लादेश के कवि अहमद बेलाल को समर्पित किया है. इस खंड का प्रस्तवाना ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के उप सचिव एवं बांग्ला-हिंदी के चर्चित कवि प्रकाशचंद्र मण्डल ने लिखा है. इस भाग में 25 कविताएं प्रकाशित है.

तृतीय खंड- ‘स्मरणिका’ : को लेखिका स्मृति दत्त ने अपने साहित्यिक मित्र आरती चंद, समरेंद्र विश्वास, दुलाल समाद्दार, शुभेंदु बागची, प्रकाशचंद्र मण्डल, प्रदीप भट्टाचार्य, पल्लव चटर्जी, स्व. दीपक सरकार, मीता दास, मनोरंजन दास, दीपाली दासगुप्त, प्रतिमा नाग और मोऊ रॉय को समर्पित किया है. इस खंड की भूमिका लेखिका सरला शर्मा ने लिखी है. इस खण्ड में 19 संस्मरण एवं रोचक तथ्यों को लेखिका ने लिखा है.
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विमोचन कार्यक्रम की कुछ प्रमुख झलकियाँ-

👉 • ‘त्रिधारा’ की अनुवादक सरला शर्मा का अभिवादन किया लेखिका स्मृति दत्त ने

👉 • प्रगतिशील जन-विचारधारा की साहित्यिक संस्था ‘आरंभ’ के अध्यक्ष प्रदीप भट्टाचार्य को स्मृति दत्त ने ‘त्रिधारा’ की प्रति भेंट करते हुए

👉 • चित्रांकन आर्टिस्ट गौतम शील का अभिनंदन

👉 [बाएँ से] • आलोक कुमार चंदा, प्रदीप भट्टाचार्य, अमित रॉय, सरला शर्मा, स्मृति दत्त, बानी चक्रवर्ती, अपर्णा रॉय, डॉ. बीना सिंह रागी और दुलाल समाद्दार

👉 • लेखिका स्मृति दत्त का लेखकीय उद्बोधन

👉 • लेखिका स्मृति दत्त द्वारा सरला शर्मा और गौतम शील का स्मृति चिन्ह देकर सम्मान

👉 • सरला शर्मा का सम्मान [बाएँ से] प्रदीप भट्टाचार्य, अमित रॉय, अपर्णा रॉय, सरला शर्मा, स्मृति दत्त, तापस किरण रॉय, तपन रॉय, रतन सरकार और विपुल सेन

👉 ‘बंगीय साहित्य संस्था’ की सभापति बानी चक्रवर्ती का शुभकामना उद्बोधन

👉 • अपर्णा [बाएँ] और अपर्णा [दाएं] द्वारा स्वागत स्मृति दत्त का

👉 • स्मृति दत्त की सुपुत्री अपर्णा रॉय और दामाद अमित रॉय ने आभार व्यक्त किया

👉 • ‘त्रिधारा’ विमोचन के साक्षी साहित्यकार

👉 • कुशल संचालन किया- ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के महासचिव शुभेंदु बागची

👉 • बांग्ला-हिंदी के प्रगतिवादी कवि तपन रॉय को ‘त्रिधारा’ की प्रति सप्रेम भेंट लेखिका स्मृति दत्त द्वारा

👉 • देश की नामचीन कवयित्री मीता दास को ‘त्रिधारा’ की प्रति सप्रेम भेंट

👉 • बांग्ला के चिंतनशील कवि विपुल सेन को ‘त्रिधारा’ सादर भेंट

👉 • बांग्ला के विचारवान कवि तापस किरण रॉय को ‘त्रिधारा’ सप्रेम भेंट


[ • रपट एवं फोटो संयोजन : प्रदीप भट्टाचार्य ]
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chhattisgarhaaspaas
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